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देहरादून: उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए चलाई जा रही परियोजनाओं में कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर एक नया प्रशासनिक व राजनैतिक घटनाक्रम सामने आया है। देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के पदाधिकारियों ने चमोली जिले के थराली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक महत्वपूर्ण मोटर मार्ग के निर्माण कार्य में गंभीर विसंगतियों का दावा किया है।
पार्टी का आरोप है कि ब्रिडकुल (BRIDCUL) के अंतर्गत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत स्वीकृत 'कंडवाल गांव से कफूली मल्ला (चरण-1 एवं चरण-2) मोटर मार्ग' के निर्माण के लिए आवंटित लगभग ₹16 करोड़ के बजट के सापेक्ष धरातल पर आनुपातिक रूप से कार्य पूरा नहीं किया गया है। इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए संगठन ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव पंकज कुमार पांडे को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग उठाई है।
"कागजों और धरातल के कार्यों में भारी विसंगति": शिव प्रसाद सेमवाल
प्रेस वार्ता के मुख्य वक्ता और राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल ने विभागीय कार्यप्रणाली और भुगतान प्रक्रियाओं पर नीतिगत सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन एजेंसियों की कथित शिथिलता के कारण जनहित प्रभावित हो रहा है।
संगठन के मुख्य आरोप:
"कंडवाल-कफूली मल्ला मोटर मार्ग के लिए आवंटित ₹16 करोड़ की भारी-भरकम राशि के सापेक्ष ठेकेदार को लगभग शत-प्रतिशत भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है। परंतु, स्थानीय स्तर से प्राप्त साक्ष्यों और भौतिक स्थिति के अनुसार, पूरे मार्ग में से केवल 2-3 किलोमीटर के हिस्से पर ही डामरीकरण (PC कार्य) दिखाई देता है, वह भी अत्यंत सामान्य स्तर का है। संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE), सहायक अभियंता (AE) और अधिशासी अभियंता (EE) द्वारा कंप्लीशन रिपोर्ट और धरातल की वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर को छिपाया गया है। हमारी मांग है कि साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए विभागीय फाइलों को तत्काल सील किया जाए।"
प्रस्तावित सड़क परियोजना एवं विवादित विसंगतियों का विवरण
इस सड़क निर्माण परियोजना की तकनीकी रूपरेखा और शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए विन्दुओं को इस तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| परियोजना एवं विधिक घटक (Parameters) | विभागीय निविदा एवं आवंटन विवरण (Project Details) | शिकायतकर्ता संगठन द्वारा उठाए गए मुख्य विसंगति बिंदु |
| परियोजना का नाम | कंडवाल गाँव से कफूली मल्ला (चरण-1 व चरण-2) मोटर मार्ग। | थराली विधानसभा (चमोली) के अंतर्गत आने वाली ग्रामीण संपर्क लाइन। |
| संबंधित निर्माण एजेंसी | ब्रिडकुल (BRIDCUL) / पीएमजीएसवाई विंग। | लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन। |
| स्वीकृत कुल बजटीय परिव्यय | लगभग ₹16 करोड़ (Sixteen Crore Rupees) | कथित तौर पर कार्य के अनुपात में अधिकांश वित्तीय भुगतान संपन्न। |
| धरातलीय प्रगति का दावा | केवल 2 से 3 किलोमीटर मार्ग पर प्रारंभिक पीसी (PC) कार्य। | शेष मार्ग पर निर्माण कार्य कथित तौर पर पिछले एक वर्ष से पूरी तरह ठप। |
| प्रशासनिक मांग पत्र | सचिव (PWD) पंकज कुमार पांडे को प्रेषित। | विशेष भौतिक-वित्तीय ऑडिट (Physical-Financial Audit) कराने का अनुरोध। |
क्षेत्रीय प्रभाव: विकास कार्यों के रुकने से ग्रामीण जनता को हो रही असुविधा
पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना इष्टवाल ने इस परियोजना के लटकने से स्थानीय समाज और ग्रामीणों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में सड़कें केवल परिवहन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे आपातकालीन चिकित्सा, शिक्षा और दैनिक आजीविका की जीवन रेखा (Lifeline) हैं।
उन्होंने कहा, "संबंधित निर्माण एजेंसी और ठेकेदार द्वारा पिछले लगभग एक वर्ष से साइट पर निर्माण संबंधी गतिविधियां बंद रखी गई हैं, जिससे कफूली मल्ला और कंडवाल क्षेत्र के दर्जनों गांवों की आबादी प्रभावित हो रही है। जब स्थानीय ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर संबंधित तकनीकी अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें उचित प्रतिक्रिया नहीं मिलती। यह उदासीनता जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
'विशेष भौतिक-वित्तीय ऑडिट' की मांग: दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी
