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कोलकाता | 27 अप्रैल, 2026 :पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले चुनाव आयोग ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जिसने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की धड़कनें बढ़ा दी हैं। आयोग ने दक्षिण बंगाल की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश कैडर के तेजतर्रार आईपीएस और 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' अजय पाल शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है।
अजय पाल शर्मा को उस दक्षिण 24 परगना जिले का पुलिस ऑब्जर्वर बनाया गया है, जिसे ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के पावरफुल नेता अभिषेक बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता है।
कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा?
यूपी पुलिस में 'सिंघम' के नाम से मशहूर अजय पाल शर्मा अपराधियों के लिए खौफ का दूसरा नाम हैं। उनकी पहचान एक सख्त और 'जीरो टॉलरेंस' नीति वाले अफसर की है।
- एनकाउंटर स्पेशलिस्ट: यूपी में तैनाती के दौरान उन्होंने दर्जनों खूंखार अपराधियों का सफाया किया और कई बड़े गैंग्स को सलाखों के पीछे पहुँचाया।
- मनोवैज्ञानिक हथियार: उनकी कार्यशैली और कड़क छवि को अक्सर कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एक मनोवैज्ञानिक हथियार के रूप में देखा जाता है।
- चुनाव आयोग का भरोसा: आयोग ने उन्हें उन 11 नए पुलिस पर्यवेक्षकों की सूची में सबसे ऊपर रखा है, जिन्हें दूसरे चरण की 142 सीटों पर निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
अभिषेक बनर्जी के ही गढ़ में तैनाती क्यों?
दक्षिण 24 परगना जिला बंगाल की राजनीति का सबसे संवेदनशील केंद्र रहा है। यहाँ अक्सर चुनावी हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और राजनीतिक टकराव की खबरें आती हैं।
- यहाँ अजय पाल शर्मा जैसे अफसर को भेजने का मतलब है कि आयोग इस बार किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं करेगा।
- पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में शर्मा के पास केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस की तैनाती का सीधा अधिकार होगा।
- टीएमसी के इस गढ़ में एक 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' की मौजूदगी विपक्षी दलों और मतदाताओं के मन में सुरक्षा का भाव पैदा कर सकती है, जो सत्ताधारी दल के लिए चिंता का विषय है।
दूसरे चरण की चुनावी स्थिति
| चुनाव चरण | तिथि | विधानसभा सीटें | मुख्य क्षेत्र |
| पहला चरण | 23 अप्रैल | 152 | उत्तर बंगाल व अन्य |
| दूसरा चरण | 29 अप्रैल | 142 | कोलकाता, दक्षिण 24 परगना, दक्षिण बंगाल |
TMC का पलटवार: "क्या एनकाउंटर की नौबत आने वाली है?"
अजय पाल शर्मा की तैनाती की खबर मिलते ही टीएमसी के खेमे में नाराजगी और खलबली साफ देखी जा रही है। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है:
"क्या चुनाव आयोग को लगता है कि दक्षिण 24 परगना में शांति के लिए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की जरूरत है? यह स्थानीय कार्यकर्ताओं में खौफ पैदा करने और अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को कम करने की एक सोची-समझी साजिश है।" — TMC नेता
29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए चुनाव आयोग ने अपनी मंशा साफ कर दी है। एक तरफ जहाँ टीएमसी इसे अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनता इसे निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान की गारंटी के तौर पर देख रही है। अब देखना यह होगा कि यूपी का यह 'सिंघम' बंगाल के चुनावी समर में शांति व्यवस्था बनाए रखने में कितना सफल होता है।
