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देहरादून, 25 जून, 2026: उत्तराखण्ड में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं पर विधिक रोक लगाने, लिंगानुपात में सुधार करने और बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के विधिक विज़न के साथ संचालित 'नंदा गौरा योजना' के तहत आज गुरुवार को एक और बड़ा वित्तीय मील का पत्थर हासिल किया गया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास कैबिनेट मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने यमुना कॉलोनी स्थित अपने कैंप कार्यालय में आयोजित एक त्वरित डिजिटल कार्यक्रम के माध्यम से हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद की 4098 पात्र बालिकाओं के बैंक खातों में 19 करोड़ 23 लाख रुपये की बकाया धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से विधिक रूप से हस्तांतरित (Transfer) कर दी है।
विभागीय समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि तकनीकी और प्रलेखीय विसंगतियों के कारण ये बालिकाएं मुख्य बजट वितरण से छूट गई थीं। मंत्री रेखा आर्या ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को पूर्व में ही सख्त निर्देश दिए गए थे कि जनपदीय समितियों से अनुमोदन की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए, जिसके परिणामस्वरूप आज इन हजारों बेटियों के खातों में सीधे विधिक सहायता राशि भेजकर उन्हें सशक्त किया गया है।
सांख्यिकीय वर्गीकरण: जन्म के समय 417 और 12वीं पास कर कॉलेज जाने वाली 3681 बेटियों को मिला संबल
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने आज जारी किए गए आंकड़ों का गहन विधिक और सांख्यिकीय वर्गीकरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि गुरुवार को लाभान्वित हुई 4098 बालिकाओं को दो मुख्य श्रेणियों में विधिक सहायता प्रदान की गई है:
- श्रेणी १ (नवजात बालिकाएं): इस विधिक ग्रिड के तहत जन्म के समय सहायता पाने वाली 417 नवजात बालिकाओं के माता-पिताओं के खातों में विधिक प्रोत्साहन राशि भेजी गई, ताकि बेटियों के पोषण और प्रारंभिक स्वास्थ्य की देखभाल सुचारू रूप से हो सके।
- श्रेणी २ (उच्च शिक्षा हेतु अग्रसर बेटियां): इस ग्रिड में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर स्नातक (Graduation) या उच्च व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाली 3681 मेधावी युवा युवतियों को एकमुश्त विधिक वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। यह राशि सीधे इन बेटियों की उच्च शिक्षा की फीस और किताबों के खर्च को वहन करने में काम आएगी।
नंदा गौरा योजना महा-वितरण 2026: जनपद-वार एवं ऐतिहासिक संचित सांख्यिकीय मैट्रिक्स
इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य आवंटन, गुरुवार को हुए संपादन और वर्ष 2017 से अब तक के संचित (Cumulative) बजटीय डेटा को इस प्रशासनिक तालिका में संकलित किया गया है:
| नंदा गौरा योजना: बजटीय एवं लाभार्थी पैरामीटर्स | चालू चक्र प्रोग्रेस (26 फरवरी व 25 जून, 2026) | ऐतिहासिक संचित डेटा (वर्ष 2017-18 से 2025-26) | दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक एवं विधिक प्रभाव (Impact) |
| गुरुवार को लाभान्वित कुल बालिकाएं | 4,098 बालिकाएं (हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद)। | 4,11,035 कुल बालिकाएं (अब तक संचित)। | राज्य की चार लाख से अधिक बेटियों को मिला सीधा विधिक व वित्तीय संरक्षण। |
| गुरुवार को जारी कुल विधिक डीबीटी | ₹19.23 करोड़ (करीब उन्नीस करोड़ तेईस लाख रुपये)। | ₹1,314 करोड़ (करीब तेरह सौ चौदह करोड़ रुपये)। | उत्तराखण्ड के इतिहास में महिला कल्याण पर किया गया यह सबसे बड़ा विधिक निवेश है। |
| 26 फरवरी 2026 को मुख्य वितरण | 33,251 पात्र बालिकाएं (संपूर्ण प्रदेश)। | वार्षिक बजटीय योजनाओं के तहत समयबद्ध निस्तारण। | मुख्यधारा के बजट में ही 33 हजार से अधिक बेटियों को विधिक रूप से आच्छादित करना। |
| श्रेणीवार विभाजन (25 जून 2026) | 417 बालिकाएं (जन्म के समय) + 3,681 (12वीं पास)। | समाज के दोनों छोरों (शिशु सुरक्षा व युवा शिक्षा) पर सीधा प्रहार। | बाल विवाह पर विधिक रोक तथा ड्रॉप-आउट रेट (Drop-out Rate) में भारी कमी। |
