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देहरादून, 7 जुलाई, 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के वर्ष 2025-2026 के नीतिगत संकल्प "नशा मुक्त उत्तराखंड" (Drug-Free Uttarakhand) को धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मंगलबार, 7 जुलाई, 2026 को सूबे के निदेशक समाज कल्याण श्री संजय कुमार ने देहरादून जनपद के अंतर्गत संचालित राजकीय नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र, रायवाला का औचक विधिक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया।
इस उच्च स्तरीय प्रशासनिक छापे के दौरान निदेशक ने केंद्र के भीतर उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं, मनोचिकित्सकीय परामर्श (Psychiatric Counseling), भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता प्रबंधन तथा विधिक एवं शासकीय अभिलेखों (Records) के रखरखाव का अत्यंत सूक्ष्मता से गहन अवलोकन किया। निदेशक ने स्पष्ट किया कि समाज कल्याण विभाग अब केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि धरातल पर क्रेडिबल सुधारों और विधिक मानकों के शत-प्रतिशत पालन पर केंद्रित है।
लाभार्थियों से सीधा संवाद: 'नशे की लत सामाजिक बीमारी, संवेदनशीलता से हो उपचार'
निरीक्षण के दौरान समाज कल्याण निदेशक संजय कुमार ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल से इतर हटकर केंद्र में उपचाराधीन और भर्ती विधिक लाभार्थियों (नशा पीड़ितों) के बैरकों में जाकर उनसे सीधा और आत्मीय संवाद स्थापित किया। उन्होंने लाभार्थियों के स्वास्थ्य, दैनिक आहार, चिकित्सा उपचार तथा उनके पुनर्वास संबंधी व्यावहारिक अनुभवों की लाइव फीडबैक प्राप्त की।
- अधिकारियों को कड़े निर्देश: निदेशक ने केंद्र के प्रशासनिक अधिकारियों और डॉक्टरों को दो टूक हिदायत दी कि प्रत्येक भर्ती लाभार्थी को अत्यंत गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और मानवीय दृष्टिकोण के साथ संवेदनशील विधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- सामाजिक प्रभाव का रेखांकन: श्री संजय कुमार ने नीतिगत वक्तव्य देते हुए कहा कि नशे की विभीषिका केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका सीधा दंडात्मक और आर्थिक प्रभाव पूरे परिवार एवं समाज के ताने-बाने पर पड़ता है। इसलिए इन सरकारी केंद्रों को केवल 'डिटॉक्सिफिकेशन' (Detoxification) तक सीमित न रखकर इन्हें प्रभावी विधिक परामर्श, योग, मानसिक अवसाद मुक्ति और रोजगारपरक पुनर्वास का क्रेडिबल केंद्र बनाया जाए।
राजकीय नशा मुक्ति केंद्र रायवाला: निरीक्षण सांख्यिकी, विधिक मानक एवं प्रशासनिक टीम मैट्रिक्स
7 जुलाई, 2026 को आयोजित इस उच्च स्तरीय प्रशासनिक निरीक्षण में उपस्थित आला अधिकारियों और कवर्ड विधिक घटकों का प्रामाणिक विवरण इस तालिका में संकलित है:
| विधिक एवं सुशासन घटक | कवर्ड प्रशासनिक क्षेत्र / विधिक मानक | उपस्थित नोडल प्रशासनिक अधिकारी | जिला समाज कल्याण विंग का विधिक ध्येय |
| निरीक्षण का मुख्य केंद्र | राजकीय नशा मुक्ति केंद्र, रायवाला (देहरादून) | श्री संजय कुमार (निदेशक समाज कल्याण) | राज्य के समस्त सरकारी व निजी नशा मुक्ति केंद्रों का विधिक मानकीकरण। |
| तकनीकी एवं प्रशासनिक विंग | संयुक्त एवं उपनिदेशालय समाज कल्याण | श्री जी.आर. नौटियाल (संयुक्त निदेशक), श्री वासुदेव आर्य (उपनिदेशक) | विभागीय नियमों, बजटीय आवंटन और इंफ्रास्ट्रक्चर की विधिक स्क्रूटनी। |
| जनपदीय प्रवर्तन कमान | कलेक्ट्रेट समाज कल्याण प्रभाग | श्री दीपांकर घिल्डियाल (जिला समाज कल्याण अधिकारी) | देहरादून जिले के भीतर अवैध ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ कड़े विधिक एक्शन का समन्वय। |
| क्लिनिकल एवं चिकित्सा विंग | चिकित्सीय व परामर्श टीम | डॉ. वैशाली (केंद्र प्रभारी, रायवाला) | स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुरूप 24/7 चिकित्सा व आपातकालीन सेवाएं। |
