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देहरादून: उत्तराखंड की 7 हजार बीघा जमीन पूंजीपतियों के हवाले करने की तैयारी; UKD ने UIIDB दफ्तर में किया उग्र विरोध


Aapki Media AI


 देहरादून। उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन की रक्षा के मुद्दे पर उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने राज्य सरकार और उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने UIIDB के देहरादून स्थित कार्यालय पहुंचकर राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों की करीब 7,000 बीघा जमीन को पूंजीपतियों और निजी कंपनियों को बेचने/हस्तांतरित करने की चल रही प्रक्रिया का कड़ा विरोध दर्ज कराया।


देहरादून: उत्तराखंड की 7 हजार बीघा जमीन पूंजीपतियों के हवाले करने की तैयारी; UKD ने UIIDB दफ्तर में किया उग्र विरोध


यूकेडी नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि इतने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को बाहरी पूंजीपतियों के हवाले करने की तैयारी न केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों के भू-अधिकारों पर सीधा हमला है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व को खतरे में डालने की एक बड़ी साजिश है।

500 करोड़ के टर्नओवर जैसी कठोर शर्तों से स्थानीय नागरिक हो रहे बेदखल

उत्तराखंड क्रांति दल के 'मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ' के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस नीति में ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिससे स्थानीय और मूल निवासी पूरी तरह इस दौड़ से बाहर हो जाएं।

यूकेडी की ओर से उठाए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • अत्यधिक कठिन टर्नओवर शर्त: जमीन आवंटन और निवेश की प्रक्रिया में केवल उन कंपनियों को ही अनुमति दी जा रही है, जिनका वार्षिक टर्नओवर कम से कम ₹ 500 करोड़ है।
  • अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी की अनिवार्यता: शर्त रखी गई है कि निवेशक कंपनी की कम से कम 25 देशों में मौजूदगी होनी चाहिए।
  • मूल निवासियों की उपेक्षा: ऐसी अव्यावहारिक और अत्यधिक बड़ी शर्तों को उत्तराखंड का कोई भी साधारण मूल निवासी या स्थानीय युवा उद्यमी पूरा नहीं कर सकता। इसके जरिए जानबूझकर स्थानीय लोगों को राज्य के संसाधनों से बेदखल कर बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

मांगें न मानने पर प्रदेशव्यापी उग्र जनांदोलन की चेतावनी

यूकेडी नेता लूशुन टोडरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि UIIDB और राज्य सरकार ने इस जमीन नीलामी और हस्तांतरण की प्रक्रिया पर तुरंत रोक नहीं लगाई तथा उत्तराखंड के मूल निवासियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो उत्तराखंड क्रांति दल पूरे प्रदेश में एक बड़ा जनांदोलन खड़ा करेगा।

दल ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन और मूल निवास के अधिकारों की रक्षा के लिए जनता को गांव-गांव जाकर लामबंद किया जाएगा और सड़कों पर उतरकर सरकार की इस व्यापारीकरण नीति का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

मूल निवास और कड़े भू-कानून की उठ रही मांग

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में पिछले लंबे समय से सख्त भू-कानून और 1950 आधारित मूल निवास की मांग को लेकर लगातार सामाजिक और राजनीतिक संगठन मुखर रहे हैं। ऐसे में सरकारी विभागों की 7,000 बीघा जमीन को बड़े कॉरपोरेट्स को देने की इस प्रक्रिया ने आग में घी डालने का काम किया है। यूकेडी ने साफ कर दिया है कि राज्य की परिसंपत्तियों का किसी भी कीमत पर सौदा नहीं होने दिया जाएगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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