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पहाड़ की 'मातृशक्ति' का नशा विरोधी हुंकार: त्रियुगीनारायण की महिलाओं ने निकाली 12 किमी लंबी पैदल रैली; केदारनाथ यात्रा से पहले 'शराब बंदी' की मांग

रुद्रप्रयाग, 23 मार्च 2026: उत्तराखंड में एक ओर धामी सरकार नई आबकारी नीति के तहत राजस्व बढ़ाने के लिए शराब की नई दुकानें खोलने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर रुद्रप्रयाग की महिलाओं ने इस 'फरमान' के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। त्रियुगीनारायण गांव की महिलाओं ने संगठित होकर नशे के खिलाफ 12 किलोमीटर लंबी पैदल रैली निकालकर शासन-प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है।


12 किलोमीटर का संघर्ष: त्रियुगीनारायण से सोनप्रयाग तक

हाथों में नशा मुक्ति की तख्तियां और जुबां पर "नशा नहीं, रोजगार दो" जैसे नारों के साथ महिलाओं का हुजूम सड़कों पर उतरा।

  • पैदल मार्च: यह रैली प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर से शुरू होकर केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव सोनप्रयाग तक पहुंची।
  • उद्देश्य: क्षेत्र में बढ़ते नशे के प्रचलन को रोकना और युवाओं को बर्बादी से बचाना।
  • सामूहिक संकल्प: रैली में शामिल महिलाओं ने शपथ ली कि वे अपने गांवों को 'ड्रग फ्री' बनाने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगी।

यात्रा मार्ग की पवित्रता पर सवाल

महिलाओं ने केदारनाथ धाम और त्रियुगीनारायण जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों के मार्गों पर बिक रही अवैध शराब पर गहरी चिंता व्यक्त की।

  • आस्था को ठेस: महिलाओं का तर्क है कि देश-दुनिया से श्रद्धालु केदारनाथ दर्शन के लिए आते हैं, ऐसे में यात्रा मार्गों पर नशे का माहौल देवभूमि की छवि खराब करता है।
  • अल्टीमेटम: आगामी 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने वाले हैं। महिलाओं ने मांग की है कि यात्रा शुरू होने से पहले प्रशासन यात्रा रूट से शराब की दुकानों और अवैध बिक्री को पूरी तरह बंद करे।

"परिवार और समाज हो रहा कमजोर"

रैली का नेतृत्व कर रही विशेश्वरी देवी भट्ट ने भावुक होते हुए कहा:

"नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं मारता, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से खत्म कर देता है। हमारी लड़ाई किसी सरकार से नहीं, बल्कि उस जहर से है जो हमारे बच्चों की रगों में घोला जा रहा है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि राजस्व से ज्यादा पहाड़ के भविष्य की चिंता करें।"

प्रशासन के लिए चुनौती

एक तरफ सरकार नई शराब की दुकानों से खजाना भरने की जुगत में है, वहीं रुद्रप्रयाग की महिलाओं का यह आक्रोश शासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल महिलाओं को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन महिलाएं अब 'आर-पार' के मूड में हैं।

चिपको आंदोलन जैसी गूँज

उत्तराखंड का इतिहास गवाह है कि जब-जब यहाँ की महिलाओं ने किसी सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज उठाई है, तब-तब सत्ता को झुकना पड़ा है। त्रियुगीनारायण की यह रैली आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में 'शराब बंदी' आंदोलन की चिंगारी बन सकती है।

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