देहरादून, 19 मार्च 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर) और चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में चैत्र नवरात्रि को आत्म-शुद्धि, नारी शक्ति के सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का महापर्व बताया है।
नारी शक्ति के सामर्थ्य का प्रतीक है नवरात्रि
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में नारी के महत्व और सामर्थ्य को दर्शाने वाला पर्व है। उन्होंने विशेष रूप से कन्या पूजन का उल्लेख करते हुए कहा:
"कन्या पूजन हमारी परंपरा में नारी शक्ति के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर मैं सभी प्रदेशवासियों से अपील करता हूँ कि वे समाज में नारियों के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लें।"
चैत्र नवरात्रि: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
| बिंदु | मुख्यमंत्री के संदेश का मुख्य अंश |
| आध्यात्मिक आधार | इसे आत्म-शुद्धि और सद् प्रवृत्ति का आधार माना गया है। |
| ऊर्जा का संचार | मां दुर्गा के पूजन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मकता का उदय होता है। |
| धार्मिक आयोजन | प्रदेश के सभी प्रमुख देवी मंदिरों और शक्तिपीठों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की परंपरा। |
| संकल्प की शक्ति | किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में संकल्प लेना हमारी सनातन परंपरा का हिस्सा है। |
रचनात्मक और सृजनात्मक कार्यों की प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि शक्ति के अनुष्ठान का यह पर्व हमें केवल भक्ति तक सीमित नहीं रखता, बल्कि रचनात्मक और सृजनात्मक कार्यों के प्रति प्रेरित करता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे इस नव संवत्सर पर देश और समाज की सेवा का नवीन उत्साह के साथ संकल्प लें।
शक्तिपीठों में भक्ति का उल्लास
उत्तराखंड, जिसे 'देवभूमि' के नाम से जाना जाता है, यहाँ चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सिद्धपीठों और शक्तिपीठों में जिस प्रकार की धार्मिक महत्ता है, वह हमारी महान परंपरा की प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि यह नव संवत्सर सभी के जीवन में:
- सुख और शांति लेकर आए।
- समृद्धि और उन्नति के नए मार्ग खोले।
- आरोग्य और कल्याण सुनिश्चित करे।
सनातन परंपरा का गौरव
सीएम धामी का यह संदेश न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करता है, बल्कि आधुनिक समाज में नारी शक्ति के सशक्तिकरण और सामाजिक सेवा के मूल्यों को भी रेखांकित करता है। प्रदेश भर के मंदिरों में आज से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
