चारधाम यात्रा 2026: केदारनाथ-बदरीनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन; BKTC ने बजट बैठक में प्रस्ताव किया पारित

देहरादून, 11 मार्च 2026: उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले एक बड़ा और दूरगामी निर्णय लिया गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने आधिकारिक तौर पर केदारनाथ, बदरीनाथ और इनके अधीन आने वाले कुल 47 मंदिरों के परिसर एवं गर्भगृह में गैर-हिंदुओं (गैर-सनातनियों) के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मंगलवार को हुई बजट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।

बीजेपी नेता हेमंत द्विवेदी अभी बीकेटीसी के अध्यक्ष हैं.

बजट बैठक और ऐतिहासिक प्रस्ताव

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधानसभा सत्र के बीच, देहरादून स्थित बीकेटीसी शिविर कार्यालय में अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में बजट बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹121.7 करोड़ का बजट पास किया गया। इसी दौरान मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से गैर-सनातनियों के प्रवेश वर्जित का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित हुआ।

क्यों लिया गया यह फैसला?

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, यह निर्णय लंबे समय से उठ रही जनभावनाओं और तीर्थस्थलों की 'सनातन पहचान' को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है। उन्होंने निम्नलिखित मुख्य कारण गिनाए:

  • धार्मिक पवित्रता: तीर्थस्थलों की पौराणिक मर्यादा और पवित्रता अक्षुण्ण रखना।
  • लैंड जिहाद: प्रदेश में अवैध मजारों के निर्माण और जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिशों के बीच सुरक्षा उपाय।
  • आस्था का सम्मान: यह सुनिश्चित करना कि मंदिर परिसर में केवल वे ही लोग आएं जो सनातन धर्म में पूर्ण विश्वास रखते हैं।

बीकेटीसी के फैसले का मुख्य विवरण

श्रेणीविवरण
प्रतिबंधित क्षेत्रमंदिर परिसर (Premises) और गर्भगृह (Sanctum Sanctorum)
छूट प्राप्त धर्मसिख, जैन और बौद्ध (सनातन धारा से निकले धर्म)
प्रभावी तिथि19 अप्रैल 2026 (चारधाम यात्रा प्रारंभ से)
प्रभावित मंदिरबदरीनाथ, केदारनाथ समेत कुल 47 मंदिर
संविधान का हवालाअनुच्छेद 25-26 के तहत धार्मिक प्रबंधन का अधिकार

इन 47 प्रमुख मंदिरों में लागू होगा प्रतिबंध

बीकेटीसी ने उन मंदिरों की सूची जारी की है जहाँ अब केवल सनातनी ही प्रवेश कर सकेंगे:

  • मुख्य धाम: बदरीनाथ और केदारनाथ।
  • पंच केदार: तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर, मद्महेश्वर।
  • शीतकालीन गद्दीस्थल: ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ), नरसिंह मंदिर (जोषीमठ)।
  • अन्य पौराणिक स्थल: त्रियुगीनारायण, कालीमठ, विश्वनाथ मंदिर (गुप्तकाशी), भविष्य बदरी, योगध्यान बदरी, आदि बदरी, वृद्ध बदरी, माता मूर्ति मंदिर, वासुदेव मंदिर, गौरी कुंड और सती कुंड।

रोजगार पर नहीं पड़ेगा असर

पहाड़ी रास्तों पर डोली, कंडी और घोड़े-खच्चर चलाने वाले कई लोग गैर-हिंदू समुदाय से आते हैं। समिति ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल मंदिर परिसर और गर्भगृह के भीतर लागू होगा। संचालक मंदिर के प्रवेश द्वार (बाहर) तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे, जिससे उनके रोजगार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मिश्रित प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक हलचल

इस निर्णय पर देशभर से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं:

  • ओवैसी और मदनी: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और अरशद मदनी ने इसे संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन और समाज को बांटने वाला कदम बताया है।
  • डॉ. इमाम इलियासी: ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि हर धर्म के अपने नियम होते हैं और मक्का-मदीना की तरह मंदिरों के नियमों का भी सम्मान होना चाहिए।
  • सरकार का रुख: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही संकेत दिया था कि सरकार मंदिर समितियों और संत समाज की राय के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।

19 अप्रैल से नई व्यवस्था

19 अप्रैल 2026 को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही यह नई व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी। 6 मार्च से शुरू हुए ऑनलाइन पंजीकरण में अब तक लाखों श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। बीकेटीसी के इस कदम के बाद अब प्रदेश के अन्य पौराणिक मंदिरों (जैसे जागेश्वर, टपकेश्वर) में भी इसी तरह की मांग उठने की संभावना बढ़ गई है।

Previous Post Next Post

Contact Form