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देहरादून, 16 अप्रैल 2026: राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित 'नारी शक्ति वंदन टाउन हॉल सम्मेलन' में आज महिला सशक्तिकरण की नई गाथा लिखी गई। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और महिला सशक्तिकरण मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को भारत के राजनीतिक इतिहास में एक युगांतरकारी और ऐतिहासिक कदम बताया।
सम्मेलन की प्रमुख झलकियां
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी: सीएम ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए केवल एक कानून नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा में शामिल करने का एक संकल्प है।
- केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर: उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को न केवल अधिकार और सम्मान देगा, बल्कि नीति-निर्धारण और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी को अनिवार्य और सुनिश्चित बनाएगा।
- मंत्री रेखा आर्या: रेखा आर्या ने अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की आधी आबादी के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला कानून है।
क्यों है यह अधिनियम खास?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वर्षों से लंबित महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सपना अब धरातल पर उतर रहा है। सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे यह कानून महिलाओं को राजनीति के केंद्र में लाएगा:
- निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी: महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित होने से संसद और विधानसभाओं में उनकी आवाज और अधिक मुखर होगी।
- नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा: यह अधिनियम युवा महिलाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए नेतृत्व करने के नए अवसर खोलेगा।
- आत्मविश्वास की वृद्धि: समाज में महिलाओं के प्रति नजरिया बदलेगा और उन्हें निर्णय लेने वाली शक्ति के रूप में सम्मान मिलेगा।
युगांतरकारी बदलाव की ओर भारत
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह अधिनियम महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके विकास को प्राथमिकता देने की सरकार की मंशा को दर्शाता है। यह कानून वास्तव में भारतीय राजनीति में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा।
नारी शक्ति वंदन टाउन हॉल सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं को न केवल सुरक्षा प्रदान करने के लिए, बल्कि उन्हें सत्ता और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। यह अधिनियम आने वाले समय में देश में एक समावेशी और सशक्त राजनीतिक वातावरण तैयार करेगा।
