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देहरादून, 8 बुधवार, 2026: उत्तराखंड के सांस्कृतिक और आर्थिक इतिहास में समावेशी सुशासन को एक नई ऊंचाई देते हुए राज्य की राजधानी देहरादून एक बड़े राष्ट्रीय समागम की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। बुधवार, 8 जुलाई, 2026 को जिला सूचना कार्यालय (सू.वि.) द्वारा जारी आधिकारिक विधिक विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन’ (PM VIKAS - प्रधानमंत्री विकास योजना) के अंतर्गत आगामी 11 से 15 जुलाई, 2026 तक देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में पांच दिवसीय उत्तरी क्षेत्रीय ‘लोक संवर्धन पर्व’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के तत्वाधान में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय स्तर के छठे मेगा इवेंट का औपचारिक विधिक उद्घाटन सूबे के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री खजान दास द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। इस ग्रांड नेशनल इवेंट में उत्तराखंड सहित देश के कोने-कोने से आने वाले अल्पसंख्यक कारीगर, शिल्पकार और हुनरमंद अपने स्वदेशी और पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों का क्रेडिबल प्रदर्शन व सीधे विपणन (Direct Marketing) करेंगे।
राष्ट्रीय श्रृंखला का छठा संस्करण: दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बाद उत्तराखंड का विधिक चयन
प्रशासनिक सुशासन के क्षेत्र में यह उत्तराखंड के लिए एक बड़ी क्रेडिबल उपलब्धि है कि इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय श्रृंखला के छठे (6th) इवेंट के आयोजन हेतु केंद्र सरकार ने देहरादून को चुना है। इससे पूर्व इस ऐतिहासिक पर्व का सफल और क्रेडिबल संपादन देश के निम्नलिखित महत्वपूर्ण स्थलों पर किया जा चुका है:
- दिल्ली के ऐतिहासिक राजघाट और दिल्ली हाट (INA)।
- केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर।
- कोच्चि (केरल)।
इस पावन लोक पर्व का आयोजन उत्तराखंड के पारंपरिक चेतना के प्रतीक 'हरेला उत्सव' के शुभ अवसर पर किया जा रहा है, जिससे यह आयोजन स्थानीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकीकरण का एक अनूठा संगम बनकर उभरेगा।
छठा राष्ट्रीय 'लोक संवर्धन पर्व' देहरादून: प्रशासनिक, आवंटन एवं सुरक्षा नीति मैट्रिक्स
8 जुलाई, 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में संपन्न हुई उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक के प्रमुख विधिक निर्णयों का विवरण इस तालिका में संकलित है:
| लोक संवर्धन सुशासन घटक | आधिकारिक प्रशासनिक अवस्थिति (वर्ष 2026) | प्रमुख विधिक एवं नोडल एजेंसियां | स्थानीय आजीविका पर क्रेडिबल प्रभाव |
| मूल केंद्रीय योजना | प्रधानमंत्री विकास योजना (PM VIKAS) | केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार | अल्पसंख्यक कारीगरों को वैश्विक बाजार और बिचौलियों से विधिक मुक्ति। |
| आयोजन स्थल व तिथि | परेड ग्राउंड, देहरादून | 11 से 15 जुलाई 2026 | उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण निगम | पांच दिवसीय राष्ट्रीय व्यापार मेला; 'Vocal for Local' को बढ़ावा। |
| स्टॉल आवंटन और शुल्क | कुल 160 स्टॉल | पूर्णतः निशुल्क | शिल्पकार विंग (130) + फूड कोर्ट (30) | सीमांत व निर्धन शिल्पकारों का शून्य वित्तीय निवेश पर आर्थिक सशक्तिकरण। |
| स्थानीय विधिक आरक्षण | उत्तराखंड के कारीगरों हेतु 40% कोटा | जिला उद्योग केंद्र (DIC) एवं एनजीओ | राज्य के पारंपरिक पहाड़ी हस्तशिल्प और कलाकृतियों का राष्ट्रीय स्तर पर विपणन। |
स्थानीय हुनर को विधिक संरक्षण: महिला, युवा और लुप्तप्राय कलाओं को प्राथमिकता
प्रशासनिक पारदर्शिता और अंत्योदय के सिद्धांतों का अनुपालन करते हुए, इस मेले में स्टॉल आवंटन के लिए केंद्रीय मंत्रालय के बेहद कड़े और पारदर्शी विधिक मानक तय किए गए हैं। कुल 160 स्टॉलों (130 हस्तशिल्प और 30 पारंपरिक फूड कोर्ट) के आवंटन में निम्नलिखित वर्गों को क्रेडिबल प्राथमिकता दी जाएगी:
