हरिद्वार पुलिस का 'ऑपरेशन हावड़ा' सफल: 4 महीने की मासूम को पश्चिम बंगाल से सकुशल कराया मुक्त; ₹3 लाख के 'बॉय सिंडिकेट' के चक्कर में चुरा ली थी बच्ची, 3 गिरफ्तार


Aapki Media AI


हरिद्वार, 12 जून, 2026: धर्मनगरी हरिद्वार की पवित्र वादियों और गंगा घाटों पर सक्रिय अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह (Interstate Child Trafficking Racket) के एक बेहद सनसनीखेज और घिनौने चेहरे का पर्दाफाश करते हुए हरिद्वार पुलिस ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। लगभग 10 दिन पूर्व हरिद्वार के अति-व्यस्त विष्णु घाट क्षेत्र से सोते हुए परिवार के बीच से गायब की गई चार माह की मासूम दुधमुंही बच्ची को पुलिस ने सकुशल और जीवित बरामद कर लिया है।

हरिद्वार पुलिस का 'ऑपरेशन हावड़ा' सफल: 4 महीने की मासूम को पश्चिम बंगाल से सकुशल कराया मुक्त

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री नवनीत सिंह के कुशल और कड़े निर्देशन में गठित की गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल के हावड़ा (Howrah) तक हजारों किलोमीटर का सफर तय कर अपराधियों के सुराग तलाशे और आखिरकार इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि यह पूरा मामला 'ऑर्डर पर बच्चा चोरी' करने वाले एक संगठित रैकेट से जुड़ा हुआ था, जो निसंतान दंपत्तियों को मोटी रकम में नवजात शिशु बेचने का अवैध धंधा करता है। पुलिस ने इस मामले में एक दंपत्ति सहित तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।


अपहरण की खौफनाक वारदात: विष्णु घाट पर पेड़ के नीचे सो रहे परिवार पर पड़ी नजर


इस दिल दहला देने वाले मामले की शुरुआत आज से करीब दस दिन पहले हुई थी। पीड़ित गरीब परिवार हरिद्वार के विष्णु घाट क्षेत्र में एक विशाल पेड़ की छांव के नीचे सो रहा था। आधी रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर शातिर अपराधियों ने अपनी घिनौनी साजिश को अंजाम दिया। परिवार जब गहरी नींद में था, तब उनकी बगल में सो रही मात्र चार महीने की मासूम बच्ची को अपराधियों ने बिना किसी आहट के चुपचाप उठा लिया और मौके से रफूचक्कर हो गए।
सुबह जब मां की आंख खुली और बच्ची बिस्तर से गायब मिली, तो कोहराम मच गया। घाट पर मौजूद अन्य तीर्थयात्रियों और स्थानीय दुकानदारों की सूचना पर तुरंत कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की संवेदनशीलता और देवभूमि की कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवालों को देखते हुए एसएसपी नवनीत सिंह ने तुरंत कमान संभाली और जिले की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), सीआईयू (CIU) और स्थानीय पुलिस की पांच अलग-अलग टीमों को इस केस को हल करने के काम पर लगा दिया।

 

 

हरिद्वार-हावड़ा चाइल्ड ट्रैफिकिंग केस: वित्तीय, विधिक और खोजी मैट्रिक्स


इस सनसनीखेज अपहरण कांड के पीछे छिपी क्रिमिनल मॉडस ऑपेरंडी (Modus Operandi) और पुलिस के खोजी अभियान के मुख्य तथ्यों को इस तालिका के माध्यम से पारदर्शी रूप से समझा जा सकता है:


खोजी और विधिक घटक (Case Dynamics)पुलिस तफ्तीश और अपराधियों का नेटवर्क (Details)विधिक व वित्तीय आंकड़े (Figures)
पीड़ित/अपहृत (The Victim)मात्र 04 माह की मासूम बच्ची (सकुशल और पूरी तरह स्वस्थ बरामद)।विष्णु घाट से सोते हुए चुराई गई।
गिरोह का मुख्य टारगेट (The Target)आरोपियों को ₹3 लाख में लड़का (Baby Boy) उपलब्ध कराने का सौदा हुआ था।गलती से लड़की (Baby Girl) का कर लिया अपहरण।
अपराधियों का ठिकाना (The Rescue Location)उत्तराखंड के हरिद्वार से लेकर पश्चिम बंगाल का हावड़ा रेलवे स्टेशन व संबंधित इलाका।करीब 1400 किलोमीटर दूर से बरामदगी।
पंजीकृत विधिक धाराएं (Legal Sections)भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) (अपहरण), 143 (मानव तस्करी) व अन्य कड़े प्रावधान।फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कठोरतम सजा की तैयारी।
पकड़े गए कुल आरोपी (Arrests)एक शातिर दंपत्ति (पति-पत्नी) और उनका एक नजदीकी परिचित सहयोगी।कुल 03 आरोपी सलाखों के पीछे।

