देहरादून, 09 अप्रैल 2026: राजधानी देहरादून में पिछले कई दिनों से न्यायपालिक कार्यों को प्रभावित कर रही वकीलों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। दून बार एसोसिएशन और जिला प्रशासन के बीच चल रहा गतिरोध मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप के बाद सुलझ गया है। आज सचिवालय में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद बार एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल वापस लेने का औपचारिक ऐलान किया है।
ज्ञात हो कि यह विवाद देहरादून के जिलाधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा के बीच हुई एक तीखी बहस के बाद शुरू हुआ था, जिसके विरोध में 4 अप्रैल से अधिवक्ता कार्यबहिष्कार पर थे।
विवाद और समाधान: मुख्य घटनाक्रम पर एक नजर
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
हड़ताल की शुरुआत | 04 अप्रैल 2026 |
विवाद का मुख्य कारण | जिलाधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा के बीच विवाद |
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व | बार अध्यक्ष अनिल शर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा |
मध्यस्थता | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं कैबिनेट मंत्री खजान दास |
बैठक का स्थान | सचिवालय, देहरादून |
अंतिम निर्णय | हड़ताल तत्काल प्रभाव से वापस, कार्य पर लौटेंगे अधिवक्ता |
मुख्यमंत्री की चौखट पर पहुँचा विवाद: समाधान की निकली राह
देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से बताया कि हड़ताल को समाप्त करने का निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद लिया गया है। बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व स्वयं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा कर रहे थे, आज सचिवालय पहुँचा। इस मुलाकात के दौरान कैबिनेट मंत्री खजान दास भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। अधिवक्ताओं ने अपनी गरिमा और कार्यप्रणाली में प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार न्यायपालिका और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासनिक जवाबदेही और भविष्य की रणनीति
प्रेस वार्ता के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि मुख्यमंत्री ने इस विवाद पर "सकारात्मक कार्रवाई" के निर्देश दिए हैं। वकीलों की मांग थी कि प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार अधिवक्ताओं के प्रति सम्मानजनक होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भी जनहित और न्यायिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए कार्य करने की हिदायत दी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद वे और पूरा बार एसोसिएशन संतुष्ट है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की रक्षा करना था। मुख्यमंत्री के स्पष्ट रुख के बाद अब सभी अधिवक्ता वापस काम पर लौट रहे हैं, जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी।
आम जनता को मिलेगी राहत: 4 अप्रैल से ठप थे न्यायिक कार्य
पिछले 5 दिनों से चली आ रही इस हड़ताल के कारण देहरादून कचहरी में हजारों वादियों और फरियादियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। जमानत याचिकाओं से लेकर रजिस्ट्री और अन्य महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज लंबित पड़े थे।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने इस समाधान का स्वागत करते हुए कहा कि संवाद ही लोकतंत्र का सबसे बड़ा हथियार है। मुख्यमंत्री ने दोनों पक्षों के बीच सेतु का कार्य किया है, जिससे अब जनता को राहत मिलेगी। बार एसोसिएशन ने प्रेस वार्ता में यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में ऐसे विवादों को टालने के लिए एक समन्वय समिति के गठन पर भी विचार कर रहे हैं।
अधिवक्ताओं की एकता और भावी कदम
बार एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि इस हड़ताल ने अधिवक्ताओं की एकता को प्रदर्शित किया है। हालांकि, कार्यबहिष्कार वापस ले लिया गया है, लेकिन बार एसोसिएशन मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन पर नजर रखेगा। प्रेस वार्ता के अंत में अध्यक्ष अनिल शर्मा ने सभी अधिवक्ताओं का धन्यवाद किया जिन्होंने इस संघर्ष में बार का साथ दिया।
देहरादून में अधिवक्ता और जिला प्रशासन के बीच का यह विवाद अब सुलझ चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और मध्यस्थता ने एक बड़े संवैधानिक संकट को टाल दिया है। अब देहरादून न्यायालय में कल से रौनक लौटेगी और न्यायिक प्रक्रिया सामान्य रूप से संचालित होगी।
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