उत्तराखण्ड एसटीएफ का बड़ा प्रहार: अंतरराज्यीय फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का मास्टरमाइंड सतानन्द शर्मा रुद्रपुर से गिरफ्तार, खाते में मिले 1.70 करोड़ रुपये


Aapki Media AI


देहरादून।  मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के "अपराध मुक्त उत्तराखण्ड" विजन को साकार करने और राज्य में अवैध गतिविधियों को समूल नष्ट करने के उद्देश्य से स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ के कुशल निर्देशन में एसटीएफ ने देशव्यापी फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले रैकेट के मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड को ऊधमसिंह नगर जनपद के रुद्रपुर क्षेत्र से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। पकड़े गए अभियुक्त के बैंक खातों में इस अवैध और देशविरोधी काले कारोबार से अर्जित की गई लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपये की भारी-भरकम धनराशि का पता चला है, जिसे पुलिस द्वारा फ्रीज करने की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

उत्तराखण्ड एसटीएफ का बड़ा प्रहार: अंतरराज्यीय फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का मास्टरमाइंड सतानन्द शर्मा रुद्रपुर से गिरफ्तार, खाते में मिले 1.70 करोड़ रुपये


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ श्री अजय सिंह के नेतृत्व में चलाई जा रही इस व्यापक जांच के तहत अब तक कुल 03 अलग-अलग अभियोग पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें संलिप्त 09 अभियुक्तों को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इस पूरे सिंडिकेट से अब तक 14 अवैध आधुनिक असलहे और 355 जिंदा कारतूस बरामद किए जा चुके हैं।

4 जून को दर्ज मुकदमे की विवेचना में हुआ बड़ा खुलासा

इस संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले का खुलासा तब शुरू हुआ जब एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा बाहरी राज्यों से स्थानान्तरित (Transfer) होकर उत्तराखण्ड आए शस्त्र लाइसेंसों की वैधता, मूल रिकॉर्ड और सत्यता की सघन स्क्रूटनी व जांच की गई। शुरुआती जांच में भारी विसंगतियां और कूटरचना पाए जाने पर दिनांक 04 जून 2026 को जनपद ऊधमसिंह नगर की काशीपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

  1. दर्ज प्राथमिकी विवरण: एफआईआर संख्या 213/2026, धारा 318(4), 338, 336(3), 340, 61(2), 3(5), 111 बीएनएस (BNS) 2023।
  2. जांच का दायरा: इस मुकदमे की कड़ियों को जोड़ते हुए जब तकनीकी और वित्तीय साक्ष्य जुटाए गए, तो पता चला कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का रहने वाला सतानन्द शर्मा इस पूरे नेक्सस का मुख्य सूत्रधार है। मुखबिर तंत्र और सर्विलांस की मदद से एसटीएफ की टीम ने घेराबंदी कर उसे रुद्रपुर क्षेत्र से दबोच लिया।

शाहजहांपुर कलेक्ट्रेट के संविदाकर्मियों से मिलकर ऐसे होता था फर्जीवाड़ा

एसटीएफ की पूछताछ और विवेचना के दौरान अभियुक्त सतानन्द शर्मा के काम करने के बेहद शातिराना तौर-तरीकों (Modus Operandi) का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया कि अभियुक्त केवल साधारण फर्जी लाइसेंस नहीं छापता था, बल्कि वह सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड में भी सेंधमारी करता था।

यह नेटवर्क मुख्य रूप से निम्नलिखित चरणों में काम करता था:

