गैरसैंण (भराड़ीसैंण): उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में संचालित विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद है। सत्र के बीच उत्तराखंड पुलिस के मुखिया DGP दीपम सेठ ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए भराड़ीसैंण में तैनात पुलिस बल का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना पुलिस की प्राथमिकता है।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था: एक बड़ी चुनौती
विधानसभा सत्र के दौरान राजधानी क्षेत्र में विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन और भारी आवाजाही के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए एक दोहरी चुनौती होती है। डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि सत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से सभी महत्वपूर्ण और संभावित विरोध प्रदर्शन वाले बिंदुओं को पहले ही चिन्हित कर लिया गया था।
रणनीतिक सुरक्षा और नियमित ब्रीफिंग
डीजीपी ने जानकारी दी कि सुरक्षा व्यवस्था को केवल बल प्रयोग तक सीमित न रखकर रणनीतिक रूप से तैयार किया गया है।
- चिन्हित केंद्र: संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती।
- नियमित ब्रीफिंग: फील्ड पर तैनात पुलिसकर्मियों को प्रतिदिन उनकी जिम्मेदारियों और व्यवहार को लेकर ब्रीफ किया जा रहा है।
- प्रभावी प्रबंधन: किसी भी अप्रिय स्थिति या हंगामे से निपटने के लिए क्विक रिस्पांस टीमें (QRT) अलर्ट मोड पर हैं।
DGP के निरीक्षण और सुरक्षा रोडमैप की मुख्य बातें
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| निरीक्षण स्थल | विधानसभा परिसर और आसपास के सुरक्षा बैरियर। |
| प्रमुख संदेश | पुलिस बल को पूरी तरह मोटिवेट होकर ड्यूटी करने का आह्वान। |
| कार्यप्रणाली | तकनीकी निगरानी (CCTV/ड्रोन) और जमीनी तैनाती का समन्वय। |
| जवानों से संवाद | पुलिसकर्मियों के सुझाव लिए गए और समस्याओं का मौके पर निस्तारण। |
| सुरक्षा घेरा | बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था (Multi-layer Security)। |
"पुलिस बल पूरी तरह मोटिवेट": डीजीपी का बयान
मीडिया से बातचीत करते हुए डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि विधानसभा सत्र की सुरक्षा एक चुनौतीपूर्ण कार्य जरूर है, लेकिन उत्तराखंड पुलिस के जवान उच्च मनोबल के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने स्वयं जवानों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद किया और उनके सुझावों को सुना। डीजीपी ने कहा:
"विधानसभा सत्र के दौरान सुरक्षा बनाए रखना पुलिस के लिए जिम्मेदारी और चुनौती दोनों है। हमारे जवान विपरीत परिस्थितियों और ठंडे मौसम में भी पूरी निष्ठा से डटे हुए हैं। पुलिस बल पूरी तरह मोटिवेट है और हम किसी भी स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए तैयार हैं।"
जवानों के सुझावों पर भी दिया ध्यान
- डीजीपी ने जवानों के रहने, खाने और ड्यूटी के घंटों के संबंध में फीडबैक लिया।
- उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ड्यूटी पर तैनात जवानों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाए ताकि उनकी कार्यक्षमता प्रभावित न हो।
- कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों से भी राय ली गई।
- सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और आम जनता के साथ शालीन व्यवहार पर विशेष जोर दिया गया।
अभेद्य सुरक्षा में गैरसैंण सत्र
डीजीपी दीपम सेठ के इस दौरे और जवानों के साथ सीधे संवाद से पुलिस बल में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। भराड़ीसैंण की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच उत्तराखंड पुलिस का यह 'मोटिवेशनल मॉडल' सत्र के सफल और शांतिपूर्ण संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
