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देहरादून/रुद्रपुर, 12 जून, 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के "अपराध मुक्त उत्तराखंड" के कड़े विज़न और पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री दीपम सेठ के कुशल निर्देशन में राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अवैध हथियारों और कूटरचित (फर्जी) शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ अपनी कार्रवाई को अत्यंत आक्रामक कर दिया है। एसटीएफ ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कल देर रात्रि ऊधमसिंह नगर जनपद के रुद्रपुर क्षेत्र से मुख्य फरार नामजद अभियुक्त सौरभ अग्रवाल और उसके ड्राइवर को भारी मात्रा में अवैध ऑटोमैटिक हथियारों, जिंदा कारतूसों और फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के साथ गिरफ्तार कर लिया है।
एसएसपी एसटीएफ के सीधे पर्यवेक्षण (Supervision) में की गई इस त्वरित कार्रवाई से राज्य में दूसरे राज्यों से हथियार ट्रांसफर करवाकर फर्जीवाड़ा करने वाले अपराधियों में हड़कंप मच गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसटीएफ अब तक कुल 3 एफआईआर दर्ज कर 7 शातिर अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है, जिनसे पूछताछ के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं।
पूरा घटनाक्रम: काशीपुर से शुरू हुई कड़ियां, रुद्रपुर रोडवेज के पास दबोचे गए आरोपी
इस पूरे सनसनीखेज नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब एसटीएफ ने गहन खुफिया इनपुट के आधार पर 04 जून, 2026 को जनपद ऊधमसिंह नगर की काशीपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की गंभीर धाराओं के तहत एक वृहद मुकदमा दर्ज कराया था।
- 10 जून की बड़ी बरामदगी: इसी मुकदमे की विवेचना के क्रम में बीती 10 जून की रात को उत्तराखंड एसटीएफ और ऊधमसिंह नगर जिला पुलिस ने एक साझा और कड़ा ज्वाइंट ऑपरेशन (Joint Operation) चलाया था। काशीपुर क्षेत्र में एक लावारिस खड़ी स्विफ्ट कार की तलाशी लेने पर उसके भीतर से 04 अवैध अत्याधुनिक हथियार और 237 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।
- अपराधियों की पहचान: तकनीकी जांच और विधिक प्रलेखन के बाद यह साफ हुआ कि बरामद हथियार और कारतूस काशीपुर के रसूखदार नामजद अभियुक्त सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल (पुत्रगण राकेश अग्रवाल) और दीप्ति अग्रवाल (पत्नी सौरभ अग्रवाल) के हैं।
- रुद्रपुर में आधी रात को घेराबंदी: घटना के बाद से ही मुख्य आरोपी सौरभ अग्रवाल अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। कल देर रात्रि एसटीएफ के एसएसपी को एक बेहद गोपनीय और सटीक इनपुट मिला कि आरोपी रुद्रपुर क्षेत्र में भारी मात्रा में हथियारों के साथ किसी बड़ी वारदात या राज्य से भागने की फिराक में है। एसटीएफ की विंग ने तुरंत जाल बिछाया और रुद्रपुर रोडवेज बस स्टैंड के पास से मुख्य अभियुक्त सौरभ अग्रवाल और उसके ड्राइवर अमित पाल को धर दबोचा।
एसटीएफ फर्जी शस्त्र लाइसेंस ऑपरेशन: विधिक धाराएं, गिरफ्तारियां और बरामदगी
इस बेहद संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले की विधिक रूपरेखा, पकड़े गए अपराधियों और एसटीएफ की कुल बरामदगी का पूरा सांख्यिकीय और प्रशासनिक विवरण इस तालिका में देखा जा सकता है:
| विधिक एवं खोजी मानक (Parameters) | एसटीएफ चार्जशीट और केस विवरण (Case Specifications) | कानूनी व रणनीतिक महत्व (Strategic Value) |
| पंजीकृत अभियोग (FIR Details) | मुकदमा अपराध संख्या: 213/2026, कोतवाली काशीपुर, ऊधमसिंह नगर। | एसटीएफ द्वारा दर्ज कराया गया मुख्य बेस केस। |
| लागू नई विधिक धाराएं (BNS 2023) | U/S: 318(4) [धोखाधड़ी], 338 [फर्जी दस्तावेज बनाना], 336(3), 340, 61(2), 3(5), और 111 [संगठित अपराध] BNS। | पुराने आईपीसी के स्थान पर नए कड़े विधिक प्रावधानों के तहत एक्शन। |
| मुख्य गिरफ्तार अभियुक्त (Arrests) | 1. सौरभ अग्रवाल (पुत्र राकेश कुमार अग्रवाल, काशीपुर) 2. अमित पाल (ड्राइवर) (पुत्र प्रमोद पाल, कटोराताल, काशीपुर)। | सिंडिकेट के मुख्य संचालक और साक्ष्य छुपाने वाले मोहरे। |
| ताजा बरामदगी (Latest Seizures) | 01 पम्प एक्शन ऑटोमैटिक गन (12 बोर), 01 ऑटोमैटिक पिस्टल (30 बोर), 01 ऑटोमैटिक पिस्टल (32 बोर), 08 जिंदा कारतूस, 02 फर्जी लाइसेंस और कार की चाबी। | सार्वजनिक शांति को भंग करने वाले घातक हथियारों का जखीरा। |
| अब तक की कुल संचयी प्रगति | 03 अभियोग दर्ज, 07 शातिर आरोपी जेल भेजे गए, 12 अवैध हथियार और 315 जिंदा कारतूस बरामद। | राज्यव्यापी फर्जी लाइसेंस रैकेट की कमर टूटी। |
ड्राइवर अमित पाल ने रची थी साक्ष्य मिटाने की साजिश; कार की चाबी भी बरामद
एसटीएफ की पूछताछ में यह चौंकाने वाला सच भी सामने आया है कि 10 जून को काशीपुर की पार्किंग में जो स्विफ्ट कार भारी मात्रा में गोला-बारूद के साथ बरामद हुई थी, उसे वहां छुपाने में सौरभ अग्रवाल के वफादार ड्राइवर अमित पाल की मुख्य भूमिका थी।
अमित पाल ने पुलिस और एसटीएफ की आंखों में धूल झोंकने, विधिक सबूतों को पूरी तरह नष्ट करने और आपराधिक साक्ष्यों (Evidence) को छुपाने की नियत से उस कार को काशीपुर के एक गुप्त पार्किंग स्थल में ले जाकर लॉक कर दिया था। एसटीएफ ने कल रात जब अमित पाल की जामा तलाशी ली, तो उसके कब्जे से उसी स्विफ्ट कार की मुख्य चाबी (Key) भी बरामद हो गई, जो इस केस में आरोपियों की सीधी विधिक संलिप्तता को न्यायालय के समक्ष साबित करने के लिए एक अचूक और अकाट्य साक्ष्य (Incontestable Evidence) बनेगी।
हजारों बाहरी शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन जारी; साक्ष्यों के आधार पर और होंगी गिरफ्तारियां: SSP STF
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ ने इस महाऑपरेशन पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड में यह कार्रवाई केवल एक या दो अपराधियों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री और गृह विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों को समूल नष्ट किया जाए।
एसएसपी एसटीएफ का कड़ा रुख और अपील:
"उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के भीतर बाहरी राज्यों (विशेषकर अशांत क्षेत्रों या अन्य प्रदेशों) से स्थानांतरित (Transfer) होकर आए हजारों शस्त्र लाइसेंसों और उनके धारकों का सघन और व्यापक सत्यापन (Verification) अभियान जारी है। गिरफ्तार अभियुक्त सौरभ अग्रवाल ने पूछताछ में कई बड़े सफेदपोशों और अन्य अवैध शस्त्र धारकों के नामों का सनसनीखेज खुलासा किया है। बहुत जल्द ही हमारे पास मौजूद तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अन्य फर्जी लाइसेंस धारकों पर भी कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security), सार्वजनिक शांति और हमारी कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर और अदृश्य खतरा हैं। इसके खिलाफ उत्तराखंड पुलिस 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है।"
फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट के खिलाफ एसटीएफ की 4 सूत्रीय रणनीतिक नीति
राज्य को अवैध हथियारों से मुक्त कराने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा निम्नलिखित चार प्रमुख विधिक और प्रशासनिक मोर्चों पर काम किया जा रहा है:
- अंतरराज्यीय डेटाबेस का मिलान: एसटीएफ की टीमें उन बाहरी राज्यों (जैसे जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, या पूर्वोत्तर के राज्य) के गृह विभागों और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों से सीधे संपर्क साध रही हैं, जहां से ये लाइसेंस मूल रूप से जारी होना दिखाए गए हैं।
