ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में 'जमीनों का बड़ा खेल': डीएम सविन बंसल की स्ट्राइक के बाद उप-निबंधक निलंबित, करोड़ों की स्टाम्प चोरी उजागर

देहरादून/ऋषिकेश, 14 फरवरी 2026: उत्तराखंड की राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। ऋषिकेश तहसील स्थित उप-निबंधक (Sub-Registrar) कार्यालय में चल रहे काले खेल का पर्दाफाश करते हुए शासन ने उप-निबंधक हरीश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीएम की औचक निरीक्षण रिपोर्ट ने शासन की नींव हिला दी है, जिसमें करोड़ों की स्टाम्प चोरी और 'भूतिया कर्मचारियों' (Ghost Employees) के जरिए रजिस्ट्रियां कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में 'जमीनों का बड़ा खेल': डीएम सविन बंसल की स्ट्राइक

1. औचक निरीक्षण: जब खुद 'सुलतान' पहुंचे मैदान में

बीते दिनों जिलाधिकारी सविन बंसल को ऋषिकेश कार्यालय के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आम जनता का आरोप था कि वहां बिना सुविधा शुल्क (रिश्वत) के न तो रजिस्ट्री होती है और न ही मूल दस्तावेज वापस मिलते हैं।

निरीक्षण के मुख्य बिंदु:

  • अनाधिकृत संचालन: जब डीएम कार्यालय पहुंचे, तो उप-निबंधक हरीश कुमार बिना किसी सूचना के गायब थे। उनकी कुर्सी पर बैठकर एक लिपिक (Clerk) अवैध रूप से विलेखों का पंजीकरण कर रहा था।
  • फर्जी कार्मिक (Ghost Workers): कार्यालय में ऐसे लोग काम करते पाए गए जिनका सरकारी रिकॉर्ड में कोई नाम नहीं था। न नियुक्ति पत्र, न उपस्थिति पंजिका में दर्ज नाम, फिर भी वे सरकारी फाइलों और रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को हैंडल कर रहे थे।

2. करोड़ों की स्टाम्प चोरी का 'इंडस्ट्रियल' खेल

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा माजरी ग्रांट (डोईवाला) क्षेत्र को लेकर हुआ। दून घाटी विशेष महायोजना-2031 के तहत जो भूमि 'औद्योगिक' (Industrial) उपयोग के लिए आरक्षित थी, उसे 'आवासीय' दिखाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बेच दिया गया।

मदविवरण
क्षेत्रमाजरी ग्रांट, तहसील डोईवाला
नियम उल्लंघनऔद्योगिक भूमि को आवासीय दरों पर बेचना
धोखाधड़ीस्टाम्प चोरी के साथ-साथ क्रेताओं को गलत भू-उपयोग वाली जमीन बेची गई
राजस्व हानिअनुमानित करोड़ों रुपये

3. अलमारियों में धूल फांकते 'आम जनता के अरमान'

नियमों के अनुसार, रजिस्ट्री होने के अधिकतम 3 दिन के भीतर मूल दस्तावेज (Original Papers) मालिक को वापस मिल जाने चाहिए। लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि:

  • सैकड़ों मूल विलेख (Deeds) महीनों और सालों से अलमारियों में बंद थे।
  • अर्जेन्ट नकल: जिसके लिए जनता अतिरिक्त शुल्क देती है और जो 24 घंटे में मिलनी चाहिए, वह भी महीनों से लंबित थी।
  • फरियादियों ने डीएम के सामने रो-रोकर अपनी आपबीती सुनाई कि कैसे उन्हें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर दौड़ाया जा रहा था।

4. तकनीकी अज्ञानता या जानबूझकर की गई अनदेखी?

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि निबंधक लिपिक को संपत्ति के मूल्य आकलन (Valuation) का बुनियादी ज्ञान तक नहीं था। इसके बावजूद वह स्टाम्प शुल्क पास कर रही थी। यह स्पष्ट करता है कि नियम-कायदों को ताक पर रखकर केवल 'संगठित भ्रष्टाचार' चलाया जा रहा था।

इन कानूनों का हुआ उल्लंघन:

  1. भारतीय स्टाम्प (उत्तराखंड संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 47क।
  2. भारतीय रजिस्ट्रेशन मैनुअल के नियम 325, 195 व 196।
  3. सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा अनुभाग की 2016 की अधिसूचना।

5. शासन का कड़ा रुख: जीरो टॉलरेंस

जिलाधिकारी की संयुक्त जांच आख्या (जिसमें एसडीएम ऋषिकेश और जिला शासकीय अधिवक्ता शामिल थे) के आधार पर शासन ने हरीश कुमार को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। अब उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Action) शुरू कर दी गई है।

डीएम सविन बंसल का संदेश: "जनता की पीड़ा को नजरअंदाज करने वाले और सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले अधिकारियों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है। यह सिर्फ शुरुआत है, अन्य तहसीलों और रजिस्ट्रार कार्यालयों का भी नंबर जल्द आएगा।"

6. विश्लेषण: क्या है इस 'लैंड स्कैम' की गहराई? (विस्तृत खोजी अंश)

यह मामला केवल एक अधिकारी के निलंबन का नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र पर सवाल उठाता है जहां बाहरी व्यक्ति (Private Persons) सरकारी कार्यालयों में बैठकर रजिस्ट्रियां कर रहे हैं।

  • फर्जी कर्मचारियों का डर: यदि कोई बाहरी व्यक्ति रजिस्ट्री करता है, तो भविष्य में उन जमीनों की कानूनी वैधता पर संकट आ सकता है।
  • भू-उपयोग परिवर्तन का खेल: औद्योगिक भूमि को आवासीय दिखाना न केवल राजस्व की चोरी है, बल्कि यह भविष्य के शहरी नियोजन (Urban Planning) को भी बर्बाद कर देता है।

सुधार की उम्मीद

ऋषिकेश के इस एक्शन ने पूरे उत्तराखंड के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। सविन बंसल की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' से आम जनता में यह भरोसा जगा है कि अगर शिकायत सही हो, तो कार्रवाई निश्चित है।

भविष्य की राह: अब देखना होगा कि क्या उन 'प्राइवेट ऑपरेटरों' पर भी एफआईआर दर्ज होती है जो सरकारी दफ्तर को अपनी जागीर समझकर चला रहे थे। साथ ही, उन रजिस्ट्री धारकों का क्या होगा जिन्होंने गलत तरीके से स्टाम्प ड्यूटी बचाई है?

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