रुड़की के पिरान कलियर क्षेत्र की रहने वाली फायरूज फातिमा ने यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में 708वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अपना स्थान पक्का किया है। फातिमा के पिता इक़बाल अहमद पेशे से एक ट्रक ड्राइवर हैं। घर की आर्थिक स्थिति और सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा के आड़े कभी कमी नहीं आने दी। पिता की कड़ी मेहनत और बेटी के अटूट विश्वास ने आज पिरान कलियर का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है।
8 साल की तपस्या और 'हार न मानने' का जज्बा
फातिमा की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। इसके पीछे 8 साल की लंबी और कठिन मेहनत छिपी है।
- संघर्ष की कहानी: फातिमा ने बताया कि वह तीन बार इस परीक्षा में असफल रहीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
- चौथी कोशिश में मिली जीत: अपने चौथे प्रयास में उन्होंने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि अच्छी रैंक हासिल कर आईएएस बनने का गौरव प्राप्त किया।
- सफलता का मंत्र: फातिमा ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा, "अगर हम पूरी लगन और सच्ची मेहनत से प्रयास करें, तो सफलता निश्चित ही कदम चूमती है।
फायरूज फातिमा: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| नाम | फायरूज फातिमा |
| स्थान | पिरान कलियर, रुड़की (उत्तराखंड) |
| पिता का व्यवसाय | ट्रक चालक (इक़बाल अहमद) |
| UPSC रैंक | 708वीं रैंक |
| संघर्ष काल | 8 वर्ष (चौथे प्रयास में सफलता) |
ढोल-नगाड़ों और फूलों से हुआ भव्य स्वागत
IAS बनने के बाद जब फायरूज फातिमा पहली बार अपने पैतृक घर पिरान कलियर पहुँचीं, तो स्थानीय निवासियों ने पलकें बिछाकर उनका स्वागत किया। फूलों की वर्षा, मालाओं और तालियों की गूँज के बीच पूरा इलाका जश्न में डूब गया। क्षेत्रवासियों का कहना है कि फातिमा ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती।
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भावुक होते हुए फातिमा ने कहा कि वह अपनी खुशी को शब्दों में बयान नहीं कर सकतीं। उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को दिया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी उनका हौसला बढ़ाए रखा। आज फातिमा की यह कहानी न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
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