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रुड़की/देहरादून। माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड के "ड्रग्स फ्री देवभूमि" अभियान के तहत पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ के कड़े दिशा-निर्देशों के क्रम में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) उत्तराखंड को प्रतिबंधित दवाओं की अंतरराज्यीय तस्करी करने वाले एक बड़े रैकेट के भंडाफोड़ में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
एसटीएफ की टीम ने विगत 11 मई 2026 को जनपद हरिद्वार के थाना मंगलौर क्षेत्र से बरामद की गई 18,000 प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल (Tramadol Capsules) के मामले में गहन वैज्ञानिक व तकनीकी जांच को आगे बढ़ाते हुए गिरोह के एक और सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया अभियुक्त उत्तराखंड क्षेत्र में मुख्य तस्कर के लिए रिसीवर और डिस्ट्रीब्यूटर (वितरक) के रूप में काम करता था, जिसने अब तक करीब 77 पेटियों (लगभग 6,930 डिब्बे) की अवैध सप्लाई को अंजाम दिया है।
मंगलौर कांड की कड़ियों को जोड़कर रुड़की से हुई गिरफ्तारी
इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ उत्तराखंड ने बताया कि 11 मई 2026 को एसटीएफ/एएनटीएफ और थाना मंगलौर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में 18,000 प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल की खेप पकड़ी थी। इस संबंध में थाना मंगलौर पर मुकदमा अपराध संख्या (मु0अ0सं0) 257/2026, धारा 8/22/29/60 एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मुकदमे की विवेचना स्थानीय पुलिस से हटाकर स्पेशल टास्क फोर्स देहरादून को सौंपी गई थी।
एसटीएफ की विवेचना टीम ने पूर्व में गिरफ्तार हो चुके मुख्य अभियुक्त सचिन मनिहाल के बयानों, उसके बैंक खातों के वित्तीय विश्लेषण (Financial Analysis) और डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर कड़ियां जोड़ीं। इस तकनीकी जांच में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी अंकित कुमार प्रजापति की इस पूरे नेटवर्क में बेहद संवेदनशील और बड़ी भूमिका प्रकाश में आई, जिसके बाद टीम ने जाल बिछाकर उसे रुड़की (हरिद्वार) से गिरफ्तार कर लिया।
जनवरी 2026 से सक्रिय था अभियुक्त; 77 पेटियों की सप्लाई स्वीकारी
विवेचनात्मक पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आमने-सामने मिलान के दौरान अभियुक्त अंकित कुमार प्रजापति ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए पुलिस को बताया कि वह जनवरी 2026 से ही सह-अभियुक्त सचिन मनिहाल के सीधे संपर्क में था।
- सप्लाई का नेटवर्क: वह सचिन मनिहाल से भारी मात्रा में SPASMORE (Tramadol) कैप्सूल की खेप प्राप्त करता था और उसे हरिद्वार, रुड़की तथा आसपास के कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध मेडिकल स्टोरों और नशा करने वाले स्थानीय पैडलर्स को ऊंचे दामों पर बेचता था।
- वित्तीय लेन-देन: प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री से जो भी मोटी धनराशि प्राप्त होती थी, उसमें से अंकित अपना मोटा कमीशन काट लेता था। इसके बाद बची हुई बड़ी रकम वह सचिन मनिहाल को सीधे नकद (Cash) के रूप में या अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से ऑनलाइन ट्रांसफर करता था।
- 77 पेटियों का हिसाब: जांच में प्रमाणित हुआ है कि जनवरी 2026 से लेकर अब तक विभिन्न खेपों के माध्यम से अभियुक्त को कुल 77 पेटियां (करीब 6,930 डिब्बे) ट्रामाडोल कैप्सूल की प्राप्त हुई थीं, जिन्हें वह उत्तराखंड के बाजार में खपा चुका था। विशेष रूप से 27 अप्रैल 2026 को भेजी गई खेप के संबंध में अभियुक्त के बयान और बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड पूरी तरह मेल खाए हैं।
बचने के लिए डिलीट किए थे व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड
शातिर अभियुक्त अंकित कुमार प्रजापति को इस बात का भान हो चुका था कि 11 मई को मंगलौर में मुख्य खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस उसके नेटवर्क तक पहुंच सकती है। कानून के शिकंजे से बचने और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने के उद्देश्य से उसने सचिन मनिहाल के साथ की गई सभी महत्वपूर्ण व्हाट्सएप चैट (WhatsApp Chats), वॉयस मैसेज और कॉल लॉग्स को अपने फोन से जानबूझकर पूरी तरह डिलीट कर दिया था।
