डॉ. आशीष चौहान: सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की ग्राउंड जीरो पर समीक्षा; बालकों के 'विस्तृत प्रोफाइल' और बेसिक लर्निंग प्रोग्राम के विधिक निर्देश


Aapki Media AI


देहरादून, 25 जून, 2026: उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में वंचित, निराश्रित महिलाओं तथा विधिक संरक्षण में रह रहे किशोरों के कल्याण, पुनर्वास (Rehabilitation) और उनकी सामाजिक सुरक्षा ग्रिड को सुदृढ़ करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह 'मिशन-मोड' पर आ गया है। जिलाधिकारी (DM) डॉ. आशीष चौहान ने आज गुरुवार (25 जून) को देहरादून के केदारपुरम क्षेत्र स्थित राजकीय नारी निकेतन, बाल सुधार गृह (Observation Home) तथा किशोरी संप्रेक्षण गृह का सघन स्थलीय निरीक्षण (On-Site Inspection) कर वहां संचालित व्यवस्थाओं का व्यापक विधिक व प्रशासनिक जायजा लिया।

 

केदारपुरम नारी निकेतन व बाल सुधार गृह पहुंचे डीएम डॉ. आशीष चौहान


इस संवेदनशील औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आवासीय संस्थानों में रह रहे बच्चों एवं संवासिनियों को उपलब्ध कराई जा रही दैनिक सुविधाओं, आंतरिक व बाह्य सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सीय सेवाओं, पोषण, स्वच्छता (Hygiene) तथा उनके दीर्घकालिक पुनर्वास से संबंधित गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मौके पर उपस्थित जिला स्तरीय अधिकारियों को दो टूक विधिक निर्देश दिए कि इन गृहों में रह रहे नागरिकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।


प्रशासनिक नवाचार: बेसिक लर्निंग प्रोग्राम और सभी बालकों की 'विस्तृत विधिक प्रोफाइलिंग'



बाल सुधार गृह के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वहां निवासरत बालकों के बीच जाकर उनसे सीधा और अत्यंत आत्मीय संवाद स्थापित किया। उन्होंने बच्चों की दैनिक दिनचर्या, उनके भोजन की गुणवत्ता, खेलकूद के संसाधनों और उनकी शैक्षिक अभिरुचि की विधिक जानकारी प्राप्त की। बालकों के बौद्धिक पुनरुद्धार के लिए डीएम ने मौके पर ही एक बड़ा प्रशासनिक नवाचार लागू करने के निर्देश दिए:

  1. बेसिक लर्निंग प्रोग्राम (Basic Learning Program): मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि संस्थान के भीतर ही बच्चों के लिए विशेष बौद्धिक क्षमता विकास कार्यक्रम शुरू किया जाए, ताकि वे बुनियादी विधिक व व्यावहारिक शिक्षा से वंचित न रहें।
  2. विस्तृत प्रोफाइलिंग (Detailed Profiling): जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) को कड़े निर्देश दिए गए कि सुधार गृह में रह रहे प्रत्येक बालक का एक विस्तृत व्यक्तिगत और मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल तैयार किया जाए। इस प्रोफाइल में बच्चे की पृष्ठभूमि, उसकी काउंसिलिंग का विवरण और उसकी विशेष योग्यताओं को विधिक रूप से संकलित किया जाएगा ताकि उनके पुनर्वास की योजना सटीक बनाई जा सके।

 

केदारपुरम राजकीय कल्याण संस्थान: निवासरत संख्या एवं सुशासन मानक आख्या 2026


संस्थानों में वर्तमान में निवासरत कुल जनसंख्या, उपस्थित प्रशासनिक व चिकित्सीय नेतृत्व तथा जिलाधिकारी द्वारा जारी कड़े विधिक एवं सुधारात्मक मानकों का संपूर्ण प्रामाणिक डेटा इस प्रशासनिक तालिका में संकलित है:


राजकीय आवासीय संस्थान का नाम व स्थलवर्तमान निवासरत जनसंख्या डेटा (25 जून, 2026)डीएम डॉ. आशीष चौहान द्वारा जारी कड़े प्रशासनिक व विधिक निर्देश
राजकीय नारी निकेतन, केदारपुरम, देहरादून।160 संवासिनियाँ (महिलाएं/युवतियां)सुरक्षा ऑडिट, नियमित संवेदनशील स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रभावी काउंसिलिंग।
राजकीय बाल सुधार गृह, केदारपुरम, देहरादून।07 किशोर (बालक)बेसिक लर्निंग प्रोग्राम का तत्काल संचालन एवं विस्तृत व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग।
किशोरी संप्रेक्षण गृह, केदारपुरम, देहरादून।12 किशोरियाँसंवेदनशीलता के साथ समस्याओं का त्वरित विधिक निवारण एवं उच्च सुरक्षा।
संस्थान की कुल संचित आच्छादित संख्या179 नागरिक (संयुक्त डेटा)शत-प्रतिशत मानवाधिकार मानकों, पोषण और जीरो-लापरवाही नीति का अनुपालन।
सुरक्षा एवं पुलिस प्रबंधन नोडलपुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) वंदना वर्मा।बाह्य चहारदीवारी की सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग व 24x7 गार्ड्स।
चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य नोडल अधिकारीसीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा।डॉक्टरों की नियमित विज़िट, दवाओं की उपलब्धता व मानसिक स्वास्थ्य थेरेपी।
शैक्षणिक एवं बौद्धिक सुधार नोडलसीईओ विनोद कुमार ढौंडियाल।बेसिक लर्निंग और वोकेशनल/कौशल विकास कार्यक्रमों का विधिक लिंकेज।