चौंकाने वाला खुलासा: ₹3 लाख में बेचना था लड़का, 'कन्फ्यूजन' में चुरा ली लड़की!


गिरफ्तार किए गए आरोपियों से कोतवाली हरिद्वार में की गई गहन कड़े पुलिस रिमांड और पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पकड़े गए दंपत्ति के किसी परिचित ने उन्हें एक निसंतान अमीर परिवार के लिए एक नवजात लड़का (Baby Boy) चोरी करके लाने का 'कॉन्ट्रैक्ट' दिया था। इस काम के बदले उन्हें ₹3,00,00,0 (तीन लाख रुपये) नकद देने का लालच दिया गया था।


इसी ₹3 लाख की लालच में यह दंपत्ति और उनका सहयोगी हरिद्वार के भीड़भाड़ वाले घाटों की रेकी (Reconnaissance) कर रहे थे। घटना वाली रात विष्णु घाट पर अंधेरे का फायदा उठाकर उन्होंने पेड़ के नीचे सो रही बच्ची को लड़का समझकर जल्दबाजी में उठा लिया। जब वे बच्ची को लेकर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचे और उन्हें पता चला कि वह लड़का नहीं बल्कि लड़की है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। इसके बाद, सौदा रद्द होने के डर से आरोपियों ने हरिद्वार छोड़ दिया और बच्ची को पश्चिम बंगाल के हावड़ा ले गए, ताकि वहां किसी अन्य दलाल या व्यक्ति के माध्यम से इस चार महीने की बच्ची को किसी और को ऊंची कीमत पर बेचा जा सके। लेकिन इससे पहले कि वे मासूम का सौदा कर पाते, हरिद्वार पुलिस के जांबाजों ने उन्हें धर दबोचा।


'ऑपरेशन हावड़ा': सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर डंप और तकनीकी साक्ष्यों से मिली सफलता


इस अंधेरे केस को सुलझाने के लिए हरिद्वार पुलिस ने अत्यधिक आधुनिक और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों (Scientific Investigation Methods) का सहारा लिया। एसएसपी नवनीत सिंह के निर्देशन में पुलिस टीमों ने निम्नलिखित स्तरों पर काम किया:


  • सीसीटीवी कैमरों का जाल: पुलिस ने विष्णु घाट, हर की पैड़ी, बस स्टैंड और हरिद्वार रेलवे स्टेशन के आस-पास लगे 300 से अधिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज को खंगाला। एक फुटेज में संदिग्ध दंपत्ति बच्ची को कपड़े में छुपाकर भागते हुए दिखाई दिया।
  • डिजिटल सर्विलांस और टावर डंप: घटना के समय विष्णु घाट क्षेत्र में सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों का 'टावर डंप' (Tower Dump) डेटा निकाला गया। जब संदिग्ध नंबरों की लोकेशन ट्रैक की गई, तो वह लगातार उत्तर प्रदेश को पार करते हुए बिहार और फिर पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ती हुई पाई गई।
  • हावड़ा में ऑन-साइट रेड: लोकेशन मिलते ही एसएसपी हरिद्वार ने तुरंत एक विशेष टीम को फ्लाइट के जरिए कोलकाता और वहां से हावड़ा के लिए रवाना किया। पश्चिम बंगाल पुलिस के समन्वय से हरिद्वार पुलिस ने हावड़ा रेलवे स्टेशन और उसके आस-पास के संदिग्ध ठिकानों पर कड़ा घेरा डाला और आरोपियों को रंगे हाथ दबोचकर मासूम बच्ची को उनकी चंगुल से छुड़ा लिया।

 

चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट के खात्मे हेतु हरिद्वार पुलिस की 4 सूत्रीय कड़ी नीति 


