उत्तरकाशी जनपद की गोडर पट्टी स्थित जांदणु गांव के ग्रामीणों ने अपनी आने वाली पीढ़ी को नशे की गर्त से बचाने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। ग्राम प्रधान चमन लाल की अध्यक्षता में आयोजित एक सामूहिक बैठक में गांव के सभी 42 परिवारों ने एकमत होकर यह निर्णय लिया कि अब गांव में होने वाली मेहंदी की रस्म या किसी भी अन्य समारोह में शराब नहीं परोसी जाएगी। ग्रामीणों का मानना है कि शादी जैसे पवित्र आयोजनों में शराब का बढ़ता चलन न केवल उत्सव के वास्तविक स्वरूप को बिगाड़ रहा है, बल्कि इससे सामाजिक अशांति और लड़ाई-झगड़े भी बढ़ रहे हैं। इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए यह भी तय किया गया है कि यदि कोई परिवार आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसका पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा
फिजूलखर्ची पर रोक और परंपराओं का सम्मान
शराब बंदी के साथ-साथ ग्रामीणों ने शादियों में होने वाले अनावश्यक खर्चों को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अक्सर देखा जाता है कि दिखावे की होड़ में गरीब परिवार आर्थिक दबाव में आ जाते हैं, जिसे देखते हुए गांव की महिलाओं (रुहिणियों) को पिठाई की रस्म के दौरान दी जाने वाली धनराशि को अब 11 रुपये और 101 रुपये के रूप में निश्चित कर दिया गया है। इसके अलावा, देर रात तक बजने वाले डीजे के शोर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए रात दो बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। इन फैसलों के पीछे ग्रामीणों की सोच यह है कि शादी-ब्याह का माहौल सौहार्दपूर्ण बना रहे और फिजूलखर्ची के बजाय परंपराओं को गरिमा के साथ निभाया जाए।
युवा पीढ़ी के भविष्य को बचाने की कवायद
ग्राम प्रधान चमन लाल और गांव के वरिष्ठ ग्रामीण राजेश पंवार ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालना है। बैठक में यह चिंता जताई गई कि मेहंदी और कॉकटेल पार्टियों के नाम पर परोसी जा रही शराब युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है। सयाणों का कहना है कि शराब पर होने वाले भारी खर्च से कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं, जिसे रोकना अब अनिवार्य हो गया है। इस बैठक में जगमोहन सिंह, मनमोहन सिंह, जयेंद्र सिंह सहित कई गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने इस संकल्प को सामूहिक रूप से निभाने की शपथ ली।
उत्तराखंड में बढ़ रही है नशामुक्ति की लहर
जांदणु गांव से पहले देहरादून के गड़ूल गांव और उत्तरकाशी के ही लोदाड़ा गांव में भी ऐसी सराहनीय पहल देखने को मिल चुकी है। गड़ूल गांव की प्रधान स्वीटी रावत ने तो कॉकटेल पार्टी न करने वाले परिवारों को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की अनूठी परंपरा शुरू की है। वहीं, लोदाड़ा गांव में शराब परोसने वालों पर 51 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाने का नियम है। उत्तराखंड के गांवों में स्वतः स्फूर्त तरीके से शुरू हुआ यह 'नशामुक्त अभियान' इस बात का प्रमाण है कि अब देवभूमि के ग्रामीण अपनी संस्कृति और युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर सजग हो रहे हैं। यह बदलाव आने वाले समय में एक स्वस्थ और आदर्श समाज की नींव रखेगा।