एएमआर (AMR) के बढ़ते खतरे पर एम्स ऋषिकेश का बड़ा प्रहार; स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता के लिए लॉन्च किया 'निःशुल्क राष्ट्रीय ई-कोर्स'

ऋषिकेश, 15 अप्रैल 2026: वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (AMR) से निपटने के लिए एम्स ऋषिकेश ने एक सराहनीय पहल की है। संस्थान ने 'एकीकृत एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप' प्रथाओं पर एक निःशुल्क फाउंडेशन राष्ट्रीय ई-कोर्स का शुभारंभ किया है।
 

एएमआर (AMR) के बढ़ते खतरे पर एम्स ऋषिकेश का बड़ा प्रहार;

पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

  1. उद्देश्य: एमडीआर (MDR), एक्सडीआर (XDR) और पीडीआर (PDR) जैसे रेजिस्टेंट रोगजनकों के प्रभाव को कम करना।
  2. कोर्स की प्रकृति: यह एक निःशुल्क ऑनलाइन ई-कोर्स है, जो स्वास्थ्य पेशेवरों और आम जनता दोनों के लिए उपयोगी है।
  3. मॉड्यूल: इसमें 24 संरचित मॉड्यूल शामिल हैं, जो डायग्नोस्टिक-संक्रमण-एंटीमाइक्रोबियल (DIA) मॉडल पर आधारित हैं।
  4. प्लेटफॉर्म: कोर्स lms.saspi.in पर उपलब्ध है।
  5. प्रमाणन: पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने पर प्रतिभागियों को 'ई-प्रमाण पत्र' प्रदान किया जाएगा।

एएमआर (AMR) के बढ़ते खतरे पर एम्स ऋषिकेश का बड़ा प्रहार;

क्यों आवश्यक है यह कोर्स?

एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने पाठ्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट किया कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर वैश्विक संकट है। उन्होंने कहा:

"हमें केवल दवाओं के प्रतिबंध से आगे बढ़कर चिकित्सकों, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और फार्माकोलॉजिस्ट के बीच आपसी तालमेल से उपचार (थेरेपी) को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना होगा।"

कोर्स का व्यापक दायरा

इस ई-कोर्स का समन्वय फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन और ईएनटी विभागों के फैकल्टी द्वारा किया जा रहा है। पाठ्यक्रम में निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है:

  • तर्कसंगत एंटीमाइक्रोबियल प्रिस्क्राइबिंग।
  • संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के तरीके।
  • अस्पताल की एंटीमाइक्रोबियल नीतियों का विकास।
  • ऑडिट और फीडबैक तंत्र का निर्माण।
  • फार्मासिस्टों की भूमिका और सामुदायिक स्टीवर्डशिप।

सहयोगात्मक प्रयास

यह ई-कोर्स एम्स ऋषिकेश और सोसाइटी ऑफ एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप प्रैक्टिसेस (SASPI) की एक संयुक्त पहल है। उद्घाटन सत्र में देश भर के 100 से अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हाइब्रिड मोड में भाग लिया। इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री और कोर्स लीडर डॉ. प्रसन कुमार पांडा सहित अनेक वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और जागरूक नागरिकों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर है। अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए lms.saspi.in पर लॉग इन करें।

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