स्वास्थ्य और सुरक्षा पर विशेष बल: नियमित काउंसिलिंग और संवेदनशीलता के साथ समस्याओं का समाधान


जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि नारी निकेतन और किशोरी संप्रेक्षण गृह में रहने वाली महिलाओं व किशोरियों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को समझना और उन्हें सुरक्षा का माहौल देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) को निर्देश दिए कि संस्थानों में डॉक्टरों की टीम द्वारा नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य परीक्षण (Regular Health Check-ups) कराया जाए, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health Support) और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए।


सुशासन और मानवीय संवेदना पर जिलाधिकारी का कड़ा विधिक वक्तव्य:


"नारी निकेतन और बाल सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों और महिलाओं को एक स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना उत्तराखण्ड शासन की विधिक जिम्मेदारी है। परिसर की सुरक्षा व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार का लूपहोल (खामी) बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस और प्रोबेशन विभाग संयुक्त रूप से यहां की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट करें। संवासिनियों और किशोरियों की आवश्यकताओं और उनकी समस्याओं का प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध विधिक समाधान सुनिश्चित किया जाए। इन संस्थानों के संचालन में किसी भी स्तर पर पाई गई लापरवाही सीधे तौर पर दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आएगी।"


 

नारी निकेतन एवं बाल सुधार गृहों के कायाकल्प हेतु 4 मुख्य नीतिगत स्तंभ


परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और वहां के वातावरण को सकारात्मक व सुधारात्मक (Reformative Environment) बनाने के लिए डीएम ने निम्नलिखित चार विधिक और नीतिगत स्तंभों पर कार्य करने का आह्वान किया:


  • मानसिक स्वास्थ्य हेतु नियमित विधिक काउंसिलिंग: बाल कल्याण समिति (CWS) और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों के माध्यम से सभी बच्चों और संवासिनियों की साप्ताहिक काउंसिलिंग की जाएगी, ताकि वे अवसाद या मानसिक तनाव से मुक्त रह सकें।
  • स्वच्छता और हाइजीन का डिजिटल ऑडिट: परिसर के रसोईघर (Mess), शौचालयों और शयनकक्षों की दैनिक साफ-सफाई की औचक जांच की जाएगी। दूषित पानी और गंदगी पाए जाने पर सीधे सफाई सुपरवाइजर पर विधिक कार्रवाई होगी।
  • कौशल विकास एवं प्रभावी पुनर्वास (Skill Development): नारी निकेतन की संवासिनियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं और कौशल विकास विभाग के सहयोग से सिलाई, बुनाई, कंप्यूटर और हस्तशिल्प जैसे विधिक रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जाएंगे।
  • सुरक्षा घेरे का सुदृढ़ीकरण (Comprehensive Security): पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा को परिसर की बाह्य सुरक्षा बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरों के रीयल-टाइम कंट्रोल रूम को मजबूत करने तथा महिला पुलिस कर्मियों की राउंड-द-क्लॉक मुस्तैदी सुनिश्चित करने के विधिक निर्देश।

 

उच्च स्तरीय विधिक एवं प्रशासनिक टीम की मौजूदगी: सामूहिक उत्तरदायित्व का मंच


केदारपुरम के इस विस्तृत स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के साथ जनपद की समूची विधिक और प्रशासनिक टीम मौके पर मुस्तैद रही। इसमें बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती नमिता ममगाईं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री विनोद कुमार ढौंडियाल, समिति के सम्मानित सदस्य श्री पी.एन. जौहर, जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती मीना बिष्ट तथा पुलिस क्षेत्राधिकारी श्रीमती वंदना वर्मा सहित संबंधित विभागों के विधिक अधीक्षक व कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने डीएम के निर्देशों को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने और आगामी एक सप्ताह में अनुपालन आख्या (Compliance Report) प्रस्तुत करने का विधिक आश्वासन दिया।

 

दंडात्मक रवैये से सुधारात्मक पुनर्वास की ओर बढ़ता प्रशासनिक कदम 


25 जून 2026 को देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा किया गया यह सघन निरीक्षण इस व्यावहारिक सत्य को पुनर्कथित करता है कि बाल सुधार गृह और नारी निकेतन जैसी संस्थाएं केवल 'हिरासत या आवास केंद्र' नहीं हैं, बल्कि वे समाज के वंचित वर्गों के कायाकल्प और सुधारात्मक विधिक न्याय (Restorative Justice) की प्रयोगशालाएं हैं।


डीएम द्वारा 179 निवासरत नागरिकों (160 संवासिनियों, 07 बालकों और 12 किशोरियों) की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए दिए गए कड़े विधिक निर्देश और 'बेसिक लर्निंग प्रोग्राम' जैसे सुधारात्मक कदम इस बात का प्रमाण हैं कि देहरादून जिला प्रशासन एक संवेदनशील और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था की स्थापना के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इन दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत जमीनी अनुपालन ही देवभूमि के इन बच्चों और महिलाओं के जीवन में एक नया सवेरा ला सकता है, जिससे वे भविष्य में देश के जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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