देहरादून: शुक्रवार सुबह देहरादून के सिटी सेंटर मॉल के बाहर जिस विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या की गई, वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि अपराध की दुनिया का एक बड़ा खिलाड़ी था। पुलिस की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। 45 वर्षीय विक्रम शर्मा, जो देहरादून के रेसकोर्स में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था, असल में झारखंड के कुख्यात अखिलेश सिंह गैंग का रणनीतिकार और 'गुरू' था। उस पर हत्या के 30 से अधिक मामलों सहित कुल 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे।
1. मौत का मंजर: हथियार साथ था, लेकिन मौका नहीं मिला
शुक्रवार सुबह करीब 9:00 बजे विक्रम शर्मा अपनी डेली रूटीन के अनुसार राजपुर रोड स्थित जिम पहुँचा था। सुबह 10:30 बजे जैसे ही वह वर्कआउट खत्म कर नीचे उतरा, पहले से घात लगाए बाइक सवार हमलावरों ने उस पर गोलियों की बौछार कर दी।
- चौंकाने वाला तथ्य: पुलिस सूत्रों के अनुसार, विक्रम को अपनी जान का खतरा था। वह खुद भी हथियार लेकर जिम पहुँचा था, लेकिन हमलावरों ने उसे संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का एक सेकंड का मौका भी नहीं दिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई और हमलावर फरार हो गए।
2. थ्री ‘पी’ (3P) का मास्टरमाइंड: पुलिस, पॉलिटिशियन और प्रेस
विक्रम शर्मा अपराध की दुनिया में केवल बाहुबल के लिए नहीं, बल्कि अपने दिमाग के लिए जाना जाता था। उसने थ्री ‘पी’ (Police, Politician, Press) को मैनेज करने का एक खतरनाक फार्मूला तैयार किया था।
- पुलिस और राजनीति: 2004 से 2009 के बीच झारखंड में उसने डीएसपी और थाना प्रभारी स्तर के अफसरों से साठगांठ कर अपने विरोधियों (ददई यादव और बड़ा निजाम गिरोह) को खत्म करवाया।
- राजनीतिक पहुंच: उसके संबंध झारखंड के दिग्गज नेताओं, जैसे शिबू सोरेन और सुदेश महतो तक बताए जाते थे।
3. मार्शल आर्ट्स और 'हार्डकोर' क्रिमिनल बनाने की ट्रेनिंग
विक्रम शर्मा मार्शल आर्ट्स में ब्लैक बेल्ट था। वह अपने शिष्यों को, जिसमें कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह भी शामिल था, मार्शल आर्ट्स सिखाने के लिए चाइनीज फिल्मों का सहारा लेता था। वह उन्हें ऐसी फिल्में दिखाता था जहाँ शिष्य अपने गुरु के लिए जान दे देता है। इसी 'ब्रेनवाशिंग' ने अखिलेश सिंह को एक खूंखार अपराधी बनाया और विक्रम को उसका 'अपराधिक गुरु'।
4. संपत्ति के लिए रिश्तों का कत्ल और 'अशोक शर्मा हत्याकांड'
विक्रम की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने संपत्ति के लिए अपने ही लोगों को नहीं बख्शा।
- अशोक शर्मा मर्डर: होटल कारोबारी अशोक शर्मा की हत्या का आरोप विक्रम पर लगा।
- घिनौनी साजिश: अशोक की हत्या के बाद, उसकी करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए विक्रम ने अशोक की विधवा (पिंकी शर्मा) की शादी अपने छोटे भाई अरविंद शर्मा से करा दी। साक्ष्य न मिलने के कारण वह इस केस से बरी हो गया था।
5. विक्रम शर्मा के खूनी कारनामों की लिस्ट (History Sheet)
विक्रम और अखिलेश गैंग के आतंक की कुछ चर्चित घटनाएं:
- 2007: श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या।
- 2008: टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या।
- 2008: पूर्व जज आरपी रवि और ठेकेदार रंजीत सिंह पर फायरिंग।
- 2008: ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या।
6. देहरादून पुलिस के लिए बड़ी चुनौती: क्या यह 'गैंगवार' की शुरुआत है?
देहरादून, जो कभी रिटायरमेंट की लाइफ जीने के लिए सबसे शांत शहर माना जाता था, अब संगठित अपराध (Organized Crime) का अड्डा बनता जा रहा है।
- सवाल: क्या झारखंड और बाहरी राज्यों के गैंग अब देहरादून को अपनी 'सेफ हेवन' बना रहे हैं?
- सवाल: क्या दून पुलिस इन हाई-प्रोफाइल गैंगस्टर्स की मौजूदगी से बेखबर थी?
