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हरिद्वार/देहरादून, 21 जुलाई, 2026: सनातन संस्कृति के वैश्विक द्वार और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के केंद्र मोक्षदायिनी नगरी हरिद्वार को 21वीं सदी की आधुनिक, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक विधिक कदम उठाया है। मंगलवार, 21 जुलाई, 2026 को हरिद्वार के अलकनंदा होटल परिसर में आयोजित एक भव्य प्रशासनिक समारोह में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत ₹235 करोड़ (लगभग) की चार अत्यंत महत्वपूर्ण आधारभूत अवसंरचना (Infrastructure) परियोजनाओं का विधिक भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया।
उत्तराखण्ड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास बोर्ड (UIIDB - UIID Board) द्वारा संचालित इन वृहद परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आगामी महाकुंभ-2027 की व्यवस्थाओं को अभेद्य व सुगम बनाना है। इसके साथ ही, वर्षभर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं, पर्यटकों और कांवड़ यात्रियों को विश्वस्तरीय स्थायी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे पर्यटन, व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प क्षेत्र के विधिक ग्रिड को बढ़ावा देकर उत्तराखंड की आर्थिकी (Local Economy) को एक नई और क्रेडिबल गति प्रदान की जा सके।
₹235 करोड़ की 4 फ्लैगशिप परियोजनाओं का विधिक व बजटीय विभाजन
मुख्यमंत्री द्वारा शिलान्यास की गई इन चारों परियोजनाओं को हरिद्वार के भौगोलिक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए विशेष तकनीकी विंग द्वारा डिजाइन किया गया है:
- प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना (लागत: ₹43.25 करोड़): वीआईपी और प्रशासनिक आवागमन को सुगम बनाने, भीड़ नियंत्रण को क्रेडिबल रूप देने और आपातकालीन सेवाओं के त्वरित संचालन के लिए इस विशेष कॉरिडोर का विधिक शिलान्यास किया गया।
- हर की पैड़ी एवं सुभाष घाट पुनरुद्धार (लागत: ₹66.76 करोड़): हरिद्वार के मुख्य केंद्र हर की पैड़ी और सुभाष घाट के घाटों की स्थापत्य कला के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और जल प्रवाह प्रबंधन को आधुनिक व वैदिक स्वरूप में अपग्रेड किया जाएगा।
- हर की पैड़ी उत्तर क्षेत्र आधारभूत अवसंरचना विकास (लागत: ₹66.34 करोड़): हर की पैड़ी के उत्तरी क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय, सुरक्षा लाइटिंग, स्वच्छ पेयजल ग्रिड और डिजिटल सूचना केंद्रों का विधिक निर्माण होगा।
- रोड़ी बेलवाला क्षेत्र पुनर्विकास कार्य (लागत: ₹58.84 करोड़): रोड़ी बेलवाला मैदान और उसके आस-पास के विशाल क्षेत्रों को एक विश्वस्तरीय नागरिक स्पेस, पार्क, व्यवस्थित पार्किंग और सांस्कृतिक गतिविधियों के हब के रूप में पुनर्विकसित किया जाएगा।
हरिद्वार गंगा कॉरिडोर एवं महाकुंभ-2027: सांख्यिकी, बजटीय आवंटन एवं अवसंरचना मैट्रिक्स
21 जुलाई, 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विधिक रूप से स्वीकृत की गई चारों परियोजनाओं और संबंधित विकास कार्यों का प्रामाणिक विवरण इस प्रशासनिक तालिका में संकलित है:
| गंगा कॉरिडोर विशिष्ट घटक | स्वीकृत बजटीय आवंटन (वित्तीय वर्ष 2026) | मुख्य नोडल क्रियान्वयन एजेंसी | स्थानीय आर्थिकी व सुशासन पर क्रेडिबल प्रभाव |
| प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर | ₹43.25 करोड़ (विधिक शिलान्यास) | UIIDB एवं लोक निर्माण विभाग | महाकुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन (Crowd Control) में 100% सुगमता। |
