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कोटद्वार/देहरादून, 24 अगस्त, 2026: उत्तराखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर कण्वाश्रम के गौरवशाली इतिहास पर आधारित पुस्तक 'कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष' ने राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान हासिल कर पूरे उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। सोमवार, 24 अगस्त, 2026 को कोटद्वार के माल गोदाम रोड स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित एक भव्य प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण तथा वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मनोज ईष्टवाल ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी साझा की।
लोकार्पण के मात्र एक माह के भीतर इस पुस्तक को फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (FIP) एवं मेंबर्स ऑफ इंटरनेशनल पब्लिशर्स एसोसिएशन, जिनेवा द्वारा आयोजित 46वें वार्षिक पुरस्कार समारोह में आर्ट एवं कॉफी टेबल बुक (C.B.T.) श्रेणी के अंतर्गत देशभर में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
5,000 पुस्तकों के बीच चयन: उत्तराखंड के इतिहास में पहली उपलब्धि
प्रेस वार्ता के दौरान विधानसभा अध्यक्ष और लेखक ने पुस्तक के चयन और इसके पीछे के शोध कार्य पर प्रकाश डाला:
- ऐतिहासिक पहली उपलब्धि: उत्तराखंड राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है जब कण्वाश्रम पर आधारित किसी सी.बी.टी. (कॉफी टेबल बुक) को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
- कठोर चयन प्रक्रिया: नई दिल्ली स्थित 'किताब वाले' द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक की उत्कृष्ट विषयवस्तु, गहन शोध, दृश्य प्रस्तुति और प्रकाशन गुणवत्ता को देखते हुए जूरी ने देशभर की लगभग 5,000 पुस्तकों के बीच 'कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष' को सर्वश्रेष्ठ चुना।
- लेखक का 37 वर्षों का शोध: वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मनोज ईष्टवाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1989 से कण्वाश्रम के विषय पर शोध आरंभ किया था। वर्ष 1992 में डॉक्यूमेंट्री कार्य के बाद 1995 में 'शकुंतला' नृत्य-नाटिका का दूरदर्शन पर प्रसारण हुआ।
- शोध की ऐतिहासिक प्रेरणा: श्री ईष्टवाल को वर्ष 1988 में 'फाउंडर ऑफ गढ़वाल राइफल्स' पर काम करते समय उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. शिवानंद नौटियाल, गढ़वाल भ्रातृ संघ के बद्रीश पोखरियाल एवं समाजसेवी गोकुलानंद बर्थवाल के साथ हुई बैठक से कण्वाश्रम पर शोध की प्रेरणा मिली थी।
'कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष' राष्ट्रीय पुरस्कार: प्रशासनिक व साहित्यिक विवरण
24 अगस्त, 2026 को सार्वजनिक की गई इस राष्ट्रीय उपलब्धि का ब्योरा इस तालिका में संकलित है:
| उपलब्धि/विधिक घटक | राष्ट्रीय पुरस्कार विवरण व संस्था | नोडल निकाय व आयोजक | सांस्कृतिक व पर्यटन प्रभाव |
| प्राप्त सम्मान | राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार (Art & CBT Category) | फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (FIP) | कण्वाश्रम को राष्ट्रीय पर्यटन पटल पर पहचान। |
| संबद्ध वैश्विक निकाय | मेंबर्स ऑफ इंटरनेशनल पब्लिशर्स एसोसिएशन, जिनेवा | 46वां राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह | उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक प्रचार। |
| प्रकाशन संस्थान | 'किताब वाले', नई दिल्ली | लगभग 5,000 प्रतिस्पर्धी पुस्तकें | उच्च स्तरीय शोध व प्रकाशन मानक स्थापित। |
| प्रमुख शोधकर्ता/लेखक | मनोज ईष्टवाल (वरिष्ठ पत्रकार) | ऋतु खण्डूडी भूषण (संरक्षक/सहयोग) | भावी पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक साक्ष्य संग्रह। |
कण्वाश्रम का राष्ट्रीय व सांस्कृतिक महत्व
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने लेखक मनोज ईष्टवाल के दशकों लंबे समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि कण्वाश्रम केवल कोटद्वार की स्थानीय पहचान नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ी अमूल्य धरोहर है। सम्राट भरत की जन्मस्थली और महर्षि कण्व की तपोभूमि कण्वाश्रम के इतिहास को राष्ट्रीय मंच पर पुनर्स्थापित करने में यह कॉफी टेबल बुक मील का पत्थर साबित होगी।
'कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष' पुस्तक की 4 मुख्य विशेषताएं
कण्वाश्रम के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करते प्रमुख बिंदु:
- ऐतिहासिक निरंतरता: कण्वाश्रम से चक्रवर्ती सम्राट भरत और भरत से भारतवर्ष बनने की गौरवशाली यात्रा का शोधपरक दस्तावेजीकरण।
- कलात्मक प्रस्तुति: उच्च स्तरीय फोटोग्राफी, दुर्लभ अभिलेखों और ऐतिहासिक तथ्यों का कॉफी टेबल बुक के रूप में एकत्रीकरण।
- दशकों का प्रामाणिक शोध: वर्ष 1989 से लगातार किए गए 37 वर्षों के गहन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शोध का परिणाम।
- विरासत का संरक्षण: आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड की पौराणिक एवं ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक
24 अगस्त, 2026 को कोटद्वार में साझा की गई यह उपलब्धि न केवल कण्व नगरी कोटद्वार और उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह प्रथम पुरस्कार कण्वाश्रम के गौरव को पुनः स्थापित करने और राज्य में सांस्कृतिक पर्यटन को नए आयाम देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