| विलंब का विधिक व तकनीकी कारण | जनपद स्तरीय समिति के अनुमोदन एवं प्रलेखीय औपचारिकताओं में देरी। | विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक शिथिलता का समय पर विधिक उपचार। | नौकरशाही को जवाबदेह बनाकर फाइलों का 'नो-पेंडेंसी' निस्तारण सुनिश्चित करना। |
ऐतिहासिक रिपोर्ट कार्ड: 9 वर्षों में ₹1314 करोड़ का विधिक डीबीटी; सुशासन का प्रमाण
प्रेस वार्ता के दौरान कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने नंदा गौरा योजना के ऐतिहासिक और संचित (Cumulative) आंकड़ों को साझा करते हुए इसे सरकार की सबसे सफल और पारदर्शी योजना बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2025-26 तक प्रदेश की कुल 4,11,035 बालिकाओं को इस योजना के दायरे में लाया जा चुका है।
लैंगिक समानता पर कैबिनेट मंत्री का कड़ा नीतिगत वक्तव्य:
"हमारी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में करीब 1314 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से बिना किसी बिचौलिए या विधिक विसंगति के बेटियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की है। पहले की प्रणालियों में चेक या नकद वितरण के कारण भ्रष्टाचार की गुंजाइश रहती थी, लेकिन अब पूर्ण डिजिटल सुशासन (Digital Governance) के कारण ₹1314 करोड़ का एक-एक पैसा सीधे हमारी बेटियों के अधिकारों की रक्षा कर रहा है। हमारा संकल्प है कि बजट या प्रशासनिक देरी के कारण उत्तराखण्ड की कोई भी पात्र बेटी इस विधिक अधिकार से वंचित नहीं रहेगी।"
नंदा गौरा योजना की विधिक पारदर्शिता और गति बढ़ाने हेतु 4 मुख्य रणनीतिक स्तंभ
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास निदेशालय द्वारा भविष्य में इस प्रकार की प्रलेखीय देरी को रोकने के लिए निम्नलिखित चार कड़े विधिक नियम और रणनीतिक सुधार लागू किए जा रहे हैं:
- केंद्रीकृत डिजिटल विधिक ट्रैकिंग (Centralized Digital Portal): बालिकाओं के जन्म प्रमाण पत्र और इंटरमीडिएट की मार्कशीट को सीधे 'अपनो स्कूल' और 'स्वास्थ्य रजिस्ट्री पोर्टल' से लिंक किया जा रहा है, ताकि जनपदीय स्तर पर दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन की विधिक पेंडेंसी समाप्त हो सके।
- जनपद स्तरीय समितियों हेतु विधिक समय सीमा (Timeline): हरिद्वार और उत्तरकाशी जैसी प्रलेखीय देरी को भविष्य में रोकने के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता वाली विधिक स्क्रीनिंग कमेटियों के लिए आवेदन प्राप्ति के अधिकतम 30 दिनों के भीतर फाइल को अनुमोदित करना विधिक रूप से अनिवार्य किया गया है।
- बैंक खाता और आधार विधिक सीडिंग (Aadhar/Bank Seeding): डीबीटी विफलताओं (DBT Failures) को शून्य पर लाने के लिए महिला कल्याण विभाग सीधे अग्रणी बैंकों के साथ मिलकर 'जीरो-फेल्योर' पेमेंट गेटवे विकसित कर रहा है।
- मलिन बस्तियों और दूरस्थ गांवों में विधिक शिविर: जो ग्रामीण परिवार तकनीकी रूप से असमर्थ हैं, उनके लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से गांव-गांव में विशेष विधिक हेल्पडेस्क स्थापित कर मौके पर ही आवेदन फॉर्म पूरे कराए जा रहे हैं।
सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की त्रिवेणी—धामी सरकार की सफल विधिक पहल
25 जून 2026 को देहरादून से नंदा गौरा योजना के बकाया धन का यह महा-हस्तांतरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देवभूमि की बेटियों के प्रति राज्य सरकार की विधिक संवेदनशीलता का उत्कृष्ट प्रमाण है। हरिद्वार और उत्तरकाशी की 4098 बालिकाओं को ₹19.23 करोड़ का विधिक अधिकार सौंपना यह सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के नेतृत्व में राज्य का महिला कल्याण तंत्र बेहद सजगता से काम कर रहा है।
9 वर्षों के भीतर 4.11 लाख से अधिक बालिकाओं को ₹1314 करोड़ का प्रत्यक्ष लाभ देना यह दर्शाता है कि उत्तराखण्ड में लैंगिक बजटिंग (Gender Budgeting) को कितनी गंभीरता से धरातल पर उतारा गया है। शिक्षा और जन्म के समय मिलने वाली यह वित्तीय सहायता न केवल बालिकाओं के सामाजिक स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर राज्य के आर्थिक विकास में भी सहभागी बनाएगी। इस योजना की विधिक सफलता का सबसे बड़ा पहलू इसका पूर्ण डिजिटल होना है, जो पारदर्शी सुशासन (Transparent Governance) की दिशा में देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय विधिक मॉडल है।