नरेंद्रनगर: राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय की 'सुनामी', एक ही दिन में 210 वादों का निस्तारण; 11 लाख से अधिक की हुई वसूली


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नरेंद्रनगर (टिहरी गढ़वाल), 11 मई, 2026: न्याय मिलने में होने वाली देरी अक्सर आम आदमी के लिए मानसिक और आर्थिक बोझ बन जाती है, लेकिन 'राष्ट्रीय लोक अदालत' इस धारणा को बदलने में मील का पत्थर साबित हो रही है। शनिवार को नरेंद्रनगर स्थित न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान न्याय की एक सुखद तस्वीर सामने आई।

नरेंद्रनगर: राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय की 'सुनामी'; एक दिन में 210 मामलों का निपटारा, 11 लाख से ज्यादा की हुई वसूली!

सिविल जज जूनियर डिवीजन/न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेय गुप्ता की अदालत ने ऐतिहासिक कार्यक्षमता का प्रदर्शन करते हुए कुल 210 वादों का आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण किया। लोक अदालत की इस प्रक्रिया से न केवल अदालतों का बोझ कम हुआ, बल्कि वर्षों से कानूनी दांव-पेंच में फंसे वादी-प्रतिवादियों ने राहत की सांस ली।

रिकॉर्ड निस्तारण: 11.30 लाख रुपये की राजस्व वसूली

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान मामलों का निपटारा केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके वित्तीय परिणाम भी सकारात्मक रहे। न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेय गुप्ता के निर्देशन में आयोजित इस विशेष सत्र में समझौते के आधार पर भारी धनराशि की रिकवरी की गई।

  • कुल वसूली: लोक अदालत में सुलझाए गए 210 मामलों के माध्यम से कुल 11 लाख 30 हजार 100 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
  • राजस्व को लाभ: यह राशि विभिन्न अर्थदंडों, समझौतों और शुल्कों के रूप में सरकारी खजाने और संबंधित पक्षों को प्राप्त हुई।

किन श्रेणियों के मामलों का हुआ निस्तारण?

लोक अदालत में केवल छोटे मामले ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक महत्व के गंभीर मामलों को भी आपसी सहमति से सुलझाया गया। निस्तारित किए गए 210 वादों में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल थे:

  • एमवी एक्ट (Motor Vehicle Act): यातायात नियमों के उल्लंघन से संबंधित सैकड़ों चालानों का मौके पर ही निपटारा किया गया।
  • घरेलू हिंसा (Domestic Violence): महिलाओं के विरुद्ध होने वाली घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में काउंसलिंग के माध्यम से परिवारों को टूटने से बचाया गया।
  • सिविल वाद (Civil Cases): भूमि विवाद, पैसे के लेन-देन और अन्य दीवानी प्रकृति के मामलों को आपसी सहमति से खत्म किया गया।
  • लंबित मुकदमे: ऐसे मुकदमे जो लंबे समय से तारीखों के जाल में उलझे थे, उन्हें स्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत: नरेंद्रनगर रिपोर्ट कार्ड

विवरणसांख्यिकी
पीठासीन अधिकारीश्रेय गुप्ता (न्यायिक मजिस्ट्रेट)
कुल निस्तारित वाद210
कुल वसूली राशि₹11,30,100
प्रमुख मामलेएमवी एक्ट, घरेलू हिंसा, सिविल वाद
न्याय का स्वरूपत्वरित, सस्ता और आपसी सहमति पर आधारित

न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेय गुप्ता का संबोधन: "गरीबों के लिए वरदान है लोक अदालत"

इस अवसर पर वादी और प्रतिवादियों को संबोधित करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेय गुप्ता ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि समाज में शांति और सामंजस्य स्थापित करना है।

वक्तव्य के मुख्य अंश:

"सरकार और न्यायपालिका के सहयोग से गठित ये लोक अदालतें समाज के निर्धन और पिछड़े वर्ग के लिए एक वरदान हैं। यहाँ बिना किसी भारी-भरकम अदालती शुल्क के त्वरित और सस्ता न्याय मिलता है। लोक अदालत में होने वाले फैसले के खिलाफ कहीं अपील नहीं होती, जिससे मुकदमेबाजी का हमेशा के लिए अंत हो जाता है। आम जनता को छोटे विवादों के लिए सालों तक कचहरी के चक्कर काटने के बजाय इन मंचों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।"

वादी-प्रतिवादियों के चेहरे पर दिखी मुस्कान

अदालत परिसर में मौजूद कई वादी-प्रतिवादी न्याय मिलने के बाद भावुक और खुश नजर आए।

  1. मुक्त कंठ प्रशंसा: कई लोगों ने बताया कि जो मामले पिछले 3-4 सालों से लटके हुए थे, वे आज महज कुछ घंटों की काउंसलिंग और बातचीत से सुलझ गए।
  2. सरकार का आभार: लोगों ने सस्ते न्याय की इस व्यवस्था के लिए सरकार और माननीय न्यायालय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
  3. समय और पैसे की बचत: एक स्थानीय निवासी ने बताया कि लोक अदालत के कारण उन्हें वकील की भारी फीस और बार-बार कोर्ट आने-जाने के खर्च से मुक्ति मिल गई है।

लोक अदालत के लाभ: एक नजर में 

  • अंतिम फैसला: लोक अदालत के फैसले को कानूनी मान्यता प्राप्त है और इसके खिलाफ दोबारा अपील नहीं की जा सकती, जिससे विवाद का स्थायी समाधान होता है।
  • फीस की वापसी: यदि कोई मामला कोर्ट में लंबित है और वह लोक अदालत में सुलझ जाता है, तो जमा की गई कोर्ट फीस वापस मिल जाती है।
  • आपसी भाईचारा: चूँकि फैसला आपसी सहमति से होता है, इसलिए दोनों पक्षों के बीच शत्रुता समाप्त होती है और भाईचारा बना रहता है।
  • न्यायालय का बोझ कम: इससे नियमित अदालतों में लंबित गंभीर मुकदमों पर ध्यान केंद्रित करने का समय मिलता है।

न्याय के प्रति बढ़ता विश्वास

नरेंद्रनगर में 210 वादों का एक साथ निस्तारण होना यह दर्शाता है कि जनता का विश्वास अब वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र पर बढ़ रहा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेय गुप्ता की कार्यकुशलता और सरकार की 'सस्ता न्याय' नीति ने आज कई परिवारों को कानूनी उलझनों से मुक्त किया है। यह आयोजन न केवल नरेंद्रनगर बल्कि संपूर्ण टिहरी जनपद के लिए एक प्रेरक उदाहरण है कि कैसे सहयोग और संवाद के माध्यम से जटिल विवादों का अंत किया जा सकता है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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