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देहरादून, 02 जून, 2026: युवा पीढ़ी को नशे के जानलेवा दलदल से सुरक्षित निकालने और उत्तराखंड को साल 2025-2026 के संकल्पों के अनुरूप 'ड्रग्स फ्री देवभूमि' (Drugs-Free Devbhoomi) बनाने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और चौतरफा रणनीति तैयार कर ली है। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग (सूवि देहरादून) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद के भीतर मादक पदार्थों (Narcotics) के अवैध कारोबार, सिंथेटिक ड्रग्स (चिट्टा), अफीम, चरस और प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए सभी सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों को एक मंच पर आने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अब केवल छिटपुट गिरफ्तारियों से काम नहीं चलेगा; बल्कि नशे की डिमांड (मांग) और सप्लाई (आपूर्ति) चेन को पूरी तरह से तोड़ना होगा। इस अभियान को केवल पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित न रखकर एक व्यापक 'जन-आंदोलन' (Mass Movement) का रूप दिया जाएगा।
प्रशासनिक रणनीति: यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार जुड़ेंगे समिति से, सिलेबस में शामिल होगा नशा उन्मूलन
उच्च शिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों के आसपास पैर पसार रहे ड्रग्स माफियाओं के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए जिलाधिकारी ने दो बेहद लीक से हटकर और दूरदर्शी फैसले लिए हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलावों के निर्देश दिए:
- विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों की सीधी भागीदारी: जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जिले में संचालित होने वाले सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों (Universities) के रजिस्ट्रारों को सीधे तौर पर 'नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति' का सदस्य बनाया जाए। इससे शिक्षण संस्थानों के भीतर की गतिविधियों और ड्रग्स नेटवर्क पर जिला प्रशासन सीधे नजर रख सकेगा।
- शैक्षणिक पाठ्यक्रमों (Curriculum) में समावेशन: आने वाली पीढ़ी को प्राथमिक स्तर पर ही जागरूक करने के लिए जिलाधिकारी ने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों और सामाजिक व शारीरिक नुकसान की केस-स्टडी को स्कूलों और कॉलेजों के मुख्य पाठ्यक्रम (Syllabus) में शामिल करने के ठोस प्रयास किए जाएं। जब बच्चे शुरुआती दिनों से ही इसके वैज्ञानिक और सामाजिक दुष्प्रभावों को समझेंगे, तो वे इस बुराई से दूर रहेंगे।
देहरादून जिला नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन (NCORD) का नया एक्शन प्लान
नशे के खिलाफ इस महाभियान को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन द्वारा जारी किए गए कड़े तकनीकी और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों को इस विस्तृत तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| कार्यक्षेत्र / नोडल विंग (Focus Area) | जिला प्रशासन द्वारा जारी कड़े निर्देश (Key Directives) | अपेक्षित परिणाम एवं सुरक्षात्मक प्रभाव (Expected Outcomes) |
| तकनीकी निगरानी (Technology) | संवेदनशील क्षेत्रों और ड्रग्स पैडलरों की जीआईएस (GIS) टैगिंग। | नशा तस्करी के हॉटस्पॉट्स की सेटेलाइट व डिजिटल मैपिंग से सटीक निगरानी। |
| शिक्षण संस्थान (Colleges/Schools) | सरकारी व निजी कॉलेजों में वृहद स्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग अभियान। | छात्र-छात्राओं के बीच नशे की शुरुआती लत को पकड़ना और उन्हें काउंसलिंग देना। |
| दवा उद्योग (Pharma & Medical) | दवा फैक्ट्रियों का नियमित औचक निरीक्षण और मेडिकल स्टोरों पर CCTV अनिवार्य। | प्रतिबंधित नशीली दवाओं (Schedule-H/X) की अवैध बिक्री पर पूर्ण रोक। |
| पब्लिक रिस्पॉन्स (Helpline) | मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 और NCORD पोर्टल का व्यापक प्रचार। | आम जनता द्वारा गुप्त और त्वरित सूचना तंत्र को सुदृढ़ बनाना। |