  • रिकॉर्ड रूम से साठगांठ: अभियुक्त सतानन्द शर्मा उत्तर प्रदेश के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय (कलेक्ट्रेट) शाहजहांपुर में तैनात कुछ संविदाकर्मियों (Contractual Employees) के साथ मिलकर कूटरचित खेल खेलता था।
  • पुराने UIN नंबरों का दुरुपयोग: शाहजहांपुर से जिन पुराने शस्त्र लाइसेंसों के भौतिक रिकॉर्ड या फाइलें किन्हीं कारणों से गायब हो चुकी थीं, यह गिरोह चालाकी से उनके पुराने 'यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर' (UIN) का पता लगाता था।
  • फर्जी ऑनलाइन अपलोडिंग: उन पुराने और बंद पड़े UIN नंबरों का उपयोग करके, राष्ट्रीय शस्त्र लाइसेंस पोर्टल (NDAL-ALIS) पर फर्जी नाम, पते और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नया डाटा ऑनलाइन अपलोड कर दिया जाता था, ताकि पहली नजर में देखने पर लाइसेंस पूरी तरह वैध और ऑनलाइन दिखाई दे।
  • लोकल सिंडिकेट के जरिए नेटवर्क: उत्तराखण्ड के ऊधमसिंह नगर जनपद में सतानन्द शर्मा ने सौरभ अग्रवाल और उसके भाई गौरव अग्रवाल को अपना स्थानीय एजेंट बना रखा था। इन्हीं स्थानीय कड़ियों के माध्यम से उत्तराखंड के कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों और रसूखदारों से लाखों रुपये ऐंठकर उन्हें उत्तर प्रदेश के पते पर बने ये फर्जी लाइसेंस थमाए जाते थे, जिन्हें बाद में धोखे से उत्तराखण्ड ट्रांसफर करा लिया जाता था।

वित्तीय लेनदेन की जांच में यह प्रमाणित हुआ है कि अभियुक्त सतानन्द शर्मा के निजी और व्यावसायिक बैंक खातों में सौरभ अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, करन सिंह, जतिन कांडपाल, शुभम अग्रवाल समेत दर्जनों शस्त्र धारकों द्वारा सीधे लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

आदतन अपराधी है मास्टरमाइंड: उत्तर प्रदेश में भी दर्ज हैं गंभीर मामले

एसटीएफ के रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त सतानन्द शर्मा एक पेशेवर और आदतन अपराधी है, जो पहले भी कई बार जेल की हवा खा चुका है। वह उत्तर प्रदेश के गाजीयातबाद और शाहजहांपुर जिलों में भी इसी तरह के फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने और धोखाधड़ी करने के मामलों में मुख्य रूप से नामजद रहा है।

उत्तर प्रदेश में दर्ज उसके आपराधिक इतिहास का विवरण इस प्रकार है:

  1. थाना कविनगर, जिला गाजीबाद (उ0प्र0): एफआईआर संख्या 1681/2019 — धारा 420, 467, 468, 471, 120बी भादवि (IPC)।
  2. थाना पुवायां, जिला शाहजहांपुर (उ0प्र0): एफआईआर संख्या 635/2019 — धारा 420, 467, 468, 471 भादवि (IPC)।
  3. थाना कविनगर, जिला गाजीबाद (उ0प्र0): एफआईआर संख्या 2110/2019 — धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम (Gangster Act)। इन सभी मामलों में अभियुक्त के विरुद्ध संबंधित न्यायालयों में विचारण (Trial) चल रहा है।

केस प्रोफाइल, बरामदगी एवं प्रशासनिक डेटा

क्र.सं. विधिक एवं प्रशासनिक मानक (Case Metrics) दर्ज आधिकारिक विवरण एवं आंकड़े (Official Records)
1. कार्रवाई करने वाली मुख्य जांच एजेंसी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) उत्तराखण्ड, देहरादून
2. गिरफ्तार मुख्य मास्टरमाइंड का नाम सतानन्द शर्मा (उर्फ सदानन्द शर्मा) पुत्र श्री रामाधर शर्मा
3. अभियुक्त का स्थायी मूल निवास ग्राम अनावा, थाना पुंवाया (पुवायां), जिला शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
4. गिरफ्तारी का स्थान और तिथि थाना रुद्रपुर क्षेत्र, जनपद ऊधमसिंह नगर | दिनांक: 23 जून, 2026
5. उत्तराखंड में दर्ज मूल मुकदमा मु0अ0सं0 213/2026, धारा 318(4)/338/336(3)/340/61(2)/3(5)/111 BNS, थाना काशीपुर
6. कारोबार से अर्जित अनुमानित अवैध राशि लगभग 1,70,00,000 रुपये (एक करोड़ सत्तर लाख रुपये) बैंक खाते में प्राप्त
7. रैकेट में अब तक दर्ज कुल मुकदमे 03 अलग-अलग अभियोग (विभिन्न जनपदों में पंजीकृत)
8. अब तक जेल भेजे गए कुल अभियुक्त 09 अभियुक्त (सप्लायर और स्थानीय कड़ियों सहित)
9. अब तक बरामद कुल अवैध असलहे 14 शस्त्र (02 ऑटोमैटिक पम्प एक्शन गन, 02 रायफल, 09 पिस्टल, 01 रिवालवर)
10. अब तक बरामद कुल कारतूस 355 अदद जिंदा कारतूस (Ammunition)

