भराड़ीसैंण (गैरसैंण): उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर में सोमवार को उस समय राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया, जब सदन के भीतर राज्यपाल का अभिभाषण चल रहा था और बाहर की सड़कों पर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के सैकड़ों कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई तीखी झड़प ने पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया।
प्रदर्शन का कारण और प्रमुख मांगें
उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ता लंबे समय से गैरसैंण को राज्य की 'स्थायी राजधानी' घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इस बार के बजट सत्र के दौरान यूकेडी ने अपनी ताकत झोंकते हुए विशाल जुलूस निकाला। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राज्य बने 25 साल होने को हैं, लेकिन आज भी पहाड़ की मूल अवधारणा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें निम्नवत हैं:
- गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को अविलंब उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करना।
- पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे निरंतर पलायन को रोकने के लिए ठोस नीति बनाना।
- जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों पर नियंत्रण और प्रभावितों को उचित मुआवजा।
- पर्वतीय क्षेत्रों में बदहाल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना।
- भू-कानून और मूल निवास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच 'जंग' जैसा नजारा
जैसे ही यूकेडी का जुलूस दिवालीखाल से भराड़ीसैंण विधानसभा की ओर बढ़ा, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए तीन स्तरीय बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों का जोश इतना अधिक था कि उन्होंने पहले दो बैरियरों को धक्का-मुक्की के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थिति को अनियंत्रित होते देख पुलिस प्रशासन ने वाटर कैनन (जल बौछार) का प्रयोग किया।
कड़ाके की ठंड और पानी की बौछारों के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। पुलिसकर्मियों और यूकेडी कार्यकर्ताओं के बीच घंटों तक जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई। अंततः पुलिस ने विधानसभा भवन से करीब एक किलोमीटर पहले ही भारी सुरक्षा घेरा बनाकर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया, जिसके बाद कार्यकर्ता वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए।
घटनाक्रम का सांख्यिकीय विवरण:
| विवरण | जानकारी |
| प्रदर्शनकारी संगठन | उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) एवं युवा मोर्चा |
| मुख्य स्थल | दिवालीखाल से भराड़ीसैंण मार्ग |
| सुरक्षा बल | पुलिस, पीएसी और क्यूआरटी (QRT) |
| पुलिस कार्रवाई | वाटर कैनन, धक्का-मुक्की और सामूहिक गिरफ्तारी |
| अस्थायी जेल | जंगलचट्टी और मेहलचोरी |
नेतृत्व का प्रहार: "शहीदों के सपनों का पहाड़ नहीं रहा"
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे यूकेडी युवा मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "उत्तराखंड राज्य का निर्माण 42 शहीदों के खून से हुआ है। उनका सपना गैरसैंण को राजधानी बनाना था, न कि देहरादून के महलों से सरकार चलाना। आज पहाड़ का पानी और जवानी दोनों पलायन की भेंट चढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार केवल इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त है।"
वहीं, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने जनप्रतिनिधियों के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो नेता पहाड़ की जनता के वोट से जीतकर देहरादून या हल्द्वानी में कोठियां बना लेते हैं, उन्हें जनता की पीड़ा समझ नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल गैरसैंण के मुद्दे पर केवल राजनीति करते हैं, समाधान कोई नहीं चाहता।
सामूहिक गिरफ्तारियां और अस्थायी जेल
दोपहर बाद जब प्रदर्शनकारी विधानसभा के प्रवेश द्वार की ओर बढ़ने पर अड़े रहे, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए सामूहिक गिरफ्तारियां शुरू कीं। आशीष नेगी समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों के जरिए हटाया गया। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से जंगलचट्टी और मेहलचोरी में अस्थायी जेलें बनाई थीं, जहां देर शाम तक प्रदर्शनकारियों को रखा गया।
- गैरसैंण सत्र के पहले दिन ही विपक्ष और क्षेत्रीय दलों के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर सरकार की राह आसान नहीं होगी।
गैरसैंण में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि पहाड़ की जनता की उन बुनियादी भावनाओं का प्रकटीकरण है जो वर्षों से स्थायी राजधानी और विकास की राह देख रही हैं। वाटर कैनन की बौछारें शायद भीड़ को तितर-बितर कर दें, लेकिन 'गैरसैंण' के सवाल को ठंडे बस्ते में डालना अब आसान नहीं होगा।