देहरादून: उत्तराखंड शासन ने मंगलवार, 17 मार्च 2026 को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह बदल दिया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम् द्वारा जारी आदेशों के तहत UPCL और UJVNL के प्रबंध निदेशकों (MD) को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है। इसके साथ ही बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के सीईओ की प्रतिनियुक्ति भी रद्द कर दी गई है।
प्रशासनिक फेरबदल: किसे हटाया गया और किसे मिला प्रभार?
| विभाग / निगम | निवर्तमान अधिकारी (पदमुक्त) | नए प्रभारी (अतिरिक्त प्रभार) | मुख्य टिप्पणी |
| UPCL (बिजली विभाग) | अनिल कुमार (MD) | गजेन्द्र सिंह बुदियाल | सेवा विस्तार आदेश निरस्त। |
| UJVNL (जल विद्युत) | संदीप सिंघल (MD) | अजय कुमार सिंह | कार्यकाल और सेवा विस्तार समाप्त। |
| UPCL (परियोजना) | अजय कुमार अग्रवाल (निदेशक) | -- | तत्काल प्रभाव से पदमुक्त। |
| BKTC (मंदिर समिति) | विजय प्रसाद थपलियाल (CEO) | -- | मूल विभाग (मंडी समिति) वापसी। |
ऊर्जा विभाग में बड़े बदलाव की पूरी कहानी
1. UPCL: अनिल कुमार और अजय अग्रवाल की विदाई
शासन ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें अक्टूबर 2024 में दो साल का सेवा विस्तार दिया गया था, जिसे अब सरकार ने रद्द कर दिया है। इसके साथ ही निदेशक (परियोजना) अजय कुमार अग्रवाल को भी पदमुक्त कर दिया गया है।
अब UPCL की कमान अंतरिम तौर पर गजेन्द्र सिंह बुदियाल को सौंपी गई है। बुदियाल वर्तमान में UJVNL में महाप्रबंधक (यमुना वैली) के पद पर कार्यरत हैं।
2. UJVNL: संदीप सिंघल का कार्यकाल समाप्त
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के एमडी संदीप सिंघल को भी पद से हटा दिया गया है। वे जनवरी 2020 से इस पद पर तैनात थे और सेवा विस्तार पर चल रहे थे। उनकी जगह अजय कुमार सिंह (महाप्रबंधक, भागीरथी वैली) को प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
महत्वपूर्ण नोट: शासन ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त प्रभार संभालने वाले अधिकारियों को इसके लिए कोई भी अतिरिक्त वेतन या भत्ता देय नहीं होगा। यह व्यवस्था नियमित नियुक्ति होने तक प्रभावी रहेगी।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में भी बदलाव
ऊर्जा विभाग के साथ-साथ पर्यटन अनुभाग ने भी कड़ा निर्णय लिया है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) विजय प्रसाद थपलियाल की प्रतिनियुक्ति निरस्त कर दी गई है। उन्हें उनके मूल विभाग, कृषि उत्पादन मंडी समिति, देहरादून में वापस भेज दिया गया है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे 'कार्यहित' में लिया गया निर्णय बताया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इसे ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊर्जा भरने और लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। 2024 में दिए गए सेवा विस्तारों को अचानक रद्द करना शासन के सख्त रुख की ओर इशारा करता है।
नए नेतृत्व से उम्मीदें
उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह एक 'संक्रमण काल' है। गजेन्द्र सिंह बुदियाल और अजय कुमार सिंह जैसे अनुभवी इंजीनियरों के कंधों पर अब राज्य की बिजली व्यवस्था और जल विद्युत उत्पादन को सुचारू रखने की बड़ी जिम्मेदारी है।
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