देहरादून: उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का मुद्दा एक बार फिर सड़कों पर दहकने लगा है। पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी के मार्गदर्शन में 18 वर्षीय पत्रकारिता छात्र पार्थ रतूड़ी 'प्रण से प्राण तक' के संकल्प के साथ अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं। यह आंदोलन केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों को हकीकत में बदलने की एक युवा हुंकार बनकर उभरा है।

गैरसैंण के लिए 18 वर्षीय छात्र पार्थ रतूड़ी का अनशन
शहीदों के ऋण की याद: "नेताओं का अहसान नहीं"
अनशन स्थल से अपने संबोधन में पार्थ रतूड़ी ने राजनीतिक दलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में कांग्रेस द्वारा सत्र आयोजित करना या त्रिवेंद्र सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करना जनता पर कोई अहसान नहीं है।
"असली ऋण तो उन 42 आंदोलनकारियों और शहीदों का है, जिन्होंने गैरसैंण के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। आज नेता अपनी उपलब्धियों का गुणगान करते हैं, लेकिन शहादतों को भुला दिया गया है।"
— पार्थ रतूड़ी, पत्रकारिता छात्र
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बना जनता की आशा
पार्थ ने कहा कि जब विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जनभावनाओं को समझने में विफल हो जाती हैं, तब पत्रकारिता (लोकतंत्र का चौथा स्तंभ) ही अंतिम उम्मीद होती है। इसी दायित्व को निभाते हुए उन्होंने एक छात्र के रूप में इस संघर्ष की मशाल थामी है।
आंदोलन की मुख्य बातें और आगामी रणनीति
| पक्ष | विवरण |
| मुख्य मांग | गैरसैंण को उत्तराखंड की 'स्थायी राजधानी' घोषित करना। |
| नेतृत्व/मार्गदर्शन | पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी। |
| संकल्प | 'प्रण से प्राण तक' (अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन)। |
| अगला कदम | देहरादून विधानसभा का घेराव और कानूनी लड़ाई (न्यायालय)। |
| प्रशासनिक शिकायत | धरना स्थल पर गंदगी और नगर निगम की संवेदनहीनता। |
प्रशासन की संवेदनहीनता: गंदगी के बीच अनशन
पार्थ रतूड़ी ने प्रशासन और नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित धरना स्थल गंदगी से पटा हुआ है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मेयर को फोन के माध्यम से सूचित किया गया, लेकिन सफाई की कोई व्यवस्था नहीं हुई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आंदोलन के प्रति सरकार की संवेदनहीनता करार दिया।
निर्णायक जंग: विधानसभा घेराव और कोर्ट की तैयारी (मुख्य बिंदु)
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल बातों से काम नहीं चलेगा। आगामी रणनीति के तहत:
- विधानसभा घेराव: जल्द ही देहरादून में विधानसभा का बड़ा घेराव किया जाएगा।
- न्यायालय का द्वार: इस मुद्दे को कानूनी रूप से स्थापित करने के लिए न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी है।
- पहाड़ की अस्मिता: इस संघर्ष को उत्तराखंड की आत्मा और अस्मिता की रक्षा का युद्ध बताया गया है।
युवा नेतृत्व में नई धार
18 वर्षीय पार्थ रतूड़ी का यह अनशन दर्शाता है कि गैरसैंण का मुद्दा अब नई पीढ़ी के हाथों में पहुँच गया है। पूर्व नौकरशाह विनोद प्रसाद रतूड़ी का अनुभव और युवा जोश का यह मेल राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। 'प्रण से प्राण तक' का यह नारा आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति की दिशा तय करेगा।