स्वच्छता, अनुशासन और मानकों पर शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) के कड़े निर्देश
समाज कल्याण विभाग ने रायवाला केंद्र की कार्यप्रणाली, विगत महीनों की उपलब्धियों और संचालित की जा रही सुधारात्मक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा के बाद कड़े नीतिगत निर्देश जारी किए:
- अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण: केंद्र में आने वाले प्रत्येक मरीज का विधिक रूप से केस-हिस्ट्री चार्ट, मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्रेस रिपोर्ट और दवाओं का स्टॉक रजिस्टर पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए।
- अवैध और अमानवीय प्रताड़ना पर विधिक रोक: निदेशक ने स्पष्ट किया कि कई निजी केंद्रों से आने वाली प्रताड़ना की शिकायतों के मद्देनजर सरकारी केंद्रों को एक आदर्श (Model Centre) के रूप में स्थापित होना होगा। यदि स्वच्छता, अनुशासन या भोजन के विधिक मानकों में रत्ती भर भी कमी पाई गई, तो केंद्र प्रभारी के खिलाफ सीधे प्रशासनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- जन-जागरूकता और कम्युनिटी आउटरीच: कलेक्ट्रेट और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रायवाला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को नशे के चंगुल से बचाने के लिए व्यापक जागरूकता शिविरों के विधिक आयोजन के निर्देश दिए गए हैं।
"नशा मुक्त उत्तराखंड" लक्ष्य प्राप्ति के 4 मुख्य नीतिगत स्तंभ
निदेशक संजय कुमार के विज़न के अनुरूप राज्य के समाज कल्याण निदेशालय ने इस अभियान को संस्थागत रूप देने के लिए निम्नलिखित चार विधिक स्तंभ तय किए हैं:
- एकीकृत पुनर्वास नीति (Skilling & Rehabilitation): नशा मुक्ति केंद्रों से ठीक होने वाले युवाओं को सीधे कौशल विकास योजनाओं (Skill Development) से जोड़ना, ताकि वे दोबारा अपराध या नशे की ओर न मुड़ें।
- कड़े विधिक मानक एवं औचक छापे: राज्य के सभी निजी नशा मुक्ति केंद्रों का नए नियमों के तहत पुन: पंजीकरण और जिलाधिकारियों (DM) की अध्यक्षता में गठित कमेटियों द्वारा निरंतर औचक निरीक्षण।
- मानसिक स्वास्थ्य एवं क्लिनिकल थेरेपी: केंद्रों के भीतर केवल एलोपैथिक दवाओं के भरोसे न रहकर योग्य मनोवैज्ञानिकों द्वारा 'कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी' (CBT) और ध्यान-योग सत्रों का अनिवार्य संचालन।
- सामुदायिक सहभागिता (Community Policing): शिक्षण संस्थानों, ग्राम पंचायतों और महिला मंगल दलों के साथ मिलकर "ड्रग-फ्री कैंपस" और "ड्रग-फ्री विलेज" संकल्पों की विधिक मॉनिटरिंग।
कड़े प्रशासनिक निरीक्षणों से बहाल होती शासकीय विश्वसनीयता
7 जुलाई, 2026 को समाज कल्याण निदेशक संजय कुमार द्वारा रायवाला नशा मुक्ति केंद्र का यह गहन विधिक निरीक्षण इस बात का क्रेडिबल प्रमाण है कि उत्तराखंड शासन देवभूमि की युवा पीढ़ी को नशे के गर्त से बाहर निकालने के लिए अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है।
संयुक्त निदेशक जी.आर. नौटियाल, उपनिदेशक वासुदेव आर्य और जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल की उपस्थिति में किया गया यह औचक एक्शन फील्ड स्तर के अधिकारियों को अपनी विधिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का एक कड़ा सुशासन संदेश है। केंद्र प्रभारी डॉ. वैशाली को दिए गए कड़े विधिक निर्देश यह सुनिश्चित करेंगे कि सरकारी धन का उपयोग पीड़ितों के वास्तविक मानसिक और शारीरिक कायाकल्प के लिए हो। समाज कल्याण विभाग का यह क्रेडिबल संकल्प आने वाले समय में उत्तराखंड को न केवल नशा मुक्त बनाएगा, बल्कि पुनर्वास सेवाओं के मामले में देश के भीतर एक क्रेडिबल मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करेगा।
