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अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव: "इंसान कमाना सीख गया, पर जीना भूल गया"—डॉ. बिपिन जोशी; ऋषिकेश में विश्व शांति के लिए गूंजी योग साधकों की प्रार्थना

ऋषिकेश (मुनि की रेती), 20 मार्च 2026: विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के मंच से आज आधुनिक जीवन शैली और मानसिक तनाव पर गहरा प्रहार किया गया। दून योगपीठ, देहरादून के संस्थापक योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने देश-विदेश से आए योग साधकों को संबोधित करते हुए 'Way of Life' (जीवन की राह) पद्धति पर विशेष व्याख्यान दिया।

कमाना तो सीख गए, पर जीना भूल गए इंसान"— डॉ. बिपिन जोशी

बाजारवाद के दौर में योग की प्रासंगिकता

डॉ. बिपिन जोशी ने वर्तमान समय की विडंबना पर चोट करते हुए कहा कि आज मनुष्य आर्थिक रूप से समृद्ध तो हो रहा है, लेकिन मानसिक शांति खोता जा रहा है। उन्होंने मुख्य बिंदु रखे:

  • उपभोक्तावाद का प्रभाव: बाजारवाद और उपभोक्तावाद ने मनुष्य को तनाव और अवसाद (Depression) की ओर धकेल दिया है।
  • ऋषि परंपरा का महत्व: प्राचीन ऋषि-मुनि परंपरा का योग विज्ञान आज के दौर में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
  • मेडिटेशन सत्र: डॉ. जोशी ने साधकों को गहन ध्यान (Meditation) का अभ्यास कराया, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त हुआ।

विश्व शांति के लिए प्रार्थना और श्रद्धांजलि

योग महोत्सव का यह सत्र केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक संवेदनाओं से भी जुड़ा। डॉ. जोशी के नेतृत्व में साधकों ने विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की:

  1. युद्ध पीड़ितों को नमन: यूक्रेन, रूस, ईरान, इजरायल और लेबनान जैसे देशों में चल रहे युद्धों के कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
  2. शांति का संकल्प: संपूर्ण विश्व में सौहार्द और शांति की स्थापना के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।

उत्तराखंड बनेगा ग्लोबल वैलनेस हब: श्री श्री रविशंकर से भेंट

महोत्सव के दौरान डॉ. बिपिन जोशी ने आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर जी से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान देवभूमि उत्तराखंड के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई:

  • वैलनेस हब: योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और अध्यात्म के समन्वय से उत्तराखंड को दुनिया का सबसे बड़ा वैलनेस हब बनाने का रोडमैप साझा किया गया।
  • आध्यात्मिक पर्यटन: राज्य में आध्यात्मिक पर्यटन को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ।

इनका रहा विशेष सहयोग

सत्र के सफल संचालन में महायोगी जीतानांद, प्रोफेसर ज्योति उपाध्याय चुफाल और ओम योगी का विशेष तकनीकी और संगठनात्मक सहयोग रहा।

योग ही जीवन का आधार

महोत्सव का यह दिन योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और संतुलित जीवन जीने की कला के रूप में स्थापित कर गया।

नोट: यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव, मुनि की रेती से प्राप्त आधिकारिक प्रेस विवरण पर आधारित है।

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