देहरादून | 21 अप्रैल, 2026 : हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों को देखते हुए उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश ने अब एक-दूसरे का हाथ थामने का निर्णय लिया है। दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच आपदा प्रबंधन (Disaster Management) में सहयोग बढ़ाने, तकनीक साझा करने और अनुभवों से सीखने पर पूर्ण सहमति बनी है।
यूएसडीएमए (USDMA) का उच्चस्तरीय दौरा
हिमाचल प्रदेश के अपर मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने हाल ही में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) का दौरा किया। इस दौरान दोनों राज्यों के उच्चाधिकारियों के बीच आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया (Response) को लेकर विस्तृत तकनीकी चर्चा हुई।
इन प्रमुख क्षेत्रों में होगा साझा काम:
- भूस्खलन और बाढ़ नियंत्रण: दोनों राज्य भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) की समस्याओं से जूझते रहे हैं। अब इन आपदाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए साझा डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
- हिमनद झील विस्फोट (GLOF): जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे हिमनद झीलों के फटने के खतरों से निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति (Joint Strategy) बनाई जाएगी।
- भूकंपरोधी निर्माण: भूकंप के प्रति संवेदनशील होने के कारण, दोनों राज्यों ने सुरक्षित निर्माण तकनीकों को बढ़ावा देने और जागरूकता फैलाने पर सहमति जताई है।
हिमाचल ने सराहा उत्तराखण्ड का 'मॉडल'
हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखण्ड द्वारा किए गए नवाचारों की सराहना की और उन्हें अपने राज्य में लागू करने की इच्छा जताई:
- भूस्खलन न्यूनीकरण केंद्र (LMC): उत्तराखण्ड के विशेषज्ञता केंद्र की सराहना करते हुए इसे हिमालयी क्षेत्र के लिए अनुकरणीय बताया।
- 'भूदेव ऐप': भूस्खलन की सूचना और मैपिंग के लिए विकसित किए गए इस ऐप को हिमाचल भी अपना सकता है।
- DDRN सिस्टम: डिजिटल आपदा रिस्पॉन्स नेटवर्क (DDRN) को भी एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
जल्द होगा एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर
सहयोग को औपचारिक और कानूनी रूप देने के लिए दोनों राज्य जल्द ही एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन करेंगे। इसके माध्यम से:
- दोनों राज्यों की रेस्क्यू टीमें (SDRF) संयुक्त अभ्यास करेंगी।
- वैज्ञानिक डेटा और मौसम संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान सुगम होगा।
- आपदा के समय एक-दूसरे के संसाधनों (हेलीकॉप्टर, मशीनरी आदि) का उपयोग किया जा सकेगा।
उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश की यह पहल हिमालयी राज्यों के लिए एक नजीर साबित होगी। साझा तकनीक और एकजुटता से न केवल आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकेगा, बल्कि अनमोल मानव जीवन की रक्षा भी संभव होगी।
