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देहरादून, 24 सितंबर, 2026: राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े मुकदमों के त्वरित समाधान और आमजन को राहत पहुंचाने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। गुरुवार, 24 सितंबर, 2026 को ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित देर शाम मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राजस्व वादों, माननीय न्यायालयों के अनुपालन प्रकरणों तथा शासन स्तर से संदर्भित मामलों की समीक्षा की।
जिले में कुल 15,540 राजस्व वाद निस्तारण हेतु लंबित पाए जाने पर जिलाधिकारी ने भारी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित उप जिलाधिकारियों (SDM) व तहसीलदारों को नियमित कोर्ट चलाकर मामलों को निपटाने के कड़े निर्देश जारी किए।
स्मार्ट मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर प्रणाली और निर्विवाद विरासतन के युद्धस्तर निस्तारण का खाका
समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने हेतु कई मुख्य निर्देश जारी किए:
- सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग: जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि लंबित वादों व शासन/न्यायालय संदर्भित मामलों की निगरानी हेतु एक अत्याधुनिक ऑर्गनाइज्ड एंड मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए। इस प्लेटफॉर्म पर वाद की वर्तमान स्थिति, लंबित रहने का कारण, जिम्मेदार अधिकारी व निस्तारण की अंतिम तिथि दर्ज होगी।
- पुराने मुकदमों पर विशेष ध्यान: धारा 166/167 के अंतर्गत 3 से 5 वर्ष पुराने 82 वाद, धारा 229बी के 841 वाद और धारा 176 के 1,157 लंबित वादों (जिसमें 179 मामले 3 से 5 वर्ष पुराने हैं) पर प्राथमिकता से सुनवाई कर निस्तारण की कार्ययोजना मांगी गई।
- निर्विवाद विरासतन मामले: डीएम ने स्पष्ट किया कि जिन विरासतन मामलों में कोई विवाद नहीं है, उन्हें बिना वजह लंबित रखना अनुचित है। ऐसे वादों का युद्धस्तर पर निस्तारण किया जाए ताकि जनता को अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।
- कम्प्लायंस व अनुपालन ट्रैकिंग: माननीय न्यायालयों के आदेशों, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व सचिव स्तर से प्राप्त संदर्भों के अनुपालन (Compliance) की समयबद्ध समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
देहरादून राजस्व न्यायालय समीक्षा 2026: लंबित वाद व प्रशासनिक आंकड़े
24 सितंबर, 2026 को जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए गए मुकदमों का संकलित ब्योरा:
| कानून / धारा | लंबित वादों की संख्या | विशेष प्रशासनिक स्थिति | प्रशासनिक निर्देश व लक्ष्य |
| कुल राजस्व वाद | 15,540 कुल मामले | संपूर्ण जनपद (SDM व तहसीलदार कोर्ट) | नियमित सुनवाई व स्मार्ट सॉफ्टवेयर से ट्रैकिंग। |
| धारा 166/167 | 82 वाद | 3 से 5 वर्ष पुराने मामले | लापरवाही पर अधिकारी की जवाबदेही तय। |
| धारा 229बी | 841 वाद | भूमि स्वामित्व व अधिकारों से संबंधित | विभागवार व न्यायालयवार कार्ययोजना। |
| धारा 176 (खाता विभाजन) | 1,157 वाद | 179 मामले 3 से 5 वर्ष पुराने | अगली बैठक तक प्रगति आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश। |
| निर्विवाद विरासतन | शून्य विवाद श्रेणी | नामांतरण व वरासत प्रक्रिया | युद्धस्तर पर त्वरित निस्तारण का आदेश। |
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी
समीक्षा बैठक में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, एडीएम (प्रशासन) स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, एसडीएम रविन्द्र ज्वांठा, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम अपर्णा ढौंडियाल, एसडीएम कुमकुम जोशी, संयुक्त निदेशक विधि गिरीश चन्द्र पंचौली, जिला शासकीय अधिवक्ता गुरू प्रसाद रतूड़ी सहित पटल सहायक उपस्थित रहे।
राजस्व सुशासन के 4 मुख्य नीतिगत आयाम
डिजिटल गवर्नेंस और त्वरित न्याय वितरण हेतु प्राथमिक बिंदु:
- डिजिटल केस ट्रैकिंग: ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से केस की रियल-टाइम स्थिति और देरी के कारणों को चिन्हित करना।
- समयबद्ध न्याय व्यवस्था: बेवजह स्थगन (Adjournment) पर रोक लगाकर तय समय-सीमा के भीतर फैसलों को लागू करना।
- सशक्त अनुपालन (Compliance Cell): शासन और उच्च न्यायालयों के आदेशों का त्वरित और बिंदुवार अनुपालन सुनिश्चित करना।
- नागरिक-केंद्रित सेवाएं: विरासतन और नामांतरण जैसे आम नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुगमता लाना।
पारदर्शी और तकनीक-आधारित राजस्व प्रशासन
24 सितंबर, 2026 को देहरादून कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा लिया गया यह निर्णय जिले की राजस्व न्याय व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। स्मार्ट मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर के लागू होने से न केवल मुकदमों के निस्तारण में तेजी आएगी, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही भी पूरी पारदर्शिता के साथ तय हो सकेगी।