एसएसपी एसटीएफ की कड़ी चेतावनी: "शस्त्र और लाइसेंस खुद सरेंडर करें"

इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ श्री अजय सिंह ने बाहरी राज्यों से संदिग्ध रूप से लाइसेंस बनवाकर उत्तराखंड में इस्तेमाल करने वाले शस्त्र धारकों को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी राज्यों से फर्जी तरीके से सैन्य या असैन्य श्रेणी के लाइसेंस बनवाकर, उन्हें चालाकी से उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में ट्रांसफर कराकर सही दर्शाने वाले सैकड़ों लोग इस वक्त स्पेशल टास्क फोर्स के रडार पर हैं।

एसएसपी एसटीएफ ने कहा कि ऐसे शस्त्र धारकों के पास कानूनी शिकंजे से बचने का अंतिम अवसर है:

  1. स्वेच्छा से आत्मसमर्पण: जिन लोगों को भी अपने शस्त्र लाइसेंस की वैधता को लेकर किसी प्रकार का संदेह है या जिन्होंने बिचौलियों के माध्यम से लाइसेंस बनवाए हैं, वे स्वयं पुलिस के सामने उपस्थित होकर अपना वेपन (Weapon) और लाइसेंस कलेक्ट्रेट या संबंधित थाने में सरेंडर (Surrender) कर दें।
  2. जीरो टॉलरेंस नीति: जांच टीम कड़ाई से एक-एक फाइल का भौतिक सत्यापन कर रही है। यदि जांच के दौरान किसी का लाइसेंस जाली पाया गया, तो बिना किसी ढील के कठोर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा और उनकी संपत्तियां कुर्क की जाएंगी।
  3. सुरक्षा के लिए खतरा: जाली और अवैध शस्त्र लाइसेंस सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा हैं, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

एसटीएफ की आम जनता से अपील: "यदि किसी भी नागरिक को अपने आसपास किसी व्यक्ति के पास संदिग्ध, फर्जी या बिना उचित दस्तावेजों के बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होकर आए शस्त्र लाइसेंस या अवैध हथियारों के संबंध में कोई भी पुख्ता जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत एसटीएफ कार्यालय को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी।"

इस जटिल और सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली गिरफ्तारी टीम

अंतरराज्यीय सिंडिकेट के इस बड़े और शातिर सरगना को ट्रैक कर दबोचने में निम्नलिखित निपुण पुलिस अधिकारियों व सर्विलांस टीम की मुख्य भूमिका रही:

  1. मुख्य नेतृत्व (एसटीएफ निरीक्षक): निरीक्षक विकास चौधरी, निरीक्षक अरुण कुमार
  2. उपनिरीक्षक (SI): उ0नि0 विपिन चन्द्र जोशी, उ0नि0 कृष्ण गोपाल मठपाल
  3. अपर उपनिरीक्षक/हेड कांस्टेबल: हे0 का0 रविन्द्र सिंह बिष्ट, हे0 का0 महेन्द्र गिरी
  4. आरक्षी (कांस्टेबल): कानि0 रवि बोरा, कानि0 जितेन्द्र कुमार
  5. तकनीकी एवं सर्विलांस टीम: किशन चन्द्र शर्मा, हे0कानि0 सुरेन्द्र कनवाल (सर्विलांस विंग)




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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