पिटकुल (PTCUL) के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब 18 फरवरी 2026 को माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उनकी नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया। इसके बावजूद अधिकारी को पद से न हटाने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया:
- समन जारी: हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को 19 मार्च 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
- बैकडेट आदेश का संदेह: आरोप है कि 27 फरवरी को कोर्ट की फटकार के बाद आनन-फानन में एक आदेश जारी किया गया, जिस पर तारीख 26 फरवरी अंकित की गई, जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
पात्रता नियमों में 'खेल' के संगीन आरोप
'जन प्रहार' संगठन ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि सरकार ने तीनों ऊर्जा निगमों (PTCUL, UPCL, UJVNL) के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों की नियुक्ति के नियमों में गुपचुप तरीके से बदलाव किए हैं।
- आयु सीमा में बदलाव: आवेदन की अधिकतम उम्र सीमा 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई है।
- तकनीकी अर्हता खत्म: सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि टेक्निकल पद के लिए अनिवार्य तकनीकी योग्यता (Technical Qualification) की शर्त को ही समाप्त कर दिया गया है।
पूरे घटनाक्रम का टाइमलाइन: कब क्या हुआ?
| तिथि | घटनाक्रम |
| 18 फरवरी 2026 | हाईकोर्ट ने MD प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति निरस्त की। |
| 27 फरवरी 2026 | अवमानना मामले में कोर्ट की टिप्पणी; प्रमुख सचिव ऊर्जा को समन। |
| 05 मार्च 2026 | तीनों निगमों के MD/निदेशक नियुक्ति नियमों में बदलाव के कार्यालय ज्ञाप जारी। |
| 07 मार्च 2026 | नियमों में बदलाव की जानकारी सार्वजनिक हुई। |
| 19 मार्च 2026 | प्रमुख सचिव ऊर्जा की कोर्ट में पेशी की नियत तिथि। |
ऊर्जा विभाग पर 'जन प्रहार' के 6 तीखे सवाल
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दीप्ति पोखरियाल, सुजाता पॉल और एडवोकेट पंकज सिंह क्षेत्री ने सरकार से सीधे सवाल पूछे हैं:
- पिटकुल एमडी पद से जुड़े सभी निर्णय सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?
- नियमों में बदलाव की प्रक्रिया को पारदर्शी क्यों नहीं रखा गया?
- हाईकोर्ट के आदेश के तत्काल बाद अनुपालन की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हुई?
- उम्र सीमा 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष किसके लिए की गई?
- टेक्निकल पदों से तकनीकी योग्यता की अनिवार्यता क्यों हटाई गई?
- क्या यह सब किसी विशेष व्यक्ति को पद पर बनाए रखने की कवायद है?
मुख्यमंत्री के पास है विभाग, पारदर्शिता की मांग
चूँकि ऊर्जा विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए संगठन ने मांग की है कि सरकार इस पूरे प्रकरण पर श्वेत पत्र जारी करे। आशंका जताई जा रही है कि नियमों में यह बदलाव किसी बड़े प्रशासनिक या वित्तीय लाभ के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।