| हर की पैड़ी व सुभाष घाट | ₹66.76 करोड़ (पुनरुद्धार ग्रिड) | संस्कृति एवं सिंचाई विभाग, उत्तराखंड | ऐतिहासिक घाटों का विधिक संरक्षण व जल शुद्धता का सुदृढ़ीकरण। |
| हर की पैड़ी (उत्तर क्षेत्र) | ₹66.34 करोड़ (इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास) | जिला प्रशासन एवं मेला विंग | श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं और जीरो-दुर्घटना जोन। |
| रोड़ी बेलवाला पुनर्विकास | ₹58.84 करोड़ (आधुनिक टाउनशिप) | शहरी विकास एवं आवास विभाग | व्यावसायिक अवसंरचना का आधुनिकीकरण; स्थानीय व्यापार ग्रिड को बढ़ावा। |
| कुल संचयी वित्तीय पैकेज | ₹235 करोड़ (अनुमानित संचयी व्यय) | आर. मीनाक्षी सुंदरम (MD, UIIDB) | महाकुंभ-2027 को इतिहास का सबसे दिव्य और सुरक्षित आयोजन बनाना। |
'केवल शिलान्यास नहीं, समयबद्ध लोकार्पण हमारी कार्यसंस्कृति': मुख्यमंत्री का नीतिगत विज़न
समारोह में उपस्थित संत समाज और गणमान्य नागरिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की क्रेडिबल कार्यसंस्कृति को रेखांकित किया।
- पारदर्शिता और गुणवत्ता ऑडिट: मुख्यमंत्री ने कड़े विधिक लहजे में कहा कि राज्य सरकार केवल शिलान्यास करने की पुरानी राजनीतिक परिपाटी पर नहीं चलती, बल्कि तय समय-सीमा (Timeline) के भीतर काम को क्रेडिबल तरीके से पूरा कर जनता को समर्पित करने पर विश्वास करती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुणवत्ता के साथ 1% भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके लिए थर्ड-पार्टी विधिक ऑडिट कराया जाए।
- समग्र कॉरिडोर विकास का खाका: पीएम नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के विज़न का उल्लेख करते हुए सीएम धामी ने बताया कि सरकार केवल हरिद्वार ही नहीं, बल्कि केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर तथा विवेकानंद कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक व विधिक योजनाओं पर युद्धस्तर पर कार्य कर रही है, ताकि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार (Employment Grid) के क्रेडिबल द्वार खुल सकें।
कांवड़ यात्रा का स्थायी विकास और महाकुंभ-2027 की युद्धस्तर पर तैयारियां
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती सरकारों की तदर्थ (Temporary) नीतियों पर प्रहार करते हुए हरिद्वार के लिए निम्नलिखित चार क्रेडिबल और स्थायी प्रशासनिक पहलों को जनता के सामने रखा:
- कांवड़ पटरी मार्ग का स्थायी आधुनिकीकरण: पहले कांवड़ यात्रा के दौरान केवल अस्थायी तंबू और टेंट की व्यवस्थाएं होती थीं, लेकिन धामी सरकार ने सोच बदलते हुए कांवड़ पटरी मार्ग को एक स्थायी, पक्के और आधुनिक राजमार्ग के रूप में विकसित करना शुरू किया है।
- कनेक्टिविटी ग्रिड का चौड़ीकरण: महाकुंभ-2027 को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए बहादराबाद-सिडकुल से शिवालिक नगर तक सड़क चौड़ीकरण, ज्वालापुर-शिवालिक नगर के बीच रोह नदी पर नए पुल का निर्माण तथा पतंजलि योगपीठ से फेरूपुर तक संपर्क मार्ग के सुदृढ़ीकरण का कार्य प्रगति पर है।
- आधुनिक परिवहन अवसंरचना: श्रद्धालुओं की गतिशीलता को बढ़ाने के लिए हरिद्वार में आधुनिक हेलीपोर्ट, पॉड टैक्सी परियोजना (Pod Taxi Project) तथा हर की पैड़ी से माँ चंडी देवी और माँ मनसा देवी की पहाड़ियों तक आधुनिक रोपवे (Ropeway) परियोजनाओं पर विधिक रूप से काम चल रहा है।
- नागरिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा विंग: स्थानीय निवासियों के लिए हरिद्वार मेडिकल कॉलेज का निर्माण अंतिम चरण में है, जबकि लालढांग में मॉडल डिग्री कॉलेज तथा श्यामपुर में अत्याधुनिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना कर सामाजिक सुशासन को सुदृढ़ किया जा रहा है।
