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देहरादून/रुद्रपुर, 13 जून, 2026: उत्तराखण्ड राज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और संगठित अपराधों को जड़ से उखाड़ फेंकने के अभियान में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) उत्तराखण्ड को एक और बड़ी और युगांतकारी सफलता हाथ लगी है। माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के "अपराध मुक्त उत्तराखण्ड" के कड़े विजन तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ के विधिक व रणनीतिक निर्देशन में काम कर रही एसटीएफ ने बाहरी राज्यों से कूटरचित (Forged) दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखण्ड में ट्रांसफर कराए जा रहे फर्जी शस्त्र लाइसेंसों और अवैध हथियारों के एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट (Interstate Syndicate) का पर्दाफाश किया है।
एसटीएफ की एक विशेष विंग ने कल देर रात्रि ऊधमसिंहनगर जनपद के सितारगंज-रुद्रपुर क्षेत्र में ताबड़तोड़ दबिश देकर इस नेटवर्क से जुड़े दो और मुख्य अभियुक्तों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 02 अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 31 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। इस सनसनीखेज मामले में एसटीएफ अब तक कुल 09 शातिर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जिससे यह साफ हो गया है कि राज्य में हथियारों का यह अवैध खेल बेहद गहरे पैर पसार चुका था।
पूरा मामला: बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होने वाले लाइसेंसों की जांच में खुला 'पांडोरा बॉक्स'
एसटीएफ के वरिष्ठ विधिक सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 के प्रारंभ से ही एसटीएफ की खुफिया इकाइयों को यह इनपुट मिल रहे थे कि कुछ शातिर दलाल और अपराधी तत्व उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अन्य बाहरी राज्यों से बने फर्जी शस्त्र लाइसेंसों को कूटचरित और फर्जी पतों (Fake Addresses) के सहारे उत्तराखण्ड के जनपदों में ट्रांसफर करा रहे हैं।
- एसटीएफ की गहन पड़ताल: एसएसपी एसटीएफ के निर्देश पर पिछले एक महीने से एक विशेष तकनीकी और फील्ड इन्वेस्टिगेशन टीम इस रैकेट के दस्तावेजी सबूत जुटा रही थी।
- काशीपुर में एफआईआर दर्ज (BNS 2023): जब साक्ष्य अकाट्य पाए गए, तब दिनांक 04 जून, 2026 को जनपद ऊधमसिंहनगर के थाना कोतवाली काशीपुर में इस रैकेट के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या- 213/2026 पंजीकृत कराया गया।
- कड़ी विधिक धाराएं: यह मुकदमा नए कानून के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 318(4) (जालसाजी/Cheating), 338 (फर्जी दस्तावेज बनाना), 336(3) (दस्तावेजों की कूटरचना), 340, 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र), 3(5) (समान आशय) और 111 (संगठित अपराध/Organized Crime) के तहत पंजीकृत किया गया है।
एसटीएफ हथियार रैकेट केस: विधिक धाराएं, गिरफ्तार आरोपी और जब्ती मैट्रिक्स
इस बड़े संगठित आपराधिक नेटवर्क, विधिक धाराओं, पकड़े गए अभियुक्तों और एसटीएफ की अब तक की कुल दंडात्मक बरामदगी का सांख्यिकीय और कानूनी विवरण इस तालिका में संकलित है:
| विधिक एवं खोजी मानक (Investigation Metrices) | एसटीएफ प्रलेखन एवं केस प्रोफाइल (Case Profiles) | सुरक्षात्मक एवं कानूनी निहितार्थ (Implications) |
| मुख्य विधिक धारा (Special Section) | भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 111। | संगठित अपराध (Organized Crime) के तहत कड़ी सजा और गैर-जमानती वारंट। |
| पंजीकृत कुल अभियोग (FIRs) | उत्तराखण्ड के विभिन्न जनपदों में अब तक 03 एफआईआर दर्ज। | पूरे राज्य में फैले रैकेट को समेटने के लिए व्यापक कानूनी जाल। |
| गिरफ्तार नए अभियुक्त (12 जून देर रात) | 1. करनजीत सिंह (रेस्टोरेंट संचालक, उम्र 35) 2. विक्रमजीत सिंह तूर (उम्र 36)। | सितारगंज और यूपी बॉर्डर के कड़ियों को जोड़ने वाले मुख्य मोहरे। |
