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देहरादून। दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत सरकार की 'निरामया स्वास्थ्य बीमा योजना' के तहत अब जिले के दिव्यांगजनों को ओपीडी से लेकर सर्जरी तक के खर्चों से मुक्ति मिलेगी। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने 500 दिव्यांगों के प्रीमियम का खर्च खुद जिला प्रशासन द्वारा वहन करने का क्रांतिकारी निर्णय लिया है।
क्या है निरामया योजना और किसे मिलेगा लाभ?
निरामया योजना मुख्य रूप से उन दिव्यांगजनों के लिए तैयार की गई है जो गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। नेशनल ट्रस्ट के माध्यम से संचालित यह योजना केवल एक बीमा नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए एक संबल है जो महंगे इलाज के कारण अक्सर आर्थिक तंगी का सामना करते हैं।निरामया स्वास्थ्य बीमा योजना: एक नज़र में
| विशेषता | विवरण |
| कुल बीमा कवर | ₹1,00,000 (प्रति वर्ष) |
| वार्षिक प्रीमियम (सामान्य) | मात्र ₹500 (न्यूनतम शुल्क) |
| BPL परिवारों के लिए | पूरी तरह निःशुल्क (प्रीमियम माफ़) |
| कवर होने वाले उपचार | ओपीडी, दवाइयां, पैथोलॉजी, सर्जरी और थेरेपी |
| विशेष सुविधा | जन्मजात दिव्यांगता के लिए करेक्टिव सर्जरी शामिल |
| पंजीकरण माध्यम | ऑनलाइन (डीडीआरसी देहरादून द्वारा) |
योजना के मुख्य आकर्षण और लाभ
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी व्यापकता है। आमतौर पर निजी बीमा कंपनियां पहले से मौजूद बीमारियों या जन्मजात स्थितियों को कवर नहीं करतीं, लेकिन 'निरामया' में ऐसा नहीं है।
- व्यापक चिकित्सा कवरेज: इसमें अस्पताल में भर्ती होने (नॉन-सर्जिकल) से लेकर डायग्नोस्टिक जांचों तक का खर्च शामिल है। यहाँ तक कि दांतों से जुड़ी समस्याओं और वैकल्पिक चिकित्सा को भी इसमें स्थान दिया गया है।
- थेरेपी का समर्थन: दिव्यांगता के प्रभाव को कम करने के लिए दी जाने वाली नियमित थेरेपी का खर्च भी इस ₹1 लाख की सीमा के भीतर क्लेम किया जा सकता है।
- सरल पंजीकरण प्रक्रिया: जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल के अनुसार, चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है और डीडीआरसी (DDRC) को पंजीकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