प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी के पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश ईष्टवाल ने पूरे मामले के न्यायसंगत और पारदर्शी समाधान पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन किसी भी पूर्वाग्रह के बिना केवल यह चाहता है कि सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित हो।
उन्होंने सचिव (पीडब्ल्यूडी) को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा:
"हमने प्रशासन से केवल यह मांग की है कि इस पूरे प्रकरण में एक विशेष भौतिक और वित्तीय ऑडिट (Special Physical-Financial Audit) कराया जाए। इसके अंतर्गत, ठेकेदार को अब तक जारी किए गए कुल भुगतानों और मापन पुस्तिका (Measurement Book - MB) में दर्ज आंकड़ों का मिलान, केंद्रीय तकनीकी टीम द्वारा साइट पर जाकर किए गए वास्तविक कार्य से आमने-सामने कराया जाए। यदि तकनीकी मानकों के अनुरूप कार्य पाया जाता है तो स्थिति स्पष्ट होगी, अन्यथा दोषियों पर विधिक कार्रवाई होनी चाहिए।"
शासन को प्रेषित पत्र में शामिल 4 प्रमुख मांगें
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी द्वारा पीडब्ल्यूडी सचिव पंकज कुमार पांडे को सौंपे गए मांग पत्र के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सरकारी रिकॉर्ड को तुरंत सुरक्षित करना: संबंधित कंडवाल-कफूली मल्ला मोटर मार्ग से जुड़ी सभी मूल सरकारी फाइलों, एस्टीमेट कॉपियों, मापन पुस्तिकाओं (MB) और अब तक पास किए गए बिलों को तुरंत सक्षम अधिकारी के नियंत्रण में लेकर सील (Lock & Seal) किया जाए, ताकि रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ न हो।
- निष्पक्ष जांच हेतु निलंबन की कार्रवाई: प्रथम दृष्ट्या (Prima Facie) पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और झूठी रिपोर्टिंग के संदेह में संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE) संदीप शर्मा, सहायक अभियंता (AE) नरेश कुमार और अधिशासी अभियंता (EE) अजय कुमार को जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
- समयबद्ध निर्माण कार्य की बहाली: राजनीतिक या प्रशासनिक जांच के समानांतर, सड़क के निर्माण कार्य को तय मानकों और उच्च गुणवत्ता के साथ धरातल पर दोबारा तत्काल शुरू कराया जाए ताकि ग्रामीणों की आवाजाही सुगम हो सके।
- दोषी फर्म को ब्लैकलिस्ट करना: यदि वित्तीय विसंगतियां और गबन प्रमाणित होता है, तो संबंधित निर्माण फर्म/ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करते हुए उसे भविष्य के लिए सरकारी निविदाओं से ब्लैकलिस्ट किया जाए।
कार्रवाई न होने पर उग्र जन-आंदोलन की चेतावनी
पार्टी के जिला सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भगवती प्रसाद गोस्वामी ने प्रेस वार्ता के अंतिम चरण में सरकार और स्थानीय प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि जनहित के इस विषय को ठंडे बस्ते में नहीं डालने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि शासन स्तर से इस पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए एक निश्चित समयसीमा के भीतर निष्पक्ष जांच कमेटी गठित नहीं की गई और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी चमोली से लेकर देहरादून तक सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगी और एक व्यापक जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल, प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल, पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश ईष्टवाल के साथ-साथ महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष शशि रावत, सुरेंद्र सिंह चौहान एवं गिरीश भद्री सहित कई वरिष्ठ कार्यकर्ता और क्षेत्रीय प्रतिनिधि उपस्थित थे।
एवं निष्पक्ष विधिक दृष्टिकोण
थराली विधानसभा के कंडवाल-कफूली मल्ला मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर उपजा यह विवाद उत्तराखंड में ढांचागत विकास की परियोजनाओं में 'जवाबदेही' (Accountability) के महत्व को रेखांकित करता है। यद्यपि राजनीतिक दल द्वारा विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, परंतु प्रशासनिक दृष्टिकोण से इस मामले का वास्तविक सच लोक निर्माण विभाग के सचिव द्वारा कराए जाने वाले आगामी 'भौतिक एवं वित्तीय ऑडिट' के बाद ही आधिकारिक रूप से सामने आ सकेगा।
सुशासन का यह नियम है कि किसी भी शिकायत पर निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि यदि कहीं तकनीकी या प्रक्रियात्मक खामी हुई हो तो उसे सुधारा जा सके और यदि कोई अधिकारी या संवेदक दोषी पाया जाए तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा सके। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर इस संवेदनशील पर्वतीय सड़क मार्ग की जांच को लेकर आने वाले दिनों में क्या प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।
