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हरिद्वार, 18 मई, 2026: उत्तराखंड के स्वास्थ्य महकमे में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। पहाड़ों के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं सुधारने के बाद अब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मैदानी जिलों का रुख कर लिया है। अपने इसी कड़े और औचक एक्शन मोड के तहत स्वास्थ्य मंत्री ने आज तीर्थ नगरी हरिद्वार के दौरे के दौरान बिना किसी पूर्व सूचना के चैनराय जिला महिला चिकित्सालय पर 'सरप्राइज' छापा मारा।
निरीक्षण के दौरान जैसे ही मंत्री अस्पताल के भीतर दाखिल हुए, वहां की बदहाल स्वच्छता व्यवस्था, चारों तरफ फैली गंदगी और लचर प्रबंधन को देखकर उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। स्वास्थ्य मंत्री ने मौके पर ही मौजूद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार आलाधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन को जमकर फटकार लगाई और व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार न होने पर सीधे सस्पेंशन (निलंबन) की चेतावनी दे डाली।
निजी कार्यक्रम के बीच 'गुपचुप' पहुंचे अस्पताल; अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी
मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल सोमवार को एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम के सिलसिले में हरिद्वार पहुंचे थे। आमतौर पर मंत्रियों के दौरों की जानकारी स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को पहले से होती है, जिसके चलते सरकारी तंत्र कागजी तौर पर सब कुछ 'चकाचक' कर लेता है। लेकिन, स्वास्थ्य मंत्री ने इस बार बेहद गोपनीयता बरती।
- बिना प्रोटोकॉल का निरीक्षण: कार्यक्रम के बीच में ही उन्होंने अचानक अपना काफिला चैनराय जिला महिला चिकित्सालय की ओर मोड़ने के निर्देश दिए।
- मच गई अफरा-तफरी: जब मंत्री की गाड़ी अचानक अस्पताल परिसर में आकर रुकी, तो वहां तैनात डॉक्टरों, स्टाफ और अधिकारियों को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। देखते ही देखते पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और अधिकारी अपनी कमियां छुपाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
चैनराय जिला महिला चिकित्सालय के औचक निरीक्षण का मुख्य विवरण
| निरीक्षण का बिंदु | धरातल पर मिली स्थिति | स्वास्थ्य मंत्री का एक्शन / निर्देश |
| स्वच्छता एवं साफ-सफाई | अत्यंत असंतोषजनक, वार्डों और परिसर में गंदगी का अंबार। | अधिकारियों को सरेआम फटकार, तत्काल सफाई के आदेश। |
| अस्पताल का रखरखाव | बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर में गंभीर कमियां। | रखरखाव के बजट और कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश। |
| मरीज सुविधाएं | सुचारु व्यवस्था का अभाव, मरीजों में असमंजस। | 'मरीज सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता' का कड़ा अल्टीमेटम। |
| स्टाफ की जवाबदेही | मॉनिटरिंग और प्रशासनिक नियंत्रण बेहद ढीला। | नियमित मॉनिटरिंग और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी। |
अस्पताल की बदहाली देख चढ़ा पारा: "लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं"
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने अस्पताल के सामान्य वार्ड, प्रसूति कक्ष (लेबर रूम), ओपीडी और परिसर के चारों ओर चक्कर काटकर सफाई व्यवस्था का गहनता से जायजा लिया। इस दौरान दीवारों पर जमी गंदगी, डस्टबिनों की बदहाली और तीमारदारों के बैठने के स्थान पर फैली अव्यवस्था को देखकर मंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
अधिकारियों को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा:
"यह बेहद शर्मनाक है कि जिला स्तर के मुख्य महिला अस्पताल में इस प्रकार की बदहाली और गंदगी फैली हुई है। राज्य के सभी सरकारी और गैर-सरकारी चिकित्सालयों में स्वच्छता, संक्रमण मुक्त वातावरण और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को हर हाल में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना हमारा संकल्प है। अस्पतालों में किसी भी स्तर पर पाई जाने वाली ढिलाई या लापरवाही को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारी अपनी एसी केबिन से बाहर निकलें और धरातल पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।"
तत्काल सुधार के निर्देश; नियमित रूप से भेजी जाएगी रिपोर्ट
अस्पताल परिसर में कई गंभीर कमियां सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) हरिद्वार और अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को स्पष्ट और लिखित रूप से निर्देशित किया कि:
- 24 घंटे में सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो: अस्पताल के प्रत्येक कोने, शौचालयों और वार्डों में चौबीसों घंटे स्वच्छता सुनिश्चित की जाए।
- मरीजों के लिए सुचारु व्यवस्था: दूर-दराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवजातों के इलाज में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। टोकन सिस्टम और दवा वितरण खिड़की पर लाइनों को व्यवस्थित किया जाए।
- लगातार चेकिंग: जिले के उच्च स्वास्थ्य अधिकारी सप्ताह में कम से कम दो बार इस चिकित्सालय का औचक निरीक्षण करेंगे और उसकी रिपोर्ट सीधे शासन को भेजेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री के इस एक्शन से निकले 5 बड़े संदेश
- नो वीआईपी कल्चर: निजी दौरे पर होने के बावजूद मंत्री द्वारा शासकीय दायित्वों को प्राथमिकता देना उनकी जन-सरोकारी सोच को दर्शाता है।
- धरातल पर जांच: केवल फाइलों और आंकड़ों पर विश्वास करने के बजाय खुद जमीन पर उतरकर हकीकत जानना।
- अधिकारियों की जवाबदेही तय: गंदगी और अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर अस्पताल के शीर्ष प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराना।
- निजी अस्पतालों को भी संदेश: मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी गैर-सरकारी (प्राइवेट) अस्पतालों पर भी समान रूप से लागू होता है।
- स्वच्छता ही स्वास्थ्य: यह साफ संदेश दिया गया कि यदि अस्पताल ही स्वच्छ नहीं होंगे, तो वहां आने वाले मरीज कभी स्वस्थ नहीं रह सकते।
स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए 'कड़वी दवा' जरूरी
राजधानी देहरादून से लेकर सीमांत जनपदों तक, उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का यह 'अचानक' छापा मारना और अधिकारियों की क्लास लगाना व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एक बेहद जरूरी कदम है। हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण जिले में, जहां न केवल स्थानीय बल्कि देश भर से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, वहां के मुख्य महिला अस्पताल की ऐसी स्थिति चिंताजनक थी।
मंत्री की इस कड़ी फटकार और अल्टीमेटम का असर आने वाले दिनों में चैनराय चिकित्सालय की सूरत बदलने में कितना मददगार साबित होता है, यह देखने वाली बात होगी। बहरहाल, मंत्री के इस औचक एक्शन ने राज्य भर के डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को यह साफ संदेश दे दिया है कि वे अपनी ड्यूटी के प्रति सजग रहें, क्योंकि मंत्री की गाड़ी कभी भी उनके अस्पताल के गेट पर आकर रुक सकती है।