हालांकि, एसटीएफ की साइबर फॉरेंसिक विंग ने तकनीकी विश्लेषण और अन्य सह-अभियुक्तों के डिजिटल उपकरणों के मिलान से इन डिलीट किए गए साक्ष्यों की पुष्टि कर दी है। गिरफ्तारी के समय अभियुक्त के कब्जे से एक जिओ (JIO) कीपैड मोबाइल फोन और एक वीवो (VIVO V50e) स्मार्टफोन बरामद किया गया है, जिन्हें नियमानुसार विधिक सीलिंग की प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है।
अभियुक्त का आपराधिक इतिहास और विभिन्न राज्यों में दर्ज मामले
एसटीएफ की छानबीन में यह भी स्पष्ट हुआ है कि पकड़ा गया अभियुक्त अंकित कुमार प्रजापति कोई नौसिखिया अपराधी नहीं है, बल्कि वह एक पेशेवर अंतरराज्यीय ड्रग सप्लायर है। उसके विरुद्ध पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश (UP) के विभिन्न थानों में पहले से ही नशा तस्करी और एनडीपीएस एक्ट के तहत 4 गंभीर आपराधिक मामले पंजीकृत हैं।
ट्रामाडोल तस्करी मामले एवं बरामदगी
| क्र.सं. | विवेचनात्मक एवं तकनीकी मानक (Case & Technical Metrics) | आधिकारिक दर्ज विवरण एवं आंकड़े (Official Enforcement Details) |
|---|---|---|
| 1. | मुख्य विवेचनात्मक एजेंसी | स्पेशल टास्क फोर्स (STF) देहरादून, उत्तराखंड |
| 2. | मूल मुकदमा संदर्भ | मु0अ0सं0 257/2026, धारा 8/22/29/60 NDPS Act, थाना मंगलौर (हरिद्वार) |
| 3. | गिरफ्तार अभियुक्त का नाम | अंकित कुमार प्रजापति पुत्र श्री राजेन्द्र कुमार प्रजापति |
| 4. | अभियुक्त का स्थायी पता | नियाजूपुरा माजरा, शहाबुद्दीनपुर, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) |
| 5. | अभियुक्त का हाल/स्थानीय पता | संतुष्टि विहार, प्रदीप बिहार कॉलोनी, रुड़की, जनपद हरिद्वार |
| 6. | कुल पूर्व बरामदगी (11 मई) | 18,000 प्रतिबंधित ट्रामाडोल (Tramadol) कैप्सूल |
| 7. | खुलासा की गई कुल अवैध सप्लाई | लगभग 77 पेटियां (करीब 6,930 डिब्बे) SPASMORE कैप्सूल (जनवरी 2026 से) |
| 8. | अभियुक्त का कुल आपराधिक इतिहास | पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कुल 04 अभियोग पंजीकृत |
| 9. | बरामद डिजिटल उपकरण | 01 JIO कीपैड मोबाइल फोन, 01 VIVO V50e स्मार्टफोन |
नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी टीमें
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखंड ने बताया कि अभियुक्त अंकित कुमार प्रजापति के बैंक खातों, उसके वित्तीय लेन-देन के माध्यमों और डिलीट किए गए डिजिटल डेटा को रिकवर कर पूरे सप्लाई नेटवर्क की विस्तृत स्क्रूटनी की जा रही है। इस गिरोह के फॉरवर्ड लिंकेज (उत्तराखंड के वे स्थानीय मेडिकल स्टोर और पैडलर जो इससे माल खरीदते थे) और बैकवर्ड लिंकेज की कड़ियों को पूरी तरह से तोड़ा जाएगा। इस अवैध कारोबार से अर्जित की गई अवैध संपत्ति और आर्थिक लाभ के स्रोतों की भी जांच की जा रही है, तथा प्रकरण में संलिप्त अन्य सभी सफेदपोश या भूमिगत अपराधियों के विरुद्ध भी जल्द ही कड़ी वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली एसटीएफ पुलिस टीम
लगातार तकनीकी इनपुट विकसित कर मुजफ्फरनगर के शातिर सप्लायर को रुड़की में दबोचने वाली एसटीएफ की कुशल टीम में निम्नलिखित जांबाज शामिल रहे:
- टीम प्रभारी / विवेचक: निरीक्षक यादवेन्द्र सिंह बाजवा
- उपनिरीक्षक (SI): उ0नि0 कमाल हसन
- उपनिरीक्षक (SI): उ0नि0 दीपक मैठाणी
- मुख्य आरक्षी (Head Constable): हेo काo मनमोहन, हेo काo कैलाश नयाल
- आरक्षी (Constable): कांस्टेबल रवि पंत, कांस्टेबल दीपक नेगी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की आमजन से अपील एवं हेल्पलाइन नंबर
एसटीएफ उत्तराखंड ने इस बड़ी कार्रवाई के साथ ही आम जनमानस, विशेषकर अभिभावकों और युवाओं से अपील की है कि वे नशे के इस जानलेवा जाल से पूरी तरह दूर रहें। यदि आपके आसपास कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री, स्मैक, चरस या अन्य किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त पाया जाता है, तो उसकी सूचना तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या नीचे दिए गए एसटीएफ के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों पर दें। सूचना देने वाले नागरिक की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।
- एसटीएफ आधिकारिक लैंडलाइन हेल्पलाइन: 0135-2656202
- एसटीएफ मोबाइल हेल्पलाइन: 9412029536
- मानस (MANAS) राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 1933
