विकासनगर के शीशमबाड़ा में अवैध मजार जमींदोज; जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की दो टूक- "कब्जा बर्दाश्त नहीं"


Aapki Media AI


देहरादून/विकासनगर, 02 जून, 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य में 'लैंड जिहाद' (Land Jihad) और सरकारी संपत्तियों पर अवैध धार्मिक या व्यावसायिक अतिक्रमण के खिलाफ घोषित की गई 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति के तहत आज राजधानी देहरादून में एक और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई देखने को मिली है। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग (सूवि देहरादून) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, जिला प्रशासन ने विकासनगर तहसील के अंतर्गत आने वाले शीशमबाड़ा क्षेत्र में एक विशाल अतिक्रमण विरोधी अभियान (Anti-Encroachment Drive) चलाकर सरकारी भूमि को पूरी तरह से मुक्त करा लिया है।

 

विकासनगर के शीशमबाड़ा में अवैध मजार जमींदोज; जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की दो टूक- "कब्जा बर्दाश्त नहीं"


जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के कड़े और सीधे निर्देशों के क्रम में, तहसील विकासनगर के प्रशासनिक अमले और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शीशमबाड़ा में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित की गई एक मजार और उसके आसपास खड़े किए गए अन्य अवैध व अस्थायी ढांचों को बुलडोजर और अन्य उपकरणों की मदद से पूरी तरह ध्वस्त (Demolished) कर दिया। प्रशासन की इस अचानक और त्वरित कार्रवाई से जिले भर के भू-माफियाओं, नदी-श्रेणी की जमीनों पर कब्जा करने वालों और मजहबी अतिक्रमणकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

 

अभिलेखों की जांच में खुली पोल: नोटिस के बाद भी खाली नहीं की गई थी सरकारी जमीन



शीशमबाड़ा क्षेत्र में हुई इस बड़ी विधिक कार्रवाई के पीछे एक लंबी प्रशासनिक और तकनीकी जांच प्रक्रिया शामिल थी। जिला प्रशासन को पिछले काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शीशमबाड़ा में कुछ असामाजिक और भू-माफिया तत्वों द्वारा सरकारी स्वामित्व की बेशकीमती भूमि को घेरकर वहां धार्मिक संरचना खड़ी की जा रही है, ताकि बाद में उस पूरी जमीन पर स्थायी कब्जा जमाया जा सके।


राजस्व और प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट:


"जिलाधिकारी के आदेश पर जब विकासनगर के उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) और तहसीलदार की अगुवाई में राजस्व विभाग (Revenue Department) की टीम ने संबंधित खसरा नंबरों और सरकारी अभिलेखों (Land Records) की गहन स्क्रूटनी की, तो यह तथ्य पूरी तरह प्रमाणित हो गया कि उक्त भूमि राज्य सरकार के नाम दर्ज है। इस सार्वजनिक भूमि पर बिना किसी विधिक स्वामित्व या अनुमति के, अवैध रूप से कब्जा जमाकर एक मजार का संचालन किया जा रहा था और उसके आसपास अस्थायी दुकानें व परिसर बनाए जा रहे थे।"


 

प्रशासन ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पूरी विधिक प्रक्रिया (Legal Due Process) का पालन किया। अतिक्रमणकारियों को पूर्व में नियमानुसार कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर जमीन खाली करने का पर्याप्त समय दिया गया था। जब निर्धारित समयसीमा के भीतर अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, तब प्रशासन ने बलपूर्वक ध्वस्तीकरण का यह कड़ा विधिक कदम उठाया।


शीशमबाड़ा अतिक्रमण ध्वस्तीकरण कार्रवाई की विधिक व सांख्यिकीय रूपरेखा


इस कार्रवाई के प्रशासनिक, कानूनी और भौगोलिक पहलुओं को इस विस्तृत सांख्यिकीय तालिका के माध्यम से पारदर्शी रूप से समझा जा सकता है:

 

