नई दिल्ली/देहरादून, 28 मार्च 2026: उत्तराखंड की राजनीति में आज उस समय बड़ा धमाका हुआ जब भाजपा के कई कद्दावर नेताओं और पूर्व विधायकों ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में 'हाथ' का साथ थाम लिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की उपस्थिति में इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, जिसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी दल भाजपा के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस में शामिल होने वाले दिग्गजों की सूची
| नेता का नाम | पूर्व पद/क्षेत्र | राजनीतिक प्रभाव |
| राजकुमार ठुकराल | पूर्व विधायक, रुद्रपुर | तराई क्षेत्र में मजबूत पकड़ |
| नारायण पाल | पूर्व विधायक, सितारगंज | क्षेत्र के कद्दावर नेता |
| भीमलाल आर्य | पूर्व विधायक, घनसाली | टिहरी जनपद में दलित चेहरा |
| गौरव गोयल | पूर्व मेयर/नगर पालिका अध्यक्ष, रुड़की | हरिद्वार जिले में बड़ा प्रभाव |
| अनुज गुप्ता | पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, मसूरी | युवाओं और व्यापारियों में लोकप्रिय |
| लाखन सिंह नेगी | वरिष्ठ नेता | संगठन और क्षेत्रीय पकड़ |
कांग्रेस की 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 2027 का रोडमैप
- दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन: कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में कुमारी शैलजा ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा की जनविरोधी नीतियों से अब उनके अपने नेता भी ऊब चुके हैं। यह दलबदल इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड में बदलाव की लहर चल पड़ी है।
- गणेश गोदियाल का बड़ा दावा: प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में भाजपा के कई और बड़े चेहरे कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी अब 2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की दिशा में मजबूती से बढ़ रही है।
- तराई और पहाड़ का संतुलन: कांग्रेस ने इस जॉइनिंग के जरिए तराई (रुद्रपुर-रुड़की) और पहाड़ (मसूरी-घनसाली) दोनों क्षेत्रों में सेंधमारी की है। राजकुमार ठुकराल और गौरव गोयल जैसे नेताओं के आने से हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में कांग्रेस का ग्राफ बढ़ना तय माना जा रहा है।
- भाजपा की नीतियों पर प्रहार: प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने बताया कि जनता का मोहभंग भाजपा से हो चुका है। महंगाई, बेरोजगारी और अंकिता भंडारी जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी ने भाजपा के भीतर भी असंतोष पैदा किया है, जिसका लाभ अब कांग्रेस को मिल रहा है।
- कार्यकर्ताओं में उत्साह: इस बड़े उलटफेर के बाद देहरादून से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि इन अनुभवी चेहरों के आने से कांग्रेस का संगठन बूथ स्तर तक और अधिक सक्रिय होगा।
देवभूमि में नए समीकरणों का उदय
एक साथ तीन पूर्व विधायकों और कई प्रभावशाली नगर निकाय अध्यक्षों का पार्टी छोड़ना उत्तराखंड भाजपा के लिए आत्ममंथन का विषय है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह 'बूस्टर डोज' की तरह है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस नुकसान की भरपाई कैसे करती है और आने वाले निकाय व पंचायत चुनावों में इन नए समीकरणों का क्या असर पड़ता है।