| संयुक्त बल (Enforcement Agencies) | ANTF, STF, पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का जॉइंट ऑपरेशन। | अंतर-राज्यीय (Inter-State) ड्रग्स सिंडिकेट और सप्लाई चेन को नेस्तनाबूद करना। |
'जीआईएस टैगिंग' और 'वृहद ड्रग्स टेस्टिंग': तकनीकी चक्रव्यूह में फंसेंगे तस्कर
इस बैठक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त अपराधियों और संवेदनशील इलाकों की जीआईएस (Geographic Information System) मैपिंग करने का है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि पुलिस और खुफिया तंत्र उन सभी इलाकों, बस्तियों, ढाबों और शिक्षण संस्थानों के आसपास के क्षेत्रों को चिन्हित करें जहां नशे की खरीद-फरोख्त की शिकायतें सबसे ज्यादा आती हैं। इन सभी हॉटस्पॉट्स और पूर्व में पकड़े गए ड्रग्स पैडलरों के ठिकानों की जीआईएस टैगिंग की जाएगी, जिससे पुलिस की विशेष एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और लक्षित (Targeted) छापेमारी कर सके।
कैंपसों में औचक ड्रग्स टेस्टिंग:
युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों (SDMs), पुलिस क्षेत्राधिकारियों (COs) और अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों (ACMOs) की एक विशेष 'जॉइंट टास्क फोर्स' गठित करने के आदेश दिए हैं। यह टास्क फोर्स जिले के सभी सरकारी और निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग सेंटरों का औचक दौरा करेगी और वहां वृहद स्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग (Mass Drugs Testing) अभियान चलाएगी। इसका उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि नशा कर रहे छात्रों की पहचान कर उन्हें रिहैबिलिटेशन (नशामुक्ति केंद्रों) और काउंसलिंग के माध्यम से मुख्यधारा में वापस लाना है।
मेडिकल स्टोरों और दवा फैक्ट्रियों पर कड़ा पहरा: सीसीटीवी लगाना हुआ अनिवार्य
देहरादून जनपद में कई बार औद्योगिक क्षेत्रों से प्रतिबंधित दवाओं की अवैध तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने औषधि नियंत्रक विभाग (Drug Control Department) और स्वास्थ्य विभाग को दवाओं की आड़ में चल रहे काले कारोबार को बंद करने की हिदायत दी।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में संचालित होने वाली सभी फार्मा फैक्ट्रियों (दवा कंपनियों) और खुदरा मेडिकल स्टोरों का नियमित और औचक निरीक्षण किया जाए। यदि कोई मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के नशीली या नींद की दवाएं बेचता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तुरंत निरस्त कर दुकान सील कर दी जाएगी। इसके साथ ही, जिले के सभी मेडिकल स्टोरों के संचालक के लिए अपनी दुकानों के भीतर और बाहर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी (CCTV) कैमरे स्थापित करने के आदेश जारी किए गए हैं, ताकि दवाओं की बिक्री की पारदर्शी रिकॉर्डिंग प्रशासन को मिल सके।
नशे के खिलाफ जंग को 'जन-आंदोलन' बनाने के 4 मुख्य स्तंभ
जिला प्रशासन द्वारा समाज के हर वर्ग को इस मुहिम से जोड़ने के लिए निम्नलिखित चार महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:
- स्कूलों में एंटी-ड्रग्स कमेटियों की सक्रियता: देहरादून के सभी शासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों में गठित 'एंटी ड्रग्स कमेटियों' (Anti-Drugs Committees) को तत्काल सक्रिय किया जाएगा। इन कमेटियों में शिक्षकों, अभिभावकों और सीनियर छात्रों को शामिल कर उनकी पूरी सूची और संपर्क नंबर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
- मानस हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार: केंद्र सरकार द्वारा नशीली दवाओं के अवैध कारोबार की गुप्त सूचना देने के लिए संचालित 'मानस हेल्पलाइन नंबर 1933' और एनसीओआरडी/मानस पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके लिए सभी प्रमुख चौराहों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और शिक्षण संस्थानों में बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगाए जाएंगे।
