देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून इन दिनों भक्ति और सद्भावना के अनूठे संगम का केंद्र बनी हुई है। ऐतिहासिक श्री झंडा जी मेले के अवसर पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में संगतें दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज परिसर में पहुंच चुकी हैं। रविवार को मेले का मुख्य आकर्षण 'श्री झंडे जी का आरोहण' आयोजित किया जाएगा, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
आज का मुख्य कार्यक्रम: पूजा और ध्वज आरोहण
मेला आयोजन समिति के अनुसार, रविवार सुबह 7 बजे से पुराने ध्वजदंड (श्री झंडे जी) को उतारने की पारंपरिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद संगतों द्वारा पवित्र ध्वजदंड को दूध, दही, घी, गंगाजल और पंचगव्य से स्नान कराया जाएगा। सुबह 10 बजे से गिलाफ (वस्त्र) चढ़ाने की सेवा शुरू होगी।
झंडा जी मेले का महत्वपूर्ण कार्यक्रम विवरण:
| कार्यक्रम | समय / तिथि | विवरण |
| ध्वज स्नान एवं पूजा | 8 मार्च, सुबह 7:00 बजे | दूध, दही और गंगाजल से पवित्र स्नान |
| गिलाफ चढ़ाना | 8 मार्च, सुबह 10:00 बजे | संगतों द्वारा मन्नत के गिलाफ चढ़ाना |
| मुख्य ध्वज आरोहण | 8 मार्च, दोपहर 2:00 - 4:00 बजे | श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज की अगुआई में |
| ऐतिहासिक नगर परिक्रमा | 10 मार्च 2026 | देहरादून नगर में विशाल शोभायात्रा |
श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी ने दिया गुरु मंत्र
मेले की पूर्व संध्या पर शनिवार को दरबार साहिब के सज्जादे गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने हज़ारों की संख्या में उपस्थित संगतों को गुरु मंत्र प्रदान किया। उन्होंने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार सूर्य सबको समान प्रकाश देता है, उसी प्रकार गुरु का ज्ञान अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर जीवन में उजाला लाता है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
विशाल जनसमूह को देखते हुए प्रशासन और मेला समिति ने सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए हैं:
- लाइव प्रसारण: परिसर में 5 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। साथ ही फेसबुक और यूट्यूब पर भी सीधा प्रसारण किया जा रहा है।
- स्वास्थ्य सेवाएं: श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की मेडिकल टीमें और एम्बुलेंस 24 घंटे तैनात हैं। निःशुल्क दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।
- रक्तदान शिविर: 6, 7 और 9 मार्च को विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अब तक 150 यूनिट रक्त एकत्र हो चुका है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सिखों के सातवें गुरु, श्री गुरु हर राय जी के ज्येष्ठ पुत्र श्री गुरु राम राय जी महाराज ने सन् 1646 में देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया था। उनकी याद में हर वर्ष होली के पांचवें दिन (चैत्र वदी पंचमी) को उनके जन्मोत्सव के रूप में यह मेला आयोजित किया जाता है, जो प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है।
- दरबार साहिब परिसर में जैविक खेती के उत्पादों के स्टॉल और पूरब की संगतों की विदाई जैसी परंपराएं मेले के आकर्षण को और बढ़ा रही हैं।
श्री झंडा जी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देहरादून की सांस्कृतिक पहचान है। दोपहर में होने वाले ध्वज आरोहण के दौरान पूरा परिसर 'धन्य गुरु राम राय' के जयकारों से गुंजायमान रहेगा।
