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रुद्रप्रयाग/ऊखीमठ, 24 अगस्त, 2026: रुद्रप्रयाग जिले के विकासखंड ऊखीमठ स्थित राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) लामगौंडी में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, व्यक्तिगत सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सोमवार, 24 अगस्त, 2026 को प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट स्नेह' (Project SNEH - Safety, Nurturing, Empower, Help) के अंतर्गत संचालित किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्कूल में अध्ययनरत छात्राओं को शिक्षा के महत्व, किशोरावस्था संबंधी स्वास्थ्य देखभाल, पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act), बाल विवाह प्रतिषेध और वर्तमान समय में बढ़ती साइबर सुरक्षा चुनौतियों से अवगत कराना रहा।
विशेषज्ञों का संवाद: स्वास्थ्य, विधिक अधिकार और सुरक्षा पर मार्गदर्शन
कार्यशाला में विभिन्न विभागों की महिला अधिकारियों व चिकित्सा विशेषज्ञों ने उपस्थित रहकर छात्राओं को मार्गदर्शन प्रदान किया:
- शिक्षा एवं करियर मार्गदर्शन: छात्राओं को अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार लक्ष्य निर्धारित कर आत्मनिर्भर बनने तथा शिक्षा के जरिए अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया गया।
- किशोरावस्था स्वास्थ्य एवं स्वच्छता: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुप्तकाशी की डॉ. श्रेया थपलियाल तथा जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. दीपा तिलारा बिष्ट ने संतुलित आहार, नियमित स्वच्छता, एनीमिया नियंत्रण और मानसिक तनाव से बचाव पर चर्चा की। मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (MHM) के तहत सैनिटरी पैड का सही उपयोग व निस्तारण का प्रशिक्षण दिया गया।
- विधिक सुरक्षा व पॉक्सो एक्ट: महिला उपनिरीक्षक (कोतवाली ऊखीमठ) सुश्री पूजा रावत ने POCSO Act की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न कानूनन अपराध है और संकट की स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन या किसी भी विश्वसनीय वयस्क को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए।
- बाल विवाह प्रतिषेध व साइबर सुरक्षा: जिला प्रोबेशन कार्यालय रुद्रप्रयाग की संरक्षण अधिकारी श्रीमती रोशनी रावत तथा जिला पंचायत रुद्रप्रयाग की कार्याधिकारी सुश्री प्राची रावत ने बाल विवाह के सामाजिक व मानसिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग तथा फर्जी प्रोफाइल से सावधान रहने हेतु छात्राओं को सतर्क किया गया।
प्रोजेक्ट स्नेह (Project SNEH) कार्यशाला लामगौंडी: प्रशासनिक व विषयवार संरचना
24 अगस्त, 2026 को आयोजित कार्यशाला का प्रशासनिक और विषयगत विवरण इस तालिका में संकलित है:
| कार्यशाला का मुख्य विषय | विशेषज्ञ/अधिकारी उपस्थिति | संबंधित अधिनियम / विभागीय संदर्भ | सुशासन व बालिका सुरक्षा पर प्रभाव |
| किशोरावस्था व व्यक्तिगत स्वच्छता | डॉ. दीपा तिलारा बिष्ट व डॉ. श्रेया थपलियाल | राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) | स्वास्थ्य जागरूकता से एनीमिया व तनाव नियंत्रण। |
| बाल सुरक्षा व विधिक अधिकार | सुश्री पूजा रावत (महिला SI, ऊखीमठ) | POCSO Act व BNS विधिक धाराएं | बाल अपराधों के खिलाफ कानूनी निडरता। |
| बाल विवाह रोकथाम व सामाजिक सुरक्षा | श्रीमती रोशनी रावत (संरक्षण अधिकारी) | बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम | कम उम्र में शादी रोकने व शिक्षा निरंतरता। |
| प्रशासनिक व साइबर जागरूकता | सुश्री प्राची रावत (कार्याधिकारी, जिला पंचायत) | आईटी एक्ट एवं साइबर सुरक्षा सेल | ऑनलाइन धोखाधड़ी व सोशल मीडिया सुरक्षा। |
छात्राओं की सक्रिय सहभागिता और शंका समाधान
कार्यशाला के दौरान छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी जिज्ञासाएं, स्वास्थ्य समस्याएं और सुरक्षा से जुड़े सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। अधिकारियों ने सभी प्रश्नों का संतोषजनक और संवेदनशीलता के साथ उत्तर दिया। छात्राओं को संकट के समय हेल्पलाइन नंबरों (जैसे 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, 1930 साइबर हेल्पलाइन, 112 इमरजेंसी) का उपयोग करने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया।
प्रोजेक्ट स्नेह (Project SNEH) के 4 मुख्य नीतिगत स्तंभ
बालिकाओं को सुरक्षित और सशक्त बनाने हेतु तय किए गए चार प्रमुख लक्ष्य:
- Safety (सुरक्षा): पॉक्सो अधिनियम, साइबर सुरक्षा और गुड टच-बैड टच के प्रति विधिक जागरूकता।
- Nurturing (पोषण एवं स्वास्थ्य): किशोरावस्था स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वच्छता और मानसिक आरोग्य।
- Empower (सशक्तिकरण): शिक्षा, करियर गाइडेंस और आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहन।
- Help (सहायता एवं परामर्श): बाल विवाह रोकथाम, हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी और तत्काल संस्थागत सहायता।
सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में सार्थक कदम
24 अगस्त, 2026 को जीआईसी लामगौंडी (ऊखीमठ) में आयोजित 'प्रोजेक्ट स्नेह' कार्यशाला ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा की दिशा में एक क्रेडिबल प्रयास है। स्वास्थ्य, शिक्षा और विधिक अधिकारों के इस एकीकृत मंच से न केवल छात्राओं में आत्मविश्वास का संचार होगा, बल्कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकेंगी।
