SIT का बड़ा खुलासा: 9 राज्यों में फैला था फर्जी डिग्री का काला कारोबार; हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के नाम पर भी बेची गईं जाली मार्कशीट

कानपुर/देहरादून: उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) ने शिक्षा जगत में सेंध लगाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि यह गिरोह उत्तराखंड के महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय (MAHGU) के नाम पर भी फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट बेच रहा था। SIT द्वारा कराए गए भौतिक सत्यापन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बरामद दस्तावेजों को 'जाली' करार दिया है।

फरवरी 2026 की छापेमारी से शुरू हुई जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल का खुलासा फरवरी 2026 में हुआ था, जब किदवई नगर (कानपुर) पुलिस ने एक ट्यूशन सेंटर पर छापा मारकर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 900 से अधिक फर्जी डिग्रियां, प्रोविजनल सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। इन दस्तावेजों में देश के 14 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और एक शिक्षा बोर्ड के नाम शामिल थे।

हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय की भूमिका और सत्यापन

SIT की जांच में हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय (पौड़ी गढ़वाल) की एक B.Com मार्कशीट और एक डिप्लोमा डिग्री बरामद हुई थी।

  • विश्वविद्यालय की पुष्टि: जब SIT ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया, तो रिकॉर्ड खंगालने के बाद यूनिवर्सिटी ने पुष्टि की कि इन दस्तावेजों पर अंकित रोल नंबर या छात्र उनके यहाँ कभी पंजीकृत (Registered) ही नहीं थे।
  • प्रशासन की चुप्पी: इस मामले में जब विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों से पक्ष जानना चाहा, तो वर्तमान में कोई भी आधिकारिक तौर पर बोलने को तैयार नहीं हुआ। हालांकि, पूर्व में यूनिवर्सिटी ने फर्जी वेबसाइटों और अनधिकृत एडमिशन सेंटर्स के खिलाफ सार्वजनिक चेतावनी जारी की थी।

फर्जी डिग्री रैकेट: एक नजर में

विवरणप्रमुख जानकारी
नेटवर्क का विस्तार9 राज्य (UP, बिहार, झारखंड, MP, छत्तीसगढ़, आदि)
बरामद दस्तावेज900+ फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट
डिग्री की कीमतें₹50,000 से ₹2.5 लाख (कोर्स के आधार पर)
वित्तीय खुलासासरगना के खाते में 4 साल में ₹7 करोड़ का लेनदेन
जांच एजेंसीSIT (उत्तर प्रदेश पुलिस)

₹7 करोड़ का 'डिजिटल' साम्राज्य

जांच में सबसे सनसनीखेज खुलासा गिरोह के सरगना शैलेंद्र कुमार के बैंक खातों से हुआ है। पिछले 4 वर्षों में उसके खातों में 7 करोड़ रुपये का लेनदेन पाया गया है। यह राशि सीधे तौर पर उन छात्रों और नौकरी चाहने वालों से वसूली गई थी, जिन्हें B.Tech, B.Pharma और LLB जैसी उच्च शिक्षा की फर्जी डिग्रियां थमा दी गईं।

पुलिस कमिश्नर का कड़ा रुख

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि SIT की टीमें विभिन्न राज्यों और विश्वविद्यालयों में जाकर दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं। अब तक सैकड़ों दस्तावेज फर्जी पाए जा चुके हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और गिरोह के 'बैक-एंड' सपोर्ट (प्रिंटिंग और डेटाबेस) की भी जांच की जा रही है।

सावधान रहें: छात्रों के लिए सलाह (मुख्य बिंदु)

SIT और शिक्षा विशेषज्ञों ने नौकरी चाहने वालों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • आधिकारिक सत्यापन: कभी भी किसी ट्यूशन सेंटर या बिचौलिए से डिग्री न लें। सत्यापन हमेशा विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट या कैंपस जाकर ही कराएं।
  • UGC लिस्ट चेक करें: दाखिला लेने से पहले सुनिश्चित करें कि यूनिवर्सिटी UGC की 'वैध' सूची में है या नहीं।
  • वेबसाइट की जांच: गिरोह अक्सर असली यूनिवर्सिटी से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट (SPOOF) बना लेते हैं, URL की स्पेलिंग ध्यान से जांचें।

साख पर बट्टा लगाते जालसाज

महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय एक वैध प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, लेकिन जालसाजों द्वारा इसके नाम का दुरुपयोग करना चिंता का विषय है। इस खुलासे के बाद अब अन्य विश्वविद्यालयों में भी खलबली मची है, जहाँ SIT की टीमें पहुँचने वाली हैं।

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