देहरादून: मदरसों में 30 बच्चों को 'अवैध' लाने के आरोप पर बवाल; हिंदू युवा वाहिनी ने SSP से की निष्पक्ष जांच की मांग

देहरादून | 21 अप्रैल, 2026: राजधानी देहरादून के मदरसों में बाहरी राज्यों से बच्चों को लाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ लिया है। हिंदू युवा वाहिनी के पदाधिकारियों ने आज वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। संगठन का आरोप है कि बिहार और पश्चिम बंगाल से लगभग 30 बच्चों को अवैध तरीके से लाकर यहाँ के मदरसों में रखा गया है।

मदरसों में 30 बच्चों को 'अवैध' लाने के आरोप पर बवाल

क्या है पूरा मामला? (The Allegation)

हिंदू युवा वाहिनी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि हाल के दिनों में संदिग्ध परिस्थितियों में 30 बच्चों को दून लाया गया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि:

  1. इन बच्चों को कथित रूप से धार्मिक शिक्षा के नाम पर मदरसों में रखा जा रहा है।
  2. बच्चों को लाने की प्रक्रिया में कानूनी नियमों (Child Welfare Guidelines) का पालन नहीं किया गया है।
  3. बाहरी राज्यों से इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का आना सुरक्षा और 'डेमोग्राफिक चेंज' के लिहाज से चिंताजनक है।

संगठन की प्रमुख मांगें

एसएसपी को सौंपे गए मांग पत्र में वाहिनी ने निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की है:

  • पहचान का सत्यापन: मदरसों में रह रहे इन बच्चों के मूल निवास, आधार कार्ड और उनके अभिभावकों के दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाए।
  • अवैध तस्करी की आशंका: क्या इन बच्चों को लाने के पीछे कोई संगठित गिरोह है? इसकी निष्पक्ष जांच हो।
  • सुरक्षा सुनिश्चित हो: बच्चों की सुरक्षा और उनके कल्याण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन हस्तक्षेप करे।
  • दोषियों पर कार्रवाई: यदि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का कानूनी उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित मदरसा संचालकों पर सख्त कार्रवाई हो।

पुलिस का रुख

ज्ञापन प्राप्त करने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) और संबंधित थाना प्रभारियों को सूचनाओं के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सजगता की अपील

हिंदू युवा वाहिनी ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप नहीं किया, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। वर्तमान में पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन बच्चों के पास वैध यात्रा दस्तावेज और अभिभावकों की सहमति पत्र उपलब्ध हैं या नहीं।

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