देहरादून: उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत जगत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। राज्य के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान कनवाल का निधन हो गया है। उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा शोक प्रकट करते हुए इसे उत्तराखंड के सांस्कृतिक जगत के लिए एक ऐसी क्षति बताया है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में रहा अहम योगदान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शोक संदेश में कहा कि श्री दीवान कनवाल एक समर्पित कलाकार थे, जिन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत को न केवल संजोया, बल्कि उसे एक नई वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके गीतों और कला के माध्यम से उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू देशभर में गूँजी।
मुख्यमंत्री का शोक संदेश
| विषय | विवरण |
| श्रद्धांजलि | मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। |
| योगदान | लोक कला और संस्कृति के संरक्षण में दीवान कनवाल का अतुलनीय कार्य। |
| परिजनों को ढांढस | सीएम ने शोक संतप्त परिजनों और उनके अनगिनत प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। |
| सांस्कृतिक क्षति | इसे राज्य के कला जगत के लिए एक 'अपूरणीय क्षति' करार दिया। |
"अटूट रहेगी उनकी विरासत"
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीवान कनवाल जैसे कलाकार समाज के सांस्कृतिक दूत होते हैं। उन्होंने अपनी कला के जरिए भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से कामना की कि वे उनके परिवार और प्रशंसकों को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
कला जगत में शोक की लहर
दीवान कनवाल के निधन की खबर मिलते ही उत्तराखंड के कला, साहित्य और संगीत जगत से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है। कई वरिष्ठ लोक गायकों और कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पहाड़ की आवाज़ आज मौन हो गई है।