धर्मनगरी में भविष्य में ऐसी वारदातों को रोकने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने चार कड़े नीतिगत फैसले लिए हैं:


  • घाटों पर 'स्मार्ट सर्विलांस' और फेस रिकग्निशन: हरिद्वार के सभी प्रमुख घाटों (हर की पैड़ी, सुभाष घाट, विष्णु घाट) पर अब फेस रिकग्निशन कैमरे (Face Recognition Cameras) लगाए जाएंगे, जो देश भर के वांटेड बच्चा चोरों और अपराधियों के डेटाबेस से जुड़े होंगे।
  • एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) का सुदृढ़ीकरण: एएचटीयू की टीमों को अब घाटों पर सादे कपड़ों में 24 घंटे गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध रूप से छोटे बच्चों को लेकर घूमने वाले भिक्षुकों और संदिग्धों की रैंडम आईडी (ID) जांच की जाएगी।
  • गरीब व बेघर परिवारों की बायोमेट्रिक मैपिंग: घाटों के किनारे या खुले आसमान के नीचे सोने वाले गरीब परिवारों और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस उनका एक डिजिटल रिकॉर्ड (Biometric Mapping) तैयार करेगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना में तुरंत रिस्पॉन्स किया जा सके।
  • गैंगस्टर्स एक्ट और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई: एसएसपी नवनीत सिंह ने संकेत दिए हैं कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ न केवल अपहरण का मुकदमा चलेगा, बल्कि बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले इस पूरे अंतरराज्यीय गिरोह पर गैंगस्टर्स एक्ट (Gangsters Act) लगाकर इनकी अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को भी कुर्क किया जाएगा।

 

एसएसपी नवनीत सिंह और हरिद्वार पुलिस की कार्यशैली की जनता ने की मुक्तकंठ से सराहना


मात्र 10 दिनों के भीतर, उत्तराखंड से 1400 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल से एक असहाय और गरीब परिवार की चार महीने की मासूम बच्ची को सकुशल, बिना किसी खरोंच के वापस घर ले आना हरिद्वार पुलिस की प्रतिबद्धता और उच्च व्यावसायिक कार्यकुशलता (High Professionalism) का जीता-जागता प्रमाण है।


इस बेहद संवेदनशील और मानवीय मामले के सफल खुलासे के बाद पूरे हरिद्वार के स्थानीय नागरिकों, तीर्थ पुरोहितों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने एसएसपी नवनीत सिंह और उनकी पूरी टीम को बधाई दी है। लोगों का कहना है कि पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि देवभूमि में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है, चाहे वे देश के किसी भी कोने में जाकर क्यों न छिप जाएं।


कड़े कानून और सजग समाज से ही थमेगा बच्चों के अपहरण का यह काला कारोबार


हरिद्वार के विष्णु घाट से अगवा हुई चार महीने की मासूम बच्ची का हावड़ा से सकुशल रेस्क्यू किया जाना उत्तराखंड पुलिस सुशासन (Police Good Governance) की एक अत्यंत गौरवशाली और मानवीय गाथा है। ₹3 लाख की लालच में किसी सोती हुई मां की गोद सूनी कर देना और नवजात शिशुओं को 'ऑर्डर' पर बेचना मानवता के नाम पर सबसे घृणित विधिक और सामाजिक अपराध है।


इस केस के खुलासे ने यह भी साफ कर दिया है कि देश में बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह कितने शातिर और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, एसएसपी नवनीत सिंह की टीम ने जिस मुस्तैदी, सूझबूझ और अंतर-विभागीय समन्वय से 'ऑपरेशन हावड़ा' को अंजाम दिया, वह पूरे देश की पुलिसिंग के लिए एक बेहतरीन नजीर (Example) है। अब जिला प्रशासन और अभियोजन पक्ष को चाहिए कि पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत इतनी पुख्ता और वैज्ञानिक चार्जशीट तैयार की जाए कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से इन्हें ऐसी कठोर सजा मिले जो देश भर के बच्चा चोरों के दिल में कानून का खौफ पैदा कर दे। इसके साथ ही, समाज को भी अपने आस-पास के परिवेश के प्रति अधिक सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में फिर कभी किसी मासूम का बचपन इस तरह बिकने के लिए मजबूर न हो।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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