| ताजा बरामदगी (Latest Seizure) | 01 सेमी ऑटोमैटिक .30 बोर पिस्टल, 01 सेमी ऑटोमैटिक .32 बोर पिस्टल, 31 कारतूस। | बड़ी आपराधिक घटनाओं या गैंगवार में इस्तेमाल होने वाले घातक हथियार। |
| एसटीएफ की अब तक की कुल सफलता | 09 गिरफ्तारियां, 14 अवैध शस्त्र, 341 जिंदा कारतूस और भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज। | राज्य के इतिहास में फर्जी शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क पर यह अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है। |
मिडनाईट ऑपरेशन: सितारगंज में घेराबंदी कर दबोचे गए दो सफेदपोश आरोपी
एसएसपी एसटीएफ के कुशल और खुफिया इनपुट के आधार पर निरीक्षक अरुण कुमार और निरीक्षक एम०पी० सिंह के संयुक्त नेतृत्व में एसटीएफ की एक भारी कॉम्बैट टीम ने 12 जून की देर रात ऊधमसिंहनगर के सितारगंज और रुद्रपुर के संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी (Raids) की।
इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने करनजीत सिंह (पुत्र नाजर सिंह, मूल निवासी बहेड़ी, बरेली, यूपी; हाल निवासी व संचालक 'सरदार जी रेस्टोरेंट', सितारगंज) और उसके करीबी सहयोगी विक्रमजीत सिंह तूर (पुत्र अजयपाल सिंह, निवासी नियर मंडी, सितारगंज) को घेरकर दबोच लिया। इनके पास से जो अवैध हथियार मिले, वे इस बात के पुख्ता विधिक प्रमाण हैं कि ये लोग केवल लाइसेंस का फर्जीवाड़ा नहीं कर रहे थे, बल्कि अवैध रूप से घातक विदेशी व प्रतिबंधित बोर के हथियारों की तस्करी (Arms Trafficking) और खरीद-बिक्री में भी सीधे तौर पर लिप्त थे।
"जो भी संलिप्त होगा, उसकी जगह जेल की सलाखों के पीछे होगी"— एसएसपी एसटीएफ की दोटूक चेतावनी
इस बड़ी कामयाबी के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) एसटीएफ उत्तराखण्ड ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट विधिक बयान जारी किया है, जिसने इस रैकेट के पीछे बैठे बड़े सफेदपोशों और दलालों के खेमे में हड़कंप मचा दिया है।
एसएसपी एसटीएफ उत्तराखण्ड का आधिकारिक बयान:
"फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों का यह संगठित खेल केवल एक सामान्य जालसाजी या विधिक उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह देवभूमि उत्तराखण्ड की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक शांति के लिए एक बेहद गंभीर और खतरनाक खतरा है। हमारी जांच में यह बात सामने आई है कि कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से बैकडेट में या फर्जी पतों पर लाइसेंस बनाकर अपराधी तत्वों को हथियार बांटे जा रहे थे। एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क की अंतिम तह तक जाएगी। इस विधिक जांच में जिस किसी भी व्यक्ति, बिचौलिए, सरकारी कर्मचारी, दलाल या हथियार डीलर की संलिप्तता सामने आएगी, कानूनन उसकी जगह केवल और केवल जेल की सलाखों के पीछे होगी। किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो।"
फर्जी शस्त्र लाइसेंस सिंडिकेट के खिलाफ एसटीएफ की 4-स्तरीय विधिक रणनीति
राज्य की सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एसटीएफ और उत्तराखण्ड पुलिस प्रशासन इस मामले में निम्नलिखित चार रणनीतिक बिंदुओं पर बेहद आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है:
- संगठित अपराध धारा 111 (BNS) का कठोर प्रयोग: पुराने कानून (IPC) में संगठित अपराध के लिए इस तरह की मजबूत और विशिष्ट धाराएं नहीं थीं। नई भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 के तहत इस गिरोह को 'संगठित अपराध सिंडिकेट' घोषित कर इनकी संपत्तियों को कुर्क करने और सख्त विधिक निरुद्धीकरण (Detention) की कार्रवाई की जा रही है।
- हथियार और गोला-बारूद के स्रोतों (Sources) की ट्रेसिंग: एसटीएफ इस बात की गहनता से वैज्ञानिक जांच कर रही है कि बरामद की गई .30 और .32 बोर की सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 341 कारतूस आखिरकार किस अवैध फैक्टरी या तस्कर नेटवर्क के जरिए उत्तराखण्ड की सीमाओं के भीतर लाए गए।
