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देहरादून, 16 सितंबर, 2026: उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय युवा प्रकोष्ठ के कार्यकारी अध्यक्ष कुलदीप रावत ने कॉर्बेट नेशनल पार्क एवं वन विभाग की नीतियों को लेकर शासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। देहरादून में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान यूकेडी नेताओं ने आरोप लगाया कि जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का लगभग 70 प्रतिशत भूभाग लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन पर्यटकों के लगभग सभी मुख्य प्रवेश द्वार रामनगर (नैनीताल) क्षेत्र में खोले गए हैं, जिससे पर्वतीय क्षेत्र के स्थानीय युवा पर्यटन व स्वरोजगार से वंचित हो रहे हैं।
वन विभाग की नीतियों और लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग पर उठाए सवाल
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कुलदीप रावत ने वन विभाग पर पहाड़-विरोधी नीतियां अपनाने का सीधा आरोप लगाया:
- विकास कार्यों में दोहरा मापदंड: यूकेडी नेता ने कहा कि लालढांग-चिल्लरखाल सड़क जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण जनहित के मार्ग को वन नियमों का हवाला देकर रोक दिया जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के नाम पर धड़ाधड़ वृक्षों का कटान किया जा रहा है।
- वन मंत्री पर सवाल व सीधी चेतावनी: उन्होंने वन मंत्री सुबोध उनियाल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए चेतावनी दी कि यदि लैंसडाउन की ओर पर्यटकों के लिए सफारी प्रवेश द्वार तत्काल नहीं खोले गए, तो यूकेडी कार्यकर्ता आगामी 3 तारीख को मैदावन और दुर्गा देवी गेट पर पहुंचकर खुद तालाबंदी तोड़ेंगे और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
यूकेडी कॉर्बेट पार्क प्रवेश द्वार विवाद 2026: नीतिगत व प्रशासनिक विवरण
पर्वतीय पर्यटन एवं वन नीति से संबंधित मुख्य बिंदु:
| प्रशासनिक / नीतिगत घटक | उक्रांद (यूकेडी) के आरोप व प्रमुख मांगें | संबंधित विभाग / क्षेत्र | पर्वतीय रोजगार व सुशासन प्रभाव |
| भूभाग बनाम द्वार संतुलन | 70% भूभाग लैंसडाउन क्षेत्र में, परंतु द्वार रामनगर में केंद्रित | वन विभाग / कॉर्बेट टाइगर रिजर्व | लैंसडाउन व पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के युवाओं हेतु पर्यटन रोजगार का सृजन। |
| मार्ग अवसंरचना का मुद्दा | लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण पर वन स्वीकृतियों की बाधा | पर्यावरण व वन मंत्रालय / राज्य लोक निर्माण विभाग | गढ़वाल व कुमाऊं के मध्य सीधी सड़क कनेक्टिविटी। |
| आंदोलन की चेतावनी | आगामी 3 तारीख को मैदावन व दुर्गा देवी गेट पर तालाबंदी तोड़ने का ऐलान | यूकेडी केंद्रीय युवा प्रकोष्ठ | वन्यजीव क्षेत्र प्रबंधन व कानून व्यवस्था का विषय। |
पर्यावरण संरक्षण बनाम पर्वतीय विकास के 4 मुख्य नीतिगत आयाम
राज्य में सतत पर्यटन और स्थानीय रोजगार सुदृढ़ीकरण हेतु प्रमुख सुझाव:
- समान पर्यटन वितरण: कॉर्बेट नेशनल पार्क के पर्यटन लाभों को नैनीताल के साथ-साथ पौड़ी (लैंसडाउन) जिले के सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाना।
- स्थानीय स्वरोजगार को बढ़ावा: पर्वतीय युवाओं को जिप्सी सफारी, गाइड और होम-स्टे के माध्यम से प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान करना।
- सड़क अवसंरचना व कनेक्टिविटी: लालढांग-चिल्लरखाल जैसे कनेक्टिविटी मार्गों के लिए त्वरित पर्यावरणीय अनुमतियां सुनिश्चित करना।
- संतुलित वन प्रबंधन: पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखते हुए जनहितैषी विकास योजनाओं को गति देना।
पर्यटन विकेंद्रीकरण की ओर बढ़ता आंदोलन
देहरादून में उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा कॉर्बेट पार्क की प्रवेश नीतियों के खिलाफ शुरू किया गया यह विरोध प्रदर्शन पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के विकेंद्रीकरण की मांग को बल देता है। 3 तारीख को प्रस्तावित तालाबंदी चेतावनी के बाद अब शासन और वन विभाग के भावी रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