- संगठित अपराध (BNS 111) के तहत कार्रवाई: चूंकि यह मामला एक संगठित नेटवर्क के जरिए फर्जी मोहरें, कूट रचित दस्तावेज और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़ा है, इसलिए आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (Organized Crime) लगाई गई है, जिसमें जमानत मिलना बेहद कठिन होता है।
- सूचना तंत्र का लोकतंत्रीकरण (Genuineness Box): एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि यदि उनके आस-पास कोई भी ऐसा व्यक्ति है जिसके पास संदिग्ध या बाहरी राज्य का फर्जी लाइसेंस है, तो वे तुरंत एसटीएफ के आधिकारिक मोबाइल नंबर 9412029536 पर सूचना दें। सूचना देने वाले नागरिक का नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय (Strictly Confidential) रखी जाएगी।
- बैंक खातों और वित्तीय स्रोतों की जांच: इन फर्जी लाइसेंसों को बनाने के लिए लाखों रुपयों के अवैध लेनदेन की आशंका है। एसटीएफ अब पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों का वित्तीय ऑडिट (Financial Audit) भी करेगी ताकि मनी ट्रेल (Money Trail) का पता लगाया जा सके।
इन जांबाजों की टीम ने ऑपरेशन को दिया अंजाम: एसटीएफ की फ्रंटलाइन टीम
इस बेहद खतरनाक और रात के अंधेरे में किए गए खुफिया ऑपरेशन को धरातल पर उतारने में उत्तराखंड एसटीएफ के बेहतरीन और जांबाज अधिकारियों की टीम शामिल रही। इस फ्रंटलाइन टीम में मुख्य रूप से शामिल रहे:
- निरीक्षक विकास चौधरी (ऑपरेशन कमांडर)
- निरीक्षक अरुण कुमार
- निरीक्षक एम0पी0सिंह
- उपनिरीक्षक (SI) विपिन चन्द्र जोशी
- उपनिरीक्षक (SI) कृष्ण गोपाल मठपाल
- हेड कांस्टेबल (HC) रविन्द्र सिंह बिष्ट
- हेड कांस्टेबल (HC) महेन्द्र गिरी
- हेड कांस्टेबल (HC) सुरेन्द्र सावंत
- हेड कांस्टेबल (HC) संजय कुमार
- कांस्टेबल (Ct) सोनु पांण्डे
- किशन चन्द्र शर्मा (सर्विलांस एवं डिजिटल फॉरेनसिक विंग)
राष्ट्रीय सुरक्षा और सुशासन के लिए मील का पत्थर है एसटीएफ का यह हंटर
उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा रुद्रपुर रोडवेज के पास से सौरभ अग्रवाल और उसके ड्राइवर अमित पाल की भारी मात्रा में ऑटोमैटिक हथियारों जैसे—पंप एक्शन गन और .30 व .32 बोर की पिस्टलों के साथ गिरफ्तारी, देवभूमि की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम है। यह केवल साधारण अवैध हथियारों का मामला नहीं है, बल्कि 'फर्जी सरकारी दस्तावेजों और मोहरों' के सहारे अवैध बंदूकों को वैध (Legalize) दिखाने का एक बहुत बड़ा और खतरनाक राष्ट्रीय सुरक्षा का फ्रॉड (Fraud) है। ऐसे अवैध और बिना रिकॉर्ड वाले हथियार अगर समाज में खुलेआम घूमेंगे, तो वे किसी भी समय बड़ी हिंसक वारदातों, गैंगवार या आतंकी गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री के "अपराध मुक्त उत्तराखंड" के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए एसटीएफ के जांबाजों ने जिस तरह मात्र कुछ ही दिनों के भीतर 12 घातक हथियार, 315 कारतूस बरामद कर 7 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा है, वह राज्य पुलिसिंग के उच्च व्यावसायिक स्तर (High Professional Standards) को दर्शाता है। अब समय आ गया है कि जिला प्रशासनों के शस्त्र अनुभागों (Arms Sections) की भी आंतरिक जांच कराई जाए कि आखिर बाहरी राज्यों के ये फर्जी लाइसेंस उत्तराखंड के जनपदों में बिना गहन सत्यापन के कैसे ट्रांसफर हो गए। एसटीएफ की यह जीरो टॉलरेंस वाली कार्रवाई उन सभी रसूखदारों और सफेदपोशों के लिए एक कड़ा और सीधा सबक है जो पैसे के दम पर कानून को अपनी जेब में रखने का मुगालता पाले हुए हैं।