- गांव-गांव तक आशा और आंगनबाड़ी का पहरा: ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के बढ़ते चलन को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग आक्रामक रणनीति अपनाएगा। गांवों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के माध्यम से घर-घर जाकर महिलाओं और युवाओं को जागरूक किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि यदि गांव में कोई भी व्यक्ति अवैध शराब या स्मैक बेचता है, तो उसकी सूचना 1933 पर कैसे दें।
- त्वरित विधिक कार्रवाई (Swift Action): हेल्पलाइन या पोर्टल पर प्राप्त होने वाली किसी भी शिकायत पर पुलिस और आबकारी विभाग को बिना एक मिनट की देरी किए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि जनता के भीतर प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हो सके।
एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और एनसीबी का संयुक्त महा-अभियान
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि देहरादून राज्य की राजधानी होने के कारण पड़ोसी राज्यों (उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली) से आने वाले नशा तस्करों के निशाने पर रहता है। इसलिए, उन्होंने राज्य की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), स्थानीय पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और आबकारी विभाग को आपस में इंटेलिजेंस शेयरिंग (खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान) करने को कहा।
उन्होंने निर्देश दिए कि एजेंसियां पिछले 5 से 10 वर्षों के मामलों का गहन डेटा विश्लेषण (Data Analysis) करें। ड्रग्स तस्करी के बड़े सिंडिकेट्स, उनके वित्तीय लेन-देन (Financial Linkages) और उनकी कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का गहराई से अध्ययन कर एक ऐसी अचूक और दूरगामी रणनीति तैयार की जाए, जिससे ड्रग्स किंगपिन (मुख्य सरगना) को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
बैठक में मौजूद रहा जनपद का शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस नेतृत्व
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस मैराथन बैठक में जिले की पूरी प्रशासनिक मशीनरी मुस्तैद रही। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. मनोज शर्मा शामिल रहे।
इसके अलावा मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) विनोद ढौंडियाल, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी शिव प्रसाद, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित औषधि महानियंत्रक और पुलिस के तमाम क्षेत्राधिकारी (COs) और खुफिया विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
युवाओं के भविष्य और सुशासन के प्रति प्रशासन की दृढ़ता
देहरादून में जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की यह बैठक महज एक औपचारिक प्रशासनिक समीक्षा नहीं है, बल्कि यह नशे के सौदागरों के खिलाफ 'पूर्ण युद्ध' (Total War) का आधिकारिक शंखनाद है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिस प्रकार से आधुनिक तकनीकों (जैसे जीआईएस मैपिंग और सीसीटीवी अनिवार्य करना) को इस लड़ाई में शामिल किया है, वह बेहद सराहनीय और समसामयिक है।
अक्सर देखा जाता है कि पुलिस केवल छोटे पैडलरों को पकड़कर इतिश्री कर लेती है, लेकिन 'सप्लाई चेन तोड़ने' और 'दवा फैक्ट्रियों की जांच' जैसे कड़े कदमों से इस काले कारोबार की रीढ़ की हड्डी पर चोट लगेगी। शिक्षण संस्थानों में बड़े पैमाने पर ड्रग्स टेस्टिंग कराने से जहां एक ओर युवाओं में भय पैदा होगा, वहीं लत के शिकार हो चुके बच्चों को समय रहते इलाज मिल सकेगा। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से इस अभियान को गांवों तक ले जाना यह दर्शाता है कि प्रशासन सुशासन के लाभों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और देवभूमि की पवित्रता व युवा चेतना को अक्षुण्ण रखने के लिए पूरी तरह से कृतसंकल्पित है।
