देहरादून: उत्तराखंड पुलिस का रूप धर सोशल मीडिया पर रौब झाड़ने वाला युवक गिरफ्तार; AI और डीपफेक तकनीक से बनाया था वरिष्ठ अधिकारी का भ्रामक वीडियो


Aapki Media AI


 देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड को अपराध मुक्त बनाए रखने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के विज़न के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और साइबर पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर उत्तराखंड पुलिस की फर्जी आईडी बनाकर लोक सेवक का प्रतिरूपण (Impersonation) करने वाले एक शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए अभियुक्त ने न केवल जाली आईडी बनाई, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) जैसी आधुनिक तकनीकों का दुरुपयोग कर उत्तराखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का भ्रामक वीडियो तैयार कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित भी किया था।


देहरादून: उत्तराखंड पुलिस का रूप धर सोशल मीडिया पर रौब झाड़ने वाला युवक गिरफ्तार; AI और डीपफेक तकनीक से बनाया था वरिष्ठ अधिकारी का भ्रामक वीडियो


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ उत्तराखंड श्री अजय सिंह के कड़े दिशा-निर्देशों के बाद एक्शन में आई साइबर पुलिस टीम ने अभियुक्त के पास से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन, फर्जी डिजिटल पुलिस आईडी और पुलिस की वर्दी से संबंधित कई संदिग्ध सामग्रियां बरामद की हैं।

फर्जी आईडी "Uttarakhand_police__112" बनाकर बटोर रहा था लोकप्रियता

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पुलिस के सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को इंस्टाग्राम पर एक संदिग्ध अकाउंट दिखाई दिया, जो हूबहू उत्तराखंड पुलिस के आधिकारिक हैंडल की तरह संचालित हो रहा था। जांच में पता चला कि कोई अज्ञात व्यक्ति "Uttarakhand_police__112" नाम से फर्जी इंस्टाग्राम आईडी चलाकर लोक सेवकों की छवि धूमिल कर रहा है और एआई तकनीक की मदद से भ्रामक डेटा पोस्ट कर रहा है।

इस डिजिटल वित्तीय और सामाजिक विसंगति को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून पर तत्काल निम्नलिखित धाराओं के तहत आपराधिक अभियोग पंजीकृत किया गया:

  1. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023: धारा 204 (लोक सेवक का प्रतिरूपण), 221, 336 और 356।
  2. सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम: धारा 66(सी) (पहचान चोरी/Identity Theft के लिए दंड)।

मुकदमा अपराध संख्या 37/2026 दर्ज होने के बाद एसएसपी एसटीएफ ने मामले के त्वरित अनावरण के लिए एक विशेष साइबर टीम का गठन किया।

मेटा (Meta) से प्राप्त डेटा विश्लेषण के बाद क्लेमेंटाउन से दबिश

साइबर पुलिस टीम ने तकनीकी जांच को आगे बढ़ाते हुए संबंधित सर्विस प्रदाता कंपनियों और विशेष रूप से मेटा (Meta Platforms, Inc.) से विधिक पत्राचार कर उक्त फर्जी अकाउंट का आईपी एड्रेस (IP Address), लॉग-इन हिस्ट्री और मोबाइल पंजीकरण डेटा प्राप्त किया। मेटा से प्राप्त इस तकनीकी डेटा का जब गहन विश्लेषण किया गया, तो कड़ियाँ देहरादून के क्लेमेंटाउन क्षेत्र से जुड़ीं।

दिनांक 24 जून 2026 को साइबर पुलिस ने पूरी तैयारी के साथ क्लेमेंटाउन के मोरोवाला क्षेत्र में अचानक दबिश दी, जहाँ से इस फर्जीवाड़े के मुख्य संचालक को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में अभियुक्त की पहचान 20 वर्षीय लुकमान मलिक के रूप में हुई।

पूछताछ के दौरान अभियुक्त लुकमान मलिक ने अपने अपराध को पूरी तरह स्वीकार करते हुए पुलिस को बताया:

  1. अधिकारी का डीपफेक वीडियो: उसने उत्तराखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की मूल फोटो को इंटरनेट से डाउनलोड किया और फिर एआई/डीपफेक वीडियो जनरेटर टूल्स के माध्यम से उस फोटो को एक भ्रामक और फर्जी बोलते हुए वीडियो में बदल दिया, ताकि लोग उसे सच मान लें।
  1. वर्दी पहनकर रील बनाना: वह केवल प्रभाव जमाने, सोशल मीडिया पर रातों-रात लोकप्रियता (Followers) हासिल करने और भविष्य में इसके जरिए आर्थिक लाभ (Monetization) कमाने के लिए पुलिस की वर्दी पहनकर फोटो खिंचवाता था और वीडियो (Reels) बनाकर पोस्ट करता था।

