हल्द्वानी (नैनीताल), 21 मार्च 2026: देवभूमि उत्तराखंड में पैर पसारते नशे के जाल ने एक और मां की गोद सूनी कर दी है। हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र अंतर्गत पीलीकोठी स्थित एक खंडहर में 23 वर्षीय युवक शुभ का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। प्राथमिक जांच और परिस्थितियों के अनुसार, युवक की मौत नशे के इंजेक्शन के अत्यधिक सेवन (Overdose) के कारण हुई है।
एक सप्ताह पूर्व ही दिल्ली से लौटा था घर
मृतक शुभ मूल रूप से कुसुमखेड़ा, हरीपुर नायक (भूमिया विहार फेस-2) का निवासी था और अपनी मां व दो बहनों के साथ किराए के मकान में रहता था।
- मेहनतकश परिवार: शुभ की मां घरों में काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं।
- इकलौता भाई: शुभ दो बहनों का इकलौता और सबसे छोटा भाई था। वह दिल्ली की एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता था और महज एक सप्ताह पहले ही घर आया था।
घटनाक्रम: तलाश के बीच खंडहर में मिला अचेत
| समय | घटना का विवरण |
| गुरुवार सुबह | शुभ घर से घूमने के बहाने निकला था। |
| गुरुवार शाम | घर न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की, जिसके बाद वह पीलीकोठी के एक खंडहर में अचेत मिला। |
| अस्पताल में स्थिति | आनन-फानन में उसे डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। |
| डॉक्टरों की राय | चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल पहुँचने से करीब 4 घंटे पहले ही शुभ की मृत्यु हो चुकी थी। |
नशे का अड्डा बनते खंडहर: स्थानीय लोगों में आक्रोश
पीलीकोठी और आसपास के क्षेत्रों में स्थित खाली पड़े खंडहर और सुनसान स्थान नशेड़ियों के सुरक्षित अड्डे बनते जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस गश्त की कमी के कारण युवा इन स्थानों पर नशे का सेवन करते हैं। शुभ की मौत के बाद क्षेत्र में गम और गुस्से का माहौल है।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव
शुक्रवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी, हालांकि मौके के हालात 'ड्रग ओवरडोज' की ओर ही इशारा कर रहे हैं। इकलौते बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है और मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
युवाओं को बचाने की चुनौती
हल्द्वानी में स्मैक और नशे के इंजेक्शन का कारोबार जड़ों तक पहुँच चुका है। शुभ जैसे होनहार युवाओं का इस तरह असमय जाना पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अब समय आ गया है कि पुलिस प्रशासन के साथ-साथ अभिभावक भी अपने बच्चों की गतिविधियों पर पैनी नज़र रखें।