- अधिसूचित समुदायों का चयन: देश के छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों—मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन व पारसी के वास्तविक हुनरमंदों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे एंट्री दी जाएगी।
- सशक्तिकरण संकेतक: महिला शिल्पकारों, युवा स्टार्टअप कारीगरों, पहली बार राष्ट्रीय मंच पर आ रहे ग्रामीण हुनरमंदों तथा देश की लुप्त हो रही प्राचीन पारंपरिक कलाओं (Dying Arts) के जानकारों को पूरी तरह निःशुल्क स्टॉल विधिक रूप से आवंटित किए गए हैं।
मानसून और डेंगू से बचाव: जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के 4 कड़े सुशासन निर्देश
बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गरिमा के इस आयोजन में किसी भी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निम्नलिखित चार कड़े सुरक्षा और स्वास्थ्य निर्देश जारी किए हैं:
- अत्याधुनिक वॉटरप्रूफ टेंटिंग और ड्रेनेज: चूंकि जुलाई माह मानसून का चरम समय है, इसलिए पूरे परेड ग्राउंड में पूर्णतः वॉटरप्रूफ जर्मन हैंगर टेंट लगाने और जल निकासी (Water Drainage) की 24/7 लाइव व्यवस्था करने के निर्देश।
- डेंगू रोधी फॉगिंग और नगर निगम एक्शन: बरसात के मौसम को देखते हुए नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में नियमित रूप से एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि डेंगू का खतरा शून्य रहे।
- बायर-सेलर मीट (Business Networking): जिला उद्योग केंद्र (DIC) के माध्यम से बड़े राष्ट्रीय खरीदारों और स्थानीय अल्पसंख्यक उद्यमियों के बीच संवाद सत्र आयोजित करना, ताकि कारीगरों को दीर्घकालिक थोक ऑर्डर मिल सकें।
- अत्याधुनिक सुरक्षा एवं 'नो-ट्रैफिक' कॉरिडोर: पुलिस विभाग और सिटी मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया गया है कि परेड ग्राउंड के चारों ओर सुचारू ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाए और अग्निशमन (Fire Clearance) व त्वरित स्वास्थ्य किट के साथ मेडिकल टीमें तैनात रहें।
सांस्कृतिक संध्या: 'अनेकता में एकता' का जीवंत प्रदर्शन
यह पांच दिवसीय राष्ट्रीय लोक संवर्धन पर्व 11 जुलाई से प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक आम जनता, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए पूरी तरह निशुल्क खुला रहेगा। मेले के मुख्य आकर्षण को रेखांकित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद एक भव्य 'सांस्कृतिक संध्या' का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के राष्ट्रीय स्तर के लोक कलाकार सूफी, कव्वाली, पहाड़ी झोड़ा-चांचरी और विभिन्न लोक नृत्यों के माध्यम से भारत की साझी सांस्कृतिक विरासत का रंग बिखेरेंगे।
आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक समरसता का आदर्श मॉडल
11 जुलाई, 2026 से देहरादून के परेड ग्राउंड में सजने वाला यह 'लोक संवर्धन पर्व' उत्तराखंड में समावेशी आर्थिक विकास और सांस्कृतिक सुशासन की दिशा में एक क्रेडिबल मील का पत्थर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास के नेतृत्व में आयोजित हो रहा यह छठा राष्ट्रीय संस्करण यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार अंतिम छोर पर बैठे शिल्पकार की कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की देखरेख में तैयार मानसून सुरक्षा चक्र, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह और अल्पसंख्यक कल्याण निगम के महाप्रबंधक डॉ. शाहिद सिद्दीकी का यह विभागीय समन्वय इस आयोजन की क्रेडिबल सफलता सुनिश्चित करेगा। स्थानीय पहाड़ी कारीगरों के लिए 40% का विधिक आरक्षण न केवल राज्य के 'हरेला' पर्व के महत्व को बढ़ाएगा, बल्कि 'प्रधानमंत्री विकास योजना' के वित्तीय संबल से देश की अल्पसंख्यक और महिला प्रतिभाओं को आत्मनिर्भर भारत की मुख्यधारा से जोड़ने का एक क्रेडिबल और मजबूत प्रकाश स्तंभ साबित होगा।