अभियुक्त के पास से बरामद हुए फर्जी पहचान पत्र और पुलिस पैटर्न के वस्त्र

पुलिस टीम ने जब अभियुक्त लुकमान मलिक के मोबाइल फोन को तकनीकी रूप से खंगाला, तो उसमें उक्त फर्जी इंस्टाग्राम आईडी "Uttarakhand_police__112" लाइव लॉग-इन स्थिति में पाई गई। मोबाइल की गैलरी से कई एआई-जनरेटेड भ्रामक वीडियो, पुलिस की वर्दी में अभियुक्त के स्वयं के फोटो और एक कूटरचित (जाली) पुलिस पहचान पत्र की फोटो भी रिकवर हुई है, जिसका उपयोग वह धरातल पर लोगों को डराने या प्रभाव जमाने के लिए करता था।

इसके अतिरिक्त, अभियुक्त के मोरोवाला स्थित घर की तलाशी लेने पर उत्तराखंड पुलिस के आधिकारिक पैटर्न से पूरी तरह मेल खाते वस्त्र, कैप, बैज और अन्य सामग्रियां भी बरामद की गईं, जिन्हें वह रील बनाने में प्रयुक्त करता था। पुलिस ने इन सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को नियमानुसार सीज (Seize) कर दिया है।

साइबर अपराध, बरामदगी एवं गिरफ्तार अभियुक्त

क्र.सं. विधिक एवं तकनीकी मानक (Cyber Case Metrics) दर्ज आधिकारिक विवरण एवं प्राप्त आंकड़े (Official Details)
1. कार्रवाई करने वाली मुख्य एजेंसी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून (STF), उत्तराखंड
2. गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व उम्र लुकमान मलिक पुत्र इकबाल मलिक (उम्र- 20 वर्ष)
3. अभियुक्त का स्थायी पता मोरोवाला, क्लेमेन्टाउन, देहरादून (उत्तराखंड)
4. पंजीकृत मुकदमा विवरण मु0अ0सं0 37/2026, धारा 204/221/336/356 BNS एवं 66(C) IT Act
5. प्रयुक्त फर्जी इंस्टाग्राम हैंडल "Uttarakhand_police__112"
6. अपराध में प्रयुक्त मुख्य तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं डीप फेक (Deepfake) वीडियो मेकिंग
7. बरामद मुख्य डिजिटल सामग्री 01 मोबाइल फोन (लॉग-इन आईडी सहित), एआई वीडियो एवं फर्जी डिजिटल पुलिस आईडी
8. बरामद मुख्य भौतिक सामग्री उत्तराखंड पुलिस पैटर्न से मिलते-जुलते वस्त्र एवं वर्दी सामग्री
9. अपराध का मुख्य उद्देश्य प्रभाव जमाना, सोशल मीडिया पर लोकप्रियता एवं अवैध आर्थिक लाभ पाना

एसटीएफ की सोशल मीडिया यूजर्स को चेतावनी: एआई का दुरुपयोग पड़ेगा भारी

इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ श्री अजय सिंह ने सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले युवाओं को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर किसी भी सरकारी विभाग, सेना, या लोक सेवक (पुलिस) के नाम से फर्जी अकाउंट बनाना, उनकी आधिकारिक वर्दी का अनधिकृत उपयोग करना और लोगों को गुमराह करना एक गंभीर संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है।

एसटीएफ द्वारा जारी मुख्य विधिक दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं:

  1. डीपफेक पर सख्त कानून: किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, विशेषकर प्रतिष्ठित पदों पर बैठे अधिकारियों की तस्वीरों के साथ एआई (AI) के जरिए छेड़छाड़ करना या डीपफेक वीडियो बनाना सीधे तौर पर आईटी एक्ट और देश की सुरक्षा व शांति व्यवस्था के नियमों का उल्लंघन है, जिसमें लंबी जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
  2. पहचान का सत्यापन आवश्यक: आम नागरिकों से अपील है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी पुलिस या सरकारी अकाउंट पर भरोसा करने से पहले उस पर लगे 'ब्लू टिक' या आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए सोशल मीडिया लिंक्स का मिलान अवश्य कर लें।
  3. भ्रामक प्रचार से बचें: यदि कोई व्यक्ति जाने-अनजाने में भी ऐसे फर्जी संदेशों या वीडियो को आगे शेयर (Forward) करता है, तो उसके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

इस त्वरित ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली पुलिस टीम

शॉर्ट नोटिस पर मेटा से डेटा प्राप्त कर शातिर अभियुक्त को चौबीस घंटे के भीतर ट्रैक करने वाली साइबर पुलिस टीम में मुख्य रूप से निम्नलिखित निपुण अधिकारी शामिल रहे:

  1. मुख्य टीम प्रभारी: निरीक्षक त्रिभुवन रौतेला
  2. विवेचक/उपनिरीक्षक (SI): उ0नि0 रमन बिष्ट
  3. अपर उपनिरीक्षक (ASI): अपर उ0नि0 सुमेर सिंह
  4. आरक्षी (कांस्टेबल): कांस्टेबल अजय भण्डारी

पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखंड श्री दीपम सेठ ने साइबर पुलिस स्टेशन देहरादून की इस त्वरित और वैज्ञानिक विधिक कार्रवाई की सराहना की है तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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