मेहलचौंरी/गैरसैंण, 25 मार्च 2026: उत्तराखंड की अस्मिता और 'पहाड़ की राजधानी पहाड़ में' के संकल्प के साथ निकली उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की जनजागृति यात्रा अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। बुधवार को यह यात्रा मेहलचौंरी क्षेत्र के दुर्गम गांवों— मैखोली, सिलंगा और उजेटिया पहुँची, जहाँ ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ इसका ऐतिहासिक स्वागत किया।
गांव की तंग गलियों में फहराते उक्रांद के पीले झंडे और "स्थायी राजधानी गैरसैंण" के गगनभेदी नारों ने सत्ता के गलियारों तक अपनी धमक पहुँचा दी है।
उक्रांद जनजागृति यात्रा: मुख्य आकर्षण
| यात्रा का पड़ाव | मुख्य गतिविधि | संदेश/नारा |
| मैखोली (Maikholi) | जनसभा एवं स्वागत | "गैरसैंण नहीं तो चैन नहीं" |
| सिलंगा (Silanga) | मातृशक्ति का संकल्प | "बच्चों के भविष्य के लिए राजधानी जरूरी" |
| उजेटिया (Ujetiya) | मशाल जुलूस एवं संवाद | "देहरादून बनाम गैरसैंण की लड़ाई" |
| नेतृत्व (Leadership) | आशीष नेगी (वरिष्ठ उक्रांद नेता) | "अब पहाड़ जाग चुका है" |
1. आशीष नेगी की ललकार: "अब जनता छली जाने वाली नहीं"
मैखोली और उजेटिया में विशाल जनसभाओं को संबोधित करते हुए उक्रांद नेता आशिष नेगी ने सीधे तौर पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि 25 साल बाद भी उत्तराखंड की आत्मा (गैरसैंण) को न्याय नहीं मिला है।
"गांव-गांव से मिल रहा यह अपार समर्थन इस बात का प्रमाण है कि अब पहाड़ की जनता जाग चुकी है। देहरादून के एयरकंडीशन कमरों से पहाड़ की पीड़ा और यहाँ के पलायन का दर्द नहीं समझा जा सकता। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना अब केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि उत्तराखंडियों का 'अधिकार' बन चुका है।"
2. मातृशक्ति का रौद्र रूप: "बच्चों के हक के लिए लड़ेंगे"
सिलंगा और मैखोली में यात्रा का सबसे भावुक और शक्तिशाली पहलू महिलाओं की भागीदारी रही। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने फूल-मालाओं के साथ कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया।
- महिलाओं का संकल्प: सिलंगा की महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य और रोजगार के लिए गैरसैंण को राजधानी बनवाकर ही दम लेंगी।
- पहाड़ की पीड़ा: ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि जब राजधानी पहाड़ में होगी, तभी अधिकारियों और मंत्रियों को यहाँ की स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क की बदहाली का अहसास होगा।
3. "क्रांति की मशाल जल चुकी है": गांव-गांव में समर्थन
उक्रांद कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह यात्रा केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह उन शहीदों के सपनों को पूरा करने की कोशिश है जिन्होंने राज्य आंदोलन के समय गैरसैंण का सपना देखा था।
- एकजुटता: मैखोली से लेकर उजेटिया तक, हर घर से एक ही आवाज आ रही है— 'स्थायी राजधानी गैरसैंण'।
- संवैधानिक दबाव: इस यात्रा का उद्देश्य गांव-गांव से लोगों को एकजुट कर सरकार पर इतना दबाव बनाना है कि उसे गैरसैंण पर कोई ठोस निर्णय लेना ही पड़े।