विधिक एवं प्रशासनिक बिंदु (Parameters)जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण (Action Details)कानूनी आधार एवं आगामी रणनीतिक कदम (Legal Framework)
कार्रवाई का मुख्य स्थल (Location)शीशमबाड़ा क्षेत्र, तहसील- विकासनगर, जनपद- देहरादून।सरकारी अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक उपयोग की भूमि।
अवैध ढांचे का स्वरूप (Structure Type)अवैध रूप से निर्मित मजार (Mazar) एवं अन्य संबद्ध अस्थायी निर्माण।जनहित और कानून-व्यवस्था के संरक्षण हेतु पूर्ण ध्वस्तीकरण।
विधिक पूर्व-प्रक्रिया (Pre-Legal Process)राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश, सरकारी जांच एवं औपचारिक विधिक नोटिस।अतिक्रमणकारियों को अपना पक्ष रखने का दिया गया था पूरा अवसर।
शामिल संयुक्त टीमें (Teams On-Site)राजस्व विभाग (तहसील प्रशासन), पुलिस बल (Police Dept.) एवं स्थानीय निकाय।शांतिपूर्ण ढंग से बिना किसी कानून-व्यवस्था की समस्या के अभियान पूर्ण।
भविष्य की सुरक्षा नीति (Future Policy)निरंतर सर्वेक्षण, बाउंड्री वॉल का निर्माण और नियमित ड्रोन/भौतिक सतत निगरानी।खाली कराई गई भूमि पर दोबारा नए अतिक्रमण को रोकना।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पीला पंजा: बिना किसी विरोध के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई कार्रवाई


विकासनगर के शीशमबाड़ा में जैसे ही सुबह के समय राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें लोक निर्माण विभाग के बुलडोजरों और भारी मशीनरी के साथ पहुंचीं, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव, स्थानीय विरोध, चक्का जाम या कानून-व्यवस्था (Law and Order) की स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले ही भारी मात्रा में पीएसी (PAC) और स्थानीय पुलिस बल को तैनात कर दिया था।


ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। प्रशासनिक अधिकारियों की दृढ़ता और भारी सुरक्षा इंतजामों को देखते हुए अतिक्रमणकारियों या उनके समर्थकों को विरोध करने का कोई अवसर नहीं मिला। बुलडोजर ने कुछ ही घंटों के भीतर अवैध मजार के पक्के ढांचे और उसके आसपास अवैध कब्जे के उद्देश्य से बनाई गई दीवारों और टीन शेडों को मलबे में तब्दील कर दिया। मलबे को हटाने के बाद उक्त सरकारी भूमि पर लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग ने अपने बोर्ड लगा दिए हैं ताकि भविष्य में वहां कोई और दावा न कर सके।


"सरकारी भूमि जनता की संपत्ति है, कोई भी निजी कब्जा स्वीकार्य नहीं": डीएम डॉ. आशीष चौहान


इस सफल और बड़ी कार्रवाई के बाद देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद के भीतर चाहे वह देहरादून शहर हो, विकासनगर, चकराता, ऋषिकेश या डोईवाला हो, सरकारी भूमि पर किया गया किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा:


"सरकारी भूमि वास्तव में आम जनता की सामूहिक संपत्ति है, जिसका उपयोग केवल और केवल सार्वजनिक हितों, पार्कों, सड़कों, अस्पतालों या सरकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है। इस पर किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा किया गया निजी या धार्मिक कब्जा पूरी तरह से गैर-कानूनी और अस्वीकार्य है। जनहित और कानून-व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन का यह अतिक्रमण हटाओ अभियान आगे भी पूरी सख्ती, निष्पक्षता और बिना किसी भेदभाव के जारी रहेगा।"


 

सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और अतिक्रमण की रोकथाम हेतु 4 सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश


जिलाधिकारी ने इस ध्वस्तीकरण के बाद जनपद के सभी उप जिला मजिस्ट्रेटों (SDMs) और तहसीलदारों को भविष्य के लिए चार अत्यंत कड़े नीतिगत निर्देश जारी किए हैं:


