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देहरादून, 14 मई, 2026: राजधानी देहरादून के विकासनगर क्षेत्र से भ्रष्टाचार और राजस्व चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल द्वारा उप निबंधक कार्यालय (Sub-Registrar Office) विकासनगर में किए गए औचक निरीक्षण और छापेमारी में गंभीर अनियमितताओं का कच्चा चिट्ठा खुल गया है।
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| भ्रष्टाचार पर 'बंसल' का प्रहार; विकासनगर कार्यालय में हड़कंप |
मामले की गंभीरता और करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान को देखते हुए जिलाधिकारी ने उप निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) अपूर्वा सिंह के तत्काल निलंबन और उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी है। इस कार्रवाई से जिले के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।
गोल्डन फॉरेस्ट घोटाला: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ीं
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निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा गोल्डन फॉरेस्ट की जमीनों को लेकर हुआ।
- 150 अवैध रजिस्ट्रियां: मा0 उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा गोल्डन फॉरेस्ट की भूमि के विक्रय पर कड़ा प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद, जिलाधिकारी ने जांच में पाया कि इस प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि की 150 अवैध गैरकानूनी रजिस्ट्रियां कर दी गईं।
- धोखाधड़ी का जाल: अधिकारियों ने न केवल नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि आम जनता (क्रेताओं) के साथ भी धोखाधड़ी की, क्योंकि प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री विधिक रूप से शून्य होती है।
- मिलीभगत की जांच: इस खेल में तत्कालीन कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी सघन जांच की जा रही है।
अलमारियों में डम्प मिले सैकड़ों दस्तावेज: 2018 से दबा रखी थीं फाइलें
डीएम सविन बंसल ने जब कार्यालय के अभिलेखों की जांच की, तो वहां रिकॉर्ड प्रबंधन की बदहाल स्थिति सामने आई।
- वर्षों पुराने विलेख जब्त: कार्यालय में वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक के सैकड़ों मूल विलेख पत्र (Original Deeds) संदिग्ध स्थिति में 'डम्प' पाए गए। नियमों के अनुसार इन्हें पंजीकृत होने के बाद तत्काल जारी किया जाना चाहिए था, लेकिन इन्हें वर्षों तक कार्यालय में क्यों रोका गया, इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
- 25 'लावारिस' रजिस्ट्रियां: 25 ऐसी रजिस्ट्रियां मिलीं जो वर्षों से बिना किसी कारण के कार्यालय में दबी थीं। न तो इनके बारे में उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया और न ही इन्हें अभिलेखों में दर्ज किया गया।
विकासनगर रजिस्ट्री कार्यालय में मिली अनियमितताओं का विवरण
| अनियमितता का प्रकार | विवरण / खुलासा |
| अवैध रजिस्ट्रियां | गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित भूमि की 150 रजिस्ट्रियां पकड़ी गईं। |
| स्टाम्प चोरी (धारा 47-ए) | स्टाम्प अपवंचन के 47 गंभीर प्रकरण चिन्हित किए गए। |
| दस्तावेजों की पेंडेंसी | वर्ष 2018 से 2025 तक के सैकड़ों मूल विलेख कार्यालय में डम्प मिले। |
| राजस्व हानि | करोड़ों रुपये की स्टाम्प ड्यूटी की चोरी का अनुमान। |
| अनुशासनात्मक कार्रवाई | सब-रजिस्ट्रार अपूर्वा सिंह के निलंबन की संस्तुति। |
करोड़ों की स्टाम्प चोरी: धारा 47-ए के तहत 47 मामले चिन्हित
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विकासनगर कार्यालय में बड़े पैमाने पर स्टाम्प चोरी का खेल चल रहा था।
- न्यून रेफरल: जिलाधिकारी ने पाया कि सब-रजिस्ट्रार द्वारा स्टाम्प अपवंचन (Under Valuation) के मामले जिलाधिकारी कार्यालय को बहुत कम और अपर्याप्त रूप से भेजे जा रहे थे।
- राजस्व का नुकसान: प्रारंभिक जांच में धारा 47-ए के अंतर्गत 47 ऐसे प्रकरण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई है।
- प्रक्रियात्मक उल्लंघन: रिकॉर्ड प्रबंधन और रखरखाव में जानबूझकर लापरवाही बरती गई ताकि धांधली को छुपाया जा सके।
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पूर्व तैनात सब-रजिस्ट्रार भी रडार पर; गहन जांच के आदेश
जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस घोटाले की जड़ें गहरी होने की आशंका जताई है।
- कार्यकाल की जांच: केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि पूर्व में तैनात रहे सभी सब-रजिस्ट्रारों के कार्यकाल की भी गहन जांच शुरू कर दी गई है। 2018 से चल रहे इन संदिग्ध मामलों में जो भी अधिकारी शामिल रहे हैं, उन सभी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की तैयारी है।
- अभिलेख जब्त: जिलाधिकारी ने महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स को कब्जे में ले लिया है ताकि उनके साथ छेड़छाड़ न की जा सके।
डीएम सविन बंसल की कार्रवाई के मुख्य बिंदु
- औचक छापेमारी: 4 मई को किए गए औचक निरीक्षण के बाद से ही गोपनीय जांच जारी थी, जिसका खुलासा 14 मई को हुआ।
- जीरो टॉलरेंस नीति: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत यह अब तक की सबसे बड़ी जिला स्तरीय कार्रवाई मानी जा रही है।
- अभिलेखों का डिजिटलीकरण: निरीक्षण में पारदर्शिता की भारी कमी पाई गई, जिसके बाद रिकॉर्ड प्रबंधन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
- जनहित की सुरक्षा: अवैध रजिस्ट्रियों को रोकने से अब निर्दोष खरीदारों को भविष्य में होने वाली कानूनी पेचीदगियों और वित्तीय नुकसान से बचाया जा सकेगा।
भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की ओर देहरादून का कदम
जिला प्रशासन देहरादून द्वारा की गई यह कार्रवाई राजस्व हितों की सुरक्षा की दिशा में एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के प्रति शासन की जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) नीति है।
विकासनगर का यह मामला केवल एक कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि जिले के अन्य सरकारी विभागों में भी इसी तरह की जवाबदेही तय की जाएगी। अब सबकी नजरें शासन पर टिकी हैं कि सब-रजिस्ट्रार अपूर्वा सिंह और अन्य दोषियों के विरुद्ध कितनी कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