- सरकारी विभागों और दफ्तरों के रिकॉर्ड्स की री-वेरिफिकेशन: बाहरी राज्यों से जितने भी शस्त्र लाइसेंस पिछले 5 वर्षों में उत्तराखण्ड के उधमसिंहनगर, हरिद्वार और देहरादून जैसे जनपदों में ट्रांसफर हुए हैं, उन सभी फाइलों को एसटीएफ ने अपने कब्जे में ले लिया है। जिला कलेक्ट्रेट के संदिग्ध बाबुओं और दलालों के गठजोड़ को तोड़ा जा रहा है।
- आम जनता से सहयोग की अपील (गोपनीयता की गारंटी): एसटीएफ ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आस-पास कोई भी व्यक्ति संदिग्ध या बिना उचित सत्यापन के अवैध या फर्जी लाइसेंस पर हथियार चमकाता हुआ दिखे, तो उसकी सूचना तुरंत एसटीएफ को दें। सूचना देने वाले का नाम और पहचान विधिक रूप से 100% गुप्त रखी जाएगी।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विस्तृत प्रोफाइल
एसटीएफ की गिरफ्त में आए दोनों आरोपियों का विवरण इस प्रकार है, जो यह दर्शाता है कि वे समाज में सामान्य कामकाज की आड़ में इस अवैध धंधे को संचालित कर रहे थे:
करनजीत सिंह: पुत्र श्री नाजर सिंह, उम्र 35 वर्ष। मूल निवासी: ग्राम भुड़िया कॉलोनी, थाना बहेड़ी, जनपद बरेली (उत्तर प्रदेश)। हालिया ठिकाना: संचालक, रेस्टोरेंट 'सरदार जी', सितारगंज, ऊधमसिंहनगर। (यह अभियुक्त यूपी और उत्तराखण्ड के बीच एक मुख्य विधिक कड़ी का काम कर रहा था)।
विक्रमजीत सिंह तूर: पुत्र श्री अजयपाल सिंह, उम्र 36 वर्ष। निवासी: नियर मंडी, सितारगंज, जनपद ऊधमसिंहनगर। (यह स्थानीय स्तर पर संदिग्धों को फर्जी पते और सुविधाएं मुहैया कराने का काम करता था)।
शानदार कार्य करने वाली जांबाज एसटीएफ टीम
इस बेहद जटिल, गोपनीय और खतरनाक मिडनाइट ऑपरेशन को अंजाम देने वाली एसटीएफ टीम में शामिल जांबाज अधिकारियों की सूची:
- निरीक्षक अरुण कुमार (ऑपरेशन कमांडर)
- निरीक्षक एम०पी० सिंह
- उपनिरीक्षक जगदीप नेगी
- उपनिरीक्षक प्रकाश भगत
- अपर उपनिरीक्षक सत्येन्द्र गंगोला
- हेड कांस्टेबल मनोज बवाड़ी
- कांस्टेबल रवि बोरा
- हेड कांस्टेबल गोविन्द बिष्ट
- कांस्टेबल गुरवंत सिंह
- हेड कांस्टेबल सुरेन्द्र कनवाल
- हेड कांस्टेबल मोहित वर्मा
- हेड कांस्टेबल चालक संजय कुमार (त्वरित परिवहन एवं बैकअप)
एसटीएफ की यह चोट अपराधियों की कमर तोड़ने वाली है
उत्तराखण्ड एसटीएफ द्वारा सितारगंज से दो और आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके पास से सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल व भारी मात्रा में कारतूसों की बरामदगी, राज्य में चल रहे एक बहुत बड़े और खतरनाक सुरक्षा लूपहोल (Security Loophole) को बंद करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। फर्जी शस्त्र लाइसेंस केवल एक कागजी हेराफेरी नहीं है; जब एक अपराधी या गैर-सत्यापित व्यक्ति के हाथ में फर्जी दस्तावेजों के दम पर सरकारी मुहर वाला हथियार आ जाता है, तो वह समाज में रंगदारी, मर्डर, और गैंगवार जैसी गंभीर वारदातों को अंजाम देता है। उधमसिंहनगर जैसे सीमावर्ती जनपद में, जिसकी सीमाएं उत्तर प्रदेश से खुली हुई हैं, इस तरह के रैकेट का चलना राज्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा टाइम-बम था।
एसएसटी एसटीएफ का यह बयान कि "किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा", यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े अधिकारियों या सफेदपोश नेताओं पर भी कानून का डंडा चल सकता है जिन्होंने इन दलालों को संरक्षण दिया। नए कानून (BNS 2023) की संगठित अपराध विरोधी धाराओं का उपयोग करके एसटीएफ ने यह साफ कर दिया है कि देवभूमि में अब अपराधियों के लिए कोई 'सेफ हेवन' (Safe Haven) नहीं बचा है। इस शानदार और जोखिम भरे ऑपरेशन के लिए निरीक्षक अरुण कुमार, निरीक्षक एम०पी० सिंह और उनकी पूरी टीम की जितनी सराहना की जाए, वह कम है।

