ब्रेन कनेक्ट 2026: शोध और इलाज के बीच की दूरी मिटाएगा वैज्ञानिकों का यह 'महामंथन'; हिम्स जौलीग्रांट में न्यूरोसाइंस का बड़ा समागम


Aapki Media AI


डोईवाला/जौलीग्रांट, 24 मार्च 2026: चिकित्सा जगत में 'लैब' (Laboratory) और 'बेडसाइड' (Patient Care) के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (SRHU) के हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) में एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय न्यूरोसाइंस संगोष्ठी ‘ब्रेन कनेक्ट-2026’ का सफल आयोजन किया गया।


इंटरनेशनल ब्रेन अवेयरनेस वीक के उपलक्ष्य में आयोजित इस संगोष्ठी में देश के दिग्गज वैज्ञानिकों और न्यूरो-विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं और मस्तिष्क अनुसंधान (Brain Research) पर गहरा मंथन किया।

ब्रेन कनेक्ट-2026: मुख्य बिंदु

विवरण (Description)जानकारी (Details)
आयोजकहिम्स (HIMS) जौलीग्रांट एवं इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंसेस (IAN)
विषय (Theme)ट्रांसलेशनल न्यूरोसाइंस और क्लिनिकल प्रैक्टिस का समन्वय
मुख्य वक्ताडॉ. शशि बाला सिंह (पूर्व DG, DRDO), डॉ. विनय कुमार खन्ना (अध्यक्ष, IAN)
सहभागी संस्थानIIT मद्रास, IIT रुड़की, BHU, NIMHANS, NBRC मनेसर
विशेष फोकसउत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूरोलॉजिकल रोगों का अध्ययन

1. ट्रांसलेशनल रिसर्च: शोध को अस्पताल तक पहुँचाने की चुनौती

संगोष्ठी का मुख्य केंद्र 'ट्रांसलेशनल न्यूरोसाइंस' रहा। IAN के सचिव डॉ. पंकज सेठ (NBRC मनेसर) ने स्पष्ट किया कि प्रयोगशाला में होने वाला शोध तब तक सफल नहीं माना जा सकता जब तक उसका लाभ अस्पताल में भर्ती मरीज को न मिले।

प्रमुख विशेषज्ञों के विचार:

  • डॉ. विनय कुमार खन्ना: भारत न्यूरोसाइंस में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब समय इसे सीधे 'क्लिनिकल प्रैक्टिस' से जोड़ने का है।
  • डॉ. शशि बाला सिंह (पूर्व महानिदेशक, DRDO): भविष्य की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से मस्तिष्क अनुसंधान पर टिकी होंगी। ऐसे आयोजन नवाचार (Innovation) के लिए ऊर्जा का काम करते हैं।

2. उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संगोष्ठी?

हिम्स जौलीग्रांट में न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक गोयल ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक स्थिति और जीवनशैली के कारण यहाँ न्यूरोलॉजिकल रोगों (जैसे मिर्गी, स्ट्रोक और अल्जाइमर) के अध्ययन की व्यापक संभावनाएं हैं।

  • पर्वतीय स्वास्थ्य सेवा: ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभावों और वहां की विशिष्ट बीमारियों के उपचार के लिए यह शोध मंच मील का पत्थर साबित होगा।
  • युवा वैज्ञानिकों को अवसर: इस संगोष्ठी ने उत्तराखंड के मेडिकल छात्रों को देश के शीर्ष वैज्ञानिकों से रूबरू होने का मौका दिया।

3. बहु-विषयक सहयोग: न्यूरोसाइंस का भविष्य

निमहंस (NIMHANS) बेंगलुरु की डॉ. फाल्गुनी अल्लादी और बीएचयू (BHU) के डॉ. रजनीकांत मिश्रा ने जोर देकर कहा कि मस्तिष्क एक जटिल अंग है। इसे समझने के लिए बायोलॉजी, इंजीनियरिंग (IITs) और क्लिनिकल मेडिसिन का एक साथ आना जरूरी है।

4. देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की भागीदारी

आयोजन समिति के सदस्य डॉ. कंचन बिष्ट और डॉ. कौशिक प्रमोद शर्मा ने बताया कि ‘ब्रेन कनेक्ट’ ने देश के बौद्धिक दिग्गजों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया। इसमें निम्नलिखित संस्थानों ने सक्रिय हिस्सा लिया:

  • आईआईटी मद्रास एवं रुड़की (तकनीकी दृष्टिकोण)
  • सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च एवं एनबीआरसी (गहन शोध)
  • जेएनयू, बीएचयू और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज (अकादमिक योगदान)

5. 'ब्रेन कनेक्ट' का उद्देश्य: प्रयोगशाला से मरीज तक (Lab to Bedside)

संगोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि शोध पत्र केवल फाइलों तक सीमित न रहें। इंटरनेशनल ब्रेन अवेयरनेस वीक का असली उद्देश्य तभी पूरा होगा जब समाज में मस्तिष्क स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और गंभीर न्यूरो रोगों का इलाज सस्ता और सुलभ होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं की नई दिशा

हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी उत्तराखंड को न्यूरोसाइंस शोध के एक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। डॉ. स्वामी राम के विजन को आगे बढ़ाते हुए, यह आयोजन चिकित्सा विज्ञान और मानवता के बीच के सेतु को मजबूत करता है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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