सांस्कृतिक अस्मिता का संरक्षण: सख्त कानून और जीरो टॉलरेंस नीति
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भौतिक विकास के साथ-साथ देवभूमि उत्तराखंड की मूल पहचान और जनसांख्यिकीय अस्मिता (Demographic Identity) का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए क्रेडिबल विधिक कदमों का विवरण प्रस्तुत किया:
- विधिक सुधार और कड़े कानून: राज्य में लागू की गई समान नागरिक संहिता (UCC), भारत का सबसे सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, पारदर्शी परीक्षाओं के लिए नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति सुशासन के प्रति सरकार की विधिक प्रतिबद्धता को सिद्ध करती है।
- अतिक्रमण मुक्त देवभूमि: सरकारी भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराने के महा-अभियान के तहत अब तक 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण को विधिक रूप से हटाया जा चुका है। इसके साथ ही, पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं के माध्यम से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों के विधिक नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं।
कैबिनेट और प्रशासनिक समन्वय: आर. मीनाक्षी सुंदरम का तकनीकी वक्तव्य
समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज ने कहा कि धर्मनगरी में इस स्तर के बुनियादी ढांचे का विकास राज्य की जीडीपी (State GDP) और पर्यटन उद्योग के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। उन्होंने प्रशासनिक मार्ग का नाम परिवर्तित करने का एक नीतिगत सुझाव भी दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित पक्षों और संत समाज से विधिक विमर्श कर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश जारी किए।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा ने भी अपने क्रेडिबल विचार साझा किए। अंत में UIIDB के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम ने आश्वस्त किया कि विभाग महाकुंभ-2027 की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने से काफी पहले इन सभी चारों विधिक परियोजनाओं को धरातल पर शत-प्रतिशत पूर्ण कर लेगा।
नए उत्तराखंड के निर्माण का क्रेडिबल और विधिक रोडमैप
21 जुलाई, 2026 को हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ₹235 करोड़ की इन चार बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाना उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य (Leading State) बनाने के संकल्प की दिशा में एक क्रेडिबल और विधिक मील का पत्थर है। तदर्थ व्यवस्थाओं के बजाय कांवड़ पटरी मार्ग और घाटों का स्थायी विकास यह दर्शाता है कि धामी सरकार दीर्घकालिक और टिकाऊ सुशासन (Sustainable Governance) पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
यूआईआईडीबी (UIIDB) के प्रबंध निदेशक आर. मीनाक्षी सुंदरम का प्रशासनिक समन्वय और कलेक्ट्रेट व मेला विंग की सक्रियता इस बात की विधिक गारंटी है कि महाकुंभ-2027 न केवल आध्यात्मिक रूप से दिव्य होगा, बल्कि अवसंरचना के मामले में भी वैश्विक मानकों पर खरा उतरेगा। समान नागरिक संहिता (UCC), सख्त नकल विरोधी कानून और 12 हजार एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने जैसे नीतिगत निर्णय यह सिद्ध करते हैं कि देवभूमि उत्तराखंड आज विकास और अपनी सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण के एक क्रेडिबल व संतुलित पथ पर मजबूती से अग्रसर है।