  • तहसीलवार अतिक्रमण स्थलों का सर्वेक्षण: जनपद की विभिन्न तहसीलों में जितने भी नदी-नाले, चरागाह, वन भूमि या लोक निर्माण विभाग की जमीनों पर अवैध धार्मिक या व्यावसायिक ढांचे बने हैं, उनका त्वरित गति से एक व्यापक सर्वेक्षण (Survey) कराया जा रहा है और इन्हें चरणबद्ध (Phase-wise) तरीके से ध्वस्त किया जाएगा।
  • नियमित निरीक्षण एवं सतत निगरानी: संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित न रहें, बल्कि सरकारी भूमि पर 'नए अतिक्रमण' की रोकथाम के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित भौतिक निरीक्षण (Regular Inspection) और सेटेलाइट/ड्रोन के माध्यम से सतत निगरानी सुनिश्चित करें।
  • शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज: यदि किसी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा जमीन खाली कराए जाने के बाद दोबारा अतिक्रमण होता है, तो इसके लिए वहां के स्थानीय पटवारी, लेखपाल और राजस्व निरीक्षक को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हुए निलंबित किया जाएगा।
  • आम जनता से गुप्त सूचना देने की अपील: जिला प्रशासन ने देहरादून के आम नागरिकों से भी एक महत्वपूर्ण अपील की है कि यदि उनके आसपास कहीं भी सरकारी या ग्राम समाज की भूमि पर कोई अवैध कब्जा, मजार, मंदिर या दुकान बनाने का प्रयास कर रहा है, तो इसकी तत्काल और गोपनीय जानकारी जिला कंट्रोल रूम या सीधे संबंधित एसडीएम को दें, ताकि समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके।

 

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के आलोक में उत्तराखंड सरकार की बड़ी नीति


उत्तराखंड में चल रहा यह अतिक्रमण विरोधी अभियान केवल प्रशासनिक सनक नहीं है, बल्कि यह माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) और माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल) द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक स्थानों, सड़कों और फुटपाथों पर बने अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने के लिए दिए गए कड़े दिशा-निर्देशों के पूर्ण अनुपालन के तहत किया जा रहा है।


अदालतों ने साफ कहा है कि आस्था के नाम पर सार्वजनिक या सरकारी भूमि को हथियाना कानूनन अपराध है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने पूरे राज्य में अब तक 3000 से अधिक ऐसे अवैध धार्मिक ढांचों (जो वन भूमि, सिंचाई विभाग की भूमि और लोक निर्माण विभाग की सड़कों के किनारे अवैध रूप से उग आए थे) को ध्वस्त कर सैकड़ों एकड़ बेशकीमती जमीनों को मुक्त कराया है।


देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए सुशासन का बड़ा कदम


विकासनगर के शीशमबाड़ा में सरकारी भूमि पर बनी अवैध मजार को ध्वस्त करना यह साबित करता है कि देहरादून जिला प्रशासन तुष्टिकरण की राजनीति से कोसों दूर, पूरी तरह से 'रूल ऑफ लॉ' (Rule of Law یعنی कानून के शासन) पर काम कर रहा है। उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और इसके जनसांख्यिकीय (Demographic) और भौगोलिक स्वरूप की रक्षा करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।


अक्सर देखा गया है कि सुदूर क्षेत्रों में खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर पहले एक छोटा सा धार्मिक ढांचा खड़ा किया जाता है, फिर धीरे-धीरे उसके आसपास बस्तियां बसाकर पूरी सरकारी जमीन को हड़प लिया जाता है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा अपनाई गई यह सख्त और चरणबद्ध नीति इस प्रकार के संगठित भूमि घोटालों पर एक करारी चोट है। अगले चरणों में होने वाली कार्रवाइयों से यह साफ है कि देहरादून जनपद में अब कानून तोड़ने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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