फील्ड स्टाफ की सुरक्षा से समझौता नहीं: बीएलओ से अभद्रता करने वाले असामाजिक तत्वों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कड़े निर्देश


Aapki Media AI


 देहरादून। उत्तराखंड में वर्तमान में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) कार्य की शुचिता और इसमें जुटे फील्ड स्टाफ की सुरक्षा को लेकर निर्वाचन आयोग ने अत्यंत कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जनपद देहरादून में पुनरीक्षण कार्य में तैनात एक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के साथ कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की गई अभद्रता और दुर्व्यवहार की घटना को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (जिलाधिकारियों) को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं कि शासकीय कार्य में बाधा डालने और फील्ड स्टाफ का मनोबल गिराने वाले ऐसे किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा न जाए और उनके खिलाफ तत्काल कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

फील्ड स्टाफ की सुरक्षा से समझौता नहीं: बीएलओ से अभद्रता करने वाले असामाजिक तत्वों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कड़े निर्देश


मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय का स्पष्ट मानना है कि लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण आधार यानी मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन (Update) बनाने का कार्य करने वाले इन फ्रंटलाइन कार्मिकों की सुरक्षा और सम्मान राज्य निर्वाचन आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बीएलओ के कठिन परिश्रम और मनोबल की रक्षा आवश्यक: सीईओ

विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा और हालिया घटनाक्रम पर बोलते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने कहा कि वर्तमान में संपूर्ण उत्तराखंड प्रदेश में मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन बनाने का विशेष अभियान तीव्र गति से चल रहा है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और समयबद्ध राष्ट्रीय कार्य को सफल बनाने के लिए राज्यभर के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अत्यधिक कठिन परिस्थितियों और विषम भौगोलिक क्षेत्रों में निरंतर कड़ा परिश्रम कर रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर इस बात को रेखांकित किया:

  • मनोबल पर विपरीत प्रभाव: फील्ड ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा बीएलओ या अन्य फील्ड स्टाफ के साथ की जाने वाली अभद्रता, गाली-गलौज या दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं केवल एक प्रशासनिक अपराध नहीं हैं, बल्कि यह पूरी शिद्दत से काम कर रहे फील्ड स्टाफ के मनोबल और उत्साह को गंभीर रूप से गिराने का काम करती हैं।
  • प्रशासनिक संरक्षण: निर्वाचन ड्यूटी में तैनात प्रत्येक कर्मचारी को पूर्ण प्रशासनिक और कानूनी संरक्षण प्राप्त है। यदि कोई भी व्यक्ति शासकीय कार्य में लगे इन कर्मचारियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है या उन्हें भयभीत करने का प्रयास करता है, तो उसे कानून के दायरे में लाकर दंडित किया जाएगा।
  • कड़े एक्शन के निर्देश: सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जनपदों में तैनात फील्ड स्टाफ से लगातार फीडबैक लें और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या अभद्रता की सूचना मिलने पर बिना किसी देरी के पुलिस के माध्यम से सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाएं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी की प्रदेश के मतदाताओं से अपील

इस अप्रिय घटनाक्रम के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने उत्तराखंड के समस्त सम्मानित मतदाताओं और प्रबुद्ध नागरिकों से एक भावुक और जिम्मेदार अपील भी जारी की है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और जागरूक लोकतंत्र के निर्माण के लिए यह अनिवार्य है कि राज्य का प्रत्येक पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराए और त्रुटियों को सुधारे। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बीएलओ आपके घर-घर तक पहुंच रहे हैं।

उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में अपना नागरिक कर्तव्य निभाएं और विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में आपके बूथों और क्षेत्रों में तैनात किए गए बीएलओ (BLO) तथा अन्य फील्ड स्टाफ का पूर्ण सहयोग करें। उन्हें आवश्यक और सही दस्तावेज उपलब्ध कराएं ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रह सके।

पुनरीक्षण अभियान, घटनाक्रम


क्र.सं. प्रशासनिक मानक एवं अभियान के बिंदु (Administrative Metrics) दर्ज आधिकारिक विवरण एवं निर्देश (Official Details)
1. वर्तमान में गतिमान मुख्य अभियान विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य (मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया)
2. अभद्रता की हालिया घटना का क्षेत्र जनपद देहरादून (उत्तराखंड)
3. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) उत्तराखंड डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम
4. प्रशासनिक स्तर पर सर्वोच्च प्राथमिकता बीएलओ (BLO) और समस्त फील्ड स्टाफ की सुरक्षा एवं सम्मान
5. जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को निर्देश असामाजिक तत्वों के विरुद्ध तत्काल कठोर कानूनी व विधिक कार्रवाई करना
6. फील्ड स्टाफ की मुख्य भूमिका कठिन परिश्रम के साथ घर-घर जाकर मतदाता डेटा का सत्यापन व पुनरीक्षण
7. दुर्व्यवहार का मुख्य नकारात्मक प्रभाव फील्ड स्टाफ के मनोबल और कार्यकुशलता में गिरावट आना
8. आम जनता से मुख्य प्रशासनिक अपेक्षा पुनरीक्षण टीम को सही जानकारी देकर पूर्ण सहयोग प्रदान करना


फील्ड स्टाफ की सुरक्षा हेतु बनाई जाएगी विशेष निगरानी प्रणाली

देहरादून की इस घटना के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय अन्य जनपदों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सभी तहसील और ब्लॉक स्तर पर सहायक निर्वाचन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AEROs) को निर्देशित किया जा रहा है कि वे अपने क्षेत्र के बीएलओ के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें। यदि किसी संवेदनशील या विवादित क्षेत्र में फील्ड स्टाफ को कार्य करने में किसी भी प्रकार की परेशानी या विरोध का सामना करना पड़ता है, तो जिला प्रशासन द्वारा उन्हें स्थानीय पुलिस बल का सहयोग भी तत्परता से उपलब्ध कराया जाएगा।

शासकीय सूत्रों का कहना है कि निर्वाचन कार्य में बाधा डालना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है, और आयोग इस मामले में "जीरो टॉलरेंस" की नीति के